प्रेम - पत्र
सारी धरा बन जाए कागज , सागर बने स्याही ,
कलम बनाऊँ पेड़ से , तभी लिख पाऊँ प्रेम - पत्र ||
गगन के तारे , दिल के भाव उतारें , उस पत्र में ,
परिंदों के स्वर , गीत का रूप लें , उस पत्र में ,
जुगनुओं की चमक सज जाए , उस पत्र में ,
तभी तो पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र ||
जीवन प्रकृति से जुड़ा है दोस्तों ,
उसी ने तो ये जीवन दिया है दोस्तों ,
प्रकृति के बचने से ही , जीवन बचेगा दोस्तों ,
दोनों बचेंगे तभी पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र ||
मीठे से शब्द हों , भावों से भरे हों ,
होठों पे मुस्कान हो , आँखों में चमक हो ,
तभी तो प्रकृति भी मुस्कुराएगी ,
उसी से तो पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र ||