पंख उधार
कोई तो दे दे पंख उधार , मैं उड़ जाऊँ बदरा पार ,
बदरा की डोली में , मैं हो जाऊँ सवार ,
कोई तो ------ ||
गगना में चमकते चंदा , तारों को मैं देखूँ ,
उन चंदा - तारों को मैं , अपनी चूनर में भर लूँ ,
फिर पहन के उस चूनर को , मैं इठलाती घूमूँ ,
कोई तो -------- ||
बदरा के पास ही , मिले बहुत से पंछी ,
दो क्या , दस क्या , बीस पंख तू ले ले ,
फिर उड़ चल हमरे साथ , हम खेलेंगे बदरा पार ,
कोई तो -------- ||
तुमने पंख दिए जो मुझको , किया बहुत अहसान ,
कभी ना भूलूँगी मैं , ये सुंदर अहसान ,
जीवन की सुंदर राहें , फिर हो जाएँगी पार ,
कोई तो -------- ||
दिए जो तुमने पंख उधार , मैं उड़ आई बदरा पार ,
उड़ आई मैं उड़ आई , उड़ आई बदरा पार ||
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