Monday, November 2, 2026

PANKH UDHAAR ( JALAD AA )


                        पंख उधार 


कोई तो दे दे पंख उधार  , मैं उड़ जाऊँ बदरा पार ,

बदरा की डोली में  , मैं हो जाऊँ सवार   ,

कोई तो  ------   || 


गगना में  चमकते चंदा , तारों को मैं देखूँ  ,

उन चंदा - तारों को मैं  , अपनी चूनर में भर लूँ  ,

फिर पहन के उस चूनर को , मैं इठलाती घूमूँ  ,

कोई तो   --------   || 


बदरा के पास ही , मिले बहुत से पंछी ,

दो क्या , दस क्या , बीस पंख तू ले ले  ,

फिर उड़ चल हमरे साथ  , हम खेलेंगे बदरा पार  ,

कोई तो  --------   || 


तुमने पंख दिए जो मुझको  , किया बहुत अहसान  ,

कभी ना भूलूँगी मैं  , ये सुंदर अहसान  ,

जीवन की सुंदर राहें  , फिर हो जाएँगी पार  ,

कोई तो   --------   || 


दिए जो तुमने पंख उधार  , मैं उड़ आई बदरा पार  ,

उड़ आई  मैं उड़ आई  , उड़ आई बदरा पार   ||  


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