Tuesday, July 21, 2026

MANJIL ( KSHANIKAA )

 

                                 मंजिल 

 

जीवन की राह पर कदम बढ़ाने  ,

पर मोड़ जो आते हैं  ,

पहला मोड़ हम पूरा कर लेते हैं  ,

होठों पर मुस्कान लिए  ,

आगे का मोड़ हम , खुद लेते हैं या नहीं  ?

कई बार वह मोड़  , वक्त ही ले आता है  || 

 

ये मोड़ हमें बहुत , कुछ सिखा जाते हैं  ,

कभी - कभी हालात ही  , मोड़ पार करना सिखाते हैं  ,

कई बार मंजिल भी , मोड़ में बदलाव लाती है  ,

अगर मंजिल बदल जाए  , तो मोड़ भी बदलेंगे  ,

इसलिए पहले मंजिल को निर्धारित करो  ,

तभी मोड़ भी उसी  अनुसार होंगे   ,

और सरलता से , तुम्हें मोड़ पार कराएँगे  || 

 

Monday, July 20, 2026

BAANTO ( KSHANIKAA )

 

                               बाँटो 

 

दोष तो सभी में होते दोस्तों  , ध्यान ना देना कभी  ,

ध्यान दोगे तो उसका नहीं  , अपना ही चैन गँवाओगे  ,

वो तो चैन से सोएगा तुम , नींद  अपनी  गँवाओगे  ,

भूल जाओगे दूजों को दोस्तों  , तो नींद में खो जाओगे   || 

 

शांत  करो अपने  मन को  , दिल की नैया को संभालो  ,

शांति को तुम दोस्तों  , अपने दिल में बसा लो  ,

दिल की शांति को , मुस्कान के रूप में  ,

होठों पर  सजा लो दोस्तों   || 

 

अगर तुम चाहो तो दोस्तों  ,

बाँटो मुस्कानें दोस्तों में  ,

ये मुस्कानें ही तो , उनके होठों पे सजेंगी  ,

उसी से तो तुम दोस्तों  , जीवन अपना महकाओगे   ||  

 

Sunday, July 19, 2026

PARCHHAAIN ( JIVAN )

                                     परछाईं  

  

हमारी परछाईं , हरदम  हमारे साथ चलती है  ,

कोई और नहीं हमारे साथ , ना दोस्त , ना घरवाले  ,

मगर परछाईं हमारा , पीछा नहीं छोड़ती है   || 

 

एक दिन हमने परछाईं से , पूछ ही लिया दोस्तों  ,

तुम क्यों हमारे साथ चलती जाती हो  , क्या तुम दोस्त हो  ?

नहीं  !  परछाईं ने कहा   ,

क्या तुम मेरी रिश्तेदार हो  ? मैंने कहा  ,

नहीं  !  परछाईं ने कहा  ,

तो क्यों मेरा पीछा करती हो  ?  मैंने कहा  || 

 

मैं तो तुमसे  ही जुड़ी हूँ , 

बताओ और कौन है   ?

जो तुमसे जुड़ा है  ? तुम्हारे साथ रहता है  ? 

दोस्तों  उसने  सच कहा  ,  कोई नहीं है अपना  ,

परछाईं ही तो अपनी है   || 

 

 

Saturday, July 18, 2026

NAATAK ( KSHANIKAA )

 

                                  नाटक   

 

मन जब शांत होता है  , तो सब कुछ सुंदर लगता है  ,

मन की खुशी  में एक बूँद भी , रिमझिम बरखा लगती है  ,

मन के अशांत होने पर , रिमझिम बरखा भी नहीं सुहाती   || 

 

तुलना किसी से ना करो , हर कोई अलग ही होता है  ,

एक ही पेड़ के फूलों और ,

फलों की महक और स्वाद अलग होता है ,

हाथ की अँगुलियाँ भी अलग होती हैं   || 

 

किसी की नफरत से बंद द्वार को , तुम खोल नहीं सकते ,

उसने अंदर से कुंडी बंद की है , तो तुम भी ,

दूसरी तरफ से कुंडी , बंद कर दो  दोस्तों   || 

 

अकेले रहना पड़े , तो रह लो दोस्तों  ,

मगर ऐसे लोगों का , साथ मत लो  ,

जो अपना होने का  , नाटक करते हों दोस्तों   ||  

 

 

 

Friday, July 17, 2026

BHAAVNAAEN ( KSHANIKAA )

 

                              भावनाएँ 

 

समय बहुत ही कीमती है दोस्तों  , व्यर्थ ना गँवाना , 

 मगर  क्या आप  जानते हैं  ? उससे भी कीमती है कुछ ,

क्या है वह दोस्तों  ? सोचो तो जरा तुम  || 

 

वह हैं दोस्तों हमारी भावनाएँ  ,

समय गुजरता जाता है  , उसे रोक नहीं सकते  ,

मगर क्या हम अपनी , भावनाओं को रोक सकते हैं  ?

नहीं दोस्तों  हम  , कुछ नहीं कर सकते हैं   || 

 

जिस से हमारे  भावों ने जोड़ दिया  , उसे हम भूल नहीं सकते ,

जिससे हमारे भावों ने दूर किया  , उसे हम जोड़ नहीं सकते  ,

 दोस्तों भाव सबसे कीमती हैं  , समय से भी कीमती   || 

 

Thursday, July 16, 2026

PRASHN - PATRA ( KSHANIKAA )

 

                         प्रश्न - पत्र 

 

प्रश्न - पत्र भी है दोस्तों  , हम सब की जिंदगी  ,

जो भी प्रश्न उसमें दिए हैं ,उनका उत्तर लिखना ही है  ,

जो प्रश्न हम हल नहीं कर पाते , उनको भी छोड़ना नहीं है  || 

 

प्रश्न कठिन हों या आसान , दें हमको टेंशन या मुस्कान ,

करने तो वो सब हमको ही हल , नहीं मिलेगी कोई छूट ,

सही तरह से हल करेंगे , तभी तो नंबर मिलेंगे हमको  || 

 

तो तैयारी अच्छे से कर लो दोस्तों  , प्रश्न हल कर लो दोस्तों  ,

तभी तो जीत पाओगे ये जंग , ले पाओगे सुंदर नंबर  ,

चलो तो दोस्तों कोशिश करके  , जीवन की जंग जीतते हैं  || 

 

प्रश्न समझ जाओगे तो ,  हल भी कर पाओगे ,

हल जो हो जाएगा , उत्तर भी लिख पाओगे  ,

उत्तर सही होगा तो , जंग भी जीत जाओगे   || 

 

Wednesday, July 15, 2026

UJAALAA HAI ( AADHYAATMIK )

 

                         उजाला है 

 

रचनाकार ने  कुछ ना  कुछ  , सब के लिए संभाला है  ,

किसी के लिए अँधेरा है थोड़ा , कुछ के लिए उजाला है  ,

रात और दिन उसने सभी के  , जीवन में लिख डाला है  || 

 

सभी के जीवन को उस उजाले में , रंग डाला है  ,

इसी से तो मानव सोचता है , जीवन फूलों की माला है  ,

रचनाकार ने तो सभी के , जीवन को संभाला है   || 

 

दूजा कोई भी इस तरह , जग को नहीं संभालेगा  ,

दूजा कोई भी इस तरह पूरे , जग को नहीं उजालेगा  ,

दूजा कोई भी इस तरह पूरे , मन में नहीं बसा लेगा   || 

 

Tuesday, July 14, 2026

MAHAKAA LO ( PREM )

 

                             महका लो 

 

जिसने जिंदगी को समझा , वही जीवन पा गया  ,

जिसने नहीं समझा  , वह जीवन से दूर हो गया   || 

 

रंगों भरा ये जहां है  ,इसे प्यार  से अपना  लो दोस्तों  ,

फूलों के चमन को , अपनी मेहनत से महका लो दोस्तों  ,

जिसने इस जहां को महका लिया , वही  जीवन पा गया  || 

 

 ये जहां बहुत सुंदर है  , इसे अधिक सुंदर बना लो दोस्तों  ,

प्यार और प्रेम के फूल  ,जीवन में खिला लो दोस्तों  ,

पूरा जीवन ही महक जाएगा  , तुम भी जीवन पाओगे दोस्तों   || 

 

कदमों को दौड़ाओगे , तो आगे पहुँचोगे दोस्तों  ,

दौड़ते कदमों को रोकना नहीं  , आगे ही पहुँचोगे दोस्तों  ,

प्यार की इन्हीं राहों पर दौड़कर , जीवन पा लो दोस्तों   ||  

Monday, July 13, 2026

BHAAI CHARAA ( KSHANIKAA )

 

                            भाईचारा 

 

ईश्वर ने जीव - जंतु बनाए , मानव बनाए  ,

एक धरती बनाई , उसी में समंदर , पहाड़ बनाए ,

मानव ने धरती पर लकीरें खींचीं  ,

धरती के टुकड़े किए , और मालिक बन बैठा  || 

 

मगर संतुष्टि नहीं मिली  , दूसरे के हिस्से  ,

को भी छीन लेना चाहा , प्रहार किए दूजों पर  ,

इसी सब प्रक्रिया का नाम युद्ध है  ,

मानव ने दूजों को मारा  , यही तो   युद्ध है दोस्तों  || 

 

 मगर सभी मानव समान नहीं थे  दोस्तों  ,

दूसरे कुछ मानव प्रेम से रहना चाहते थे  ,

वो मिलजुल कर , दोस्त बनकर ही रहना चाहते थे  ,

इससे शांति हुई और मानव प्रेम - पूर्वक ,

रहने की कोशिश करने लगे  ,

धरती पर भाईचारा बढ़ने लगा  ,

इसी भाईचारे से , दुनिया वाले प्यार फैलाने लगे    || 

 

Sunday, July 12, 2026

DIL AUR DIMAAG ( KSHANIKAA )

 

                       दिल और दिमाग 

 

ईश्वर ने दीं  हमको , दो सुंदर नेमतें , दिल और दिमाग ,

दिल से हमने सबको प्यार दिया , मुस्कानें दीं  ,

प्यार से सजा कर  , सुंदर रिश्ते , सुंदर जहां बनाया  || 

 

दिमाग से कदम आगे बढ़ाए , तर्क शक्ति को बढ़ाया  ,

हर क्षेत्र हमारा अपना था , उसी को सुंदर बनाया  ,

प्रकृति और सुविधाओं से , जीवन आसान बनाया   || 

 

जब दोनों ही मिल गए  , तो जीवन और प्रकृति सुंदर बने ,

तो दोस्तों दिल और , दिमाग  को जगाओ  ,

दुनिया को सुंदर और , सुविधाओं से पूर्ण कर लो  || 

 

UNAKO ( KSHANIKAA )

 

                             उनको 

 

हम चाहते हैं जिनको , प्यार करते हैं जिनको  ,

दोस्ती बढ़ाना चाहते हैं उनसे  ,

सुखी देखना चाहते हैं जिनको  ,

वजह मुस्कान की देना चाहते हैं  उनको   || 

 

हमारी अँजुरी में जो दुआएँ हैं  ,

हमारे दिल में जो दुआएँ हैं  ,

हमारे होठों पर जो मुस्कानें हैं  ,

वो सब उन्हीं के लिए हैं  ,

और हम बाँटना चाहते हैं उनको   || 

 

जीवन की राह में मोड़ जो आते हैं  ,

वो मोड़ सुगम और सरल हो जाएँ  ,

वही मोड़ मिल जाएँ उनको  ,

उनमें तुम सभी में शामिल हैं दोस्तों  || 

 

Friday, July 10, 2026

UMRA - ANUBHAV ( KSHANIKAA )

 

                            उम्र - अनुभव 

 

उम्र है दोस्तों एक नंबर ही तो ,

क्यों गिनो बढ़ती उम्र का नंबर दोस्तों  ,

इस नंबर में छिपा है , जीवन भर का अनुभव  ,

बाँटो इस अनुभव को , आपस में दोस्तों    || 

 

जीवन भर , समेटे तुमने , धीरे - धीरे हाथों में  ,

आज उन्हीं हाथों से बाँट दो , धीरे - धीरे दोस्तों में ,

सभी दोस्त लाभ उठाएँ , उसी अनुभव से दोस्तों   || 

 

उम्र और अनुभव आपस में , जुड़े हैं दोस्तों ,

दोनों ही साथ - साथ , बढ़ते हैं दोस्तों  ,

उम्र तो बढ़ने पर , बाँटी नहीं जा सकती  ,

मगर अनुभव तो , बाँटे जा सकते हैं दोस्तों  ,

तो अनुभवों को दिल  , खोलकर बाँटो दोस्तों   || 

 

Thursday, July 9, 2026

MAHAKIN HAVAAEN ( KSHANIKAA )

 

                              महकीं  हवाएँ 

 

हवा जो चली , चमन से गुजर कर  ,

खुश्बुएँ ले उड़ी , चमन के फूलों से  ,

आस - पास के रहने वालों को , परिंदों को महकाती  || 

 

हम भी उसी हवा से  , महक गए दोस्तों  ,

अगर हवा ना चलती  , तो खुश्बुएँ कैसे उड़तीं  ?

तो दोस्तों बहने दो  , हवाओं को मत रोको उनका रास्ता  || 

 

नए - नए पेड़ लगाओ , जंगलों को मत काटो  ,

तभी तो हवाएँ , चलेंगी सभी ओर  ,

और खुश्बुएँ भी  , उड़ेंगी सभी ओर  ,

महकाएँगी सारा जहां  , ये धरा , ये फलक  ,

सबसे ज्यादा महकाएँगी , हमारा दिल  , हमारा जीवन   ||  

 

Wednesday, July 8, 2026

PURAANE DIN ( KSHANIKAA )

 

                          पुराने दिन 

 

कभी कुछ दिन इतने सुंदर  थे  , प्यारे से दिन  ,

जब कॉलेज में पढ़ते थे , पढ़ाई के दिन  ,

दोस्तों के साथ रहते थे  , शरारतों के दिन  ,

कितना सुंदर समय था  ?  कॉलेज के दिन   || 

 

आज याद करने पर , बहुत याद आते  , 

वो दिन  , पल छिन , दोस्तों के संग खिलखिलाहटें  ,

वो मुस्कुराते हुए दिन  , गुनगुनाते हुए दिन  ,

दौड़ते - भागते हुए बीते हुए दिन   || 

 

राहें भी दौड़ के सामने हुईं छोटी  ,

मुस्कानों ने बढ़ कर जगाए कहकहे  ,

कहकहों से दोस्तों की , महफिल  खिलखिलाई , 

 और सभी के दिलों की धड़कन जगाई    || 

 

दोस्तों आपको भी अपने  , पुराने दिन याद हैं क्या  ?

कभी उन दिनों की याद में  , मुस्काए हो क्या  ?

चलो फिर से एक बार  , याद करो तो जरा   || 

 

Tuesday, July 7, 2026

MAHAKENGII ( KSHANIKAA )

 

                            महकेंगी 

 

मेरे उगाए छोटे - छोटे पौधों पर  , खिले जब सुंदर फूल  ,

फूलों के रंग खिले , मेरी साँसें महकीं ,

तितलियाँ फर - फर उड़ीं , फूल खुश हुए  , 

अपनी साँसें महकने से , मेरे होंठ मुस्काए  || 

 

तितलियों और फूलों  का  ये रिश्ता  ,

आगे ही आगे बढ़ता रहा  ,

फूलों की महक और बढ़ी , और बढ़ी  ,

मेरी साँसें भी महकती , और महकती रहीं   || 

 

तुम भी फूलों के पौधे लगाओ दोस्तों  ,

उन पौधों पर जब , फूल खिलेंगे , महकेंगे  ,

तब तुम्हारी साँसें भी महकेंगी , और होंठ मुस्काएँगे  || 

 

Monday, July 6, 2026

LASSII ( KSHANIKAA )

 

                                  लस्सी 

 

सत्य को सत्य ही रहने दो दोस्तों  ,

झूठ की सीढ़ी ना चढ़ाओ उसको  ,

माना आज मिलावट का जमाना है  ,

मगर तुम सच - झूठ की ,लस्सी ना बनाओ दोस्तों  ||  

 

आशा और भरोसे की  , लस्सी जो बनाओगे दोस्तों  ,

ऐसी स्वाद लस्सी को , सबको जो पिलाओगे  ,

तो प्यार और मुस्कानें , जग में फैलाओगे   || 

 

अच्छे बोल ना बोल सको दोस्तों  ,

तो बुरे शब्द भी ना बोलो दोस्तों   ,

मौन रहकर मुस्कान की , लस्सी पिला दो दोस्तों   || 

 

जिंदगी की राहें तो , बार - बार मुड़ती हैं  ,

हर मोड़ एक नया , अनुभव दे जाता है  ,

उन अनुभवों को  , महसूस तो करो  ,

मगर उनकी लस्सी , ना बनाओ दोस्तों   || 

 

Sunday, July 5, 2026

MAUN ( PREM )

 

                         मौन 

 

शब्द ऐसे बोलो दोस्तों  , जो मौन से भी सुंदर हो  ,

होठों पर सुंदर सी  , मीठी सी मुस्कान  ,

उन्हीं से लो दोस्तों  , बोलों  का काम   || 

 

मौन है दिल की भाषा  , जिसे  दिल  समझता है  ,

जवाब  भी देता है  , दूजे के दिल को समझाता है  ,

और दोनों के दिल खुश हो जाते हैं   || 

 

 मौन है आँखों की भाषा  ,

यही आँखों में चमक लाता है  ,

आँखों ही आँखों में  , सब कुछ कह जाता है  ,

जीवन को सुंदर और  , संगीतमय बन जाता है   || 

 

मौन को प्यार से , अपना लो दोस्तों ,

मौन को प्यार में , डुबा लो दोस्तों  ,

तो मौन संसार की , सबसे सुंदर  ,

भाषा बन जाएगा  , और जग में प्यार बरसाएगा   ||  

 

 

Saturday, July 4, 2026

JHILMILATAA ( CHANDRAMAA )

 

                           झिलमिलाता 

 

जिंदगी भर नहीं भूलेगी , वो तारों से भरी रात  ,

किसी अनजाने से , अचानक ही , मुलाकात की रात   || 

 

हाय वो धरा का तारों से  , झिलमिलाता  आँचल  ,

धरा के रूप को देखा , तो चाँद भी हुआ पागल  ,

उसने भेजी अपनी चंदनिया  , बनी सौगात की रात  || 

 

चंदनिया ने लपेटा धरा को , जब अपनी बाँहों में  ,

धरा भी तो सिमट गई , सुंदर सी पनाहों में  ,

यही तो बन गई दोनों के , मिलन की रात   || 

 

देख कर जग ये , रूप  धरती का  ,

मुस्कानें सज गईं , सभी के चेहरे पर  ,

खिलखिला उठी जोरों से , अनोखी सी ये रात    || 

 

Friday, July 3, 2026

CHAMCHAMAYAA ( GEET )

 

                          चमचमाया 

 

नफरतों के काँटे , क्यों उगाए तुमने  ?

हमने तो प्रीत का , कमल खिलाया है  ,

गगना में रवि , भोर में उदित हुआ , 

रात में चंद्रमा  , चमचमाया है    || 

 

दुश्मनी कभी , किसी से ना करना  ,

दोस्ती ने मुस्कान , को जगाया है  ,

जिंदगी की राहों में , हर कदम पर  ,

दोस्तों  ने ही  , फूलों को बिछाया है   || 

 

नदियों का पानी , शीतल और मीठा है  ,

सागर ने ही , उसे खारा   बनाया है  ,

 तुम नदी के पानी , की तरह रहो दोस्तों  ,

सागर ने तुम्हें , मिलने बुलाया है   || 

 

गगना में बदरा छाए , तो बरखा बरसी , 

बरखा ने रिमझिम  , का गीत गाया है  ,

गगना ने उस  , रिमझिम में भी  ,

इंद्रधनुष अपने  , अँगना में सजाया है   || 

 

Thursday, July 2, 2026

ANTAR SEY ( JALAD AA )

 

                          अंतर से 

 

छाए जो बदरा गगना में ,मोर की आवाज गूँजी धरा पे ,

नाचे जो मोर धरा पे  , मानव ह्रदय मुस्काया  , 

खिलखिला उठा  मेरा ह्रदय  , ये आवाज अंतर से आई  || 

 

चमकी दामिनी उसने , बदरा को भी चमकाया  ,

उसकी कड़कड़ाहट ने , धरा का दिल दहलाया  ,

मगर दामिनी ने पूरा  , जग ही चमकाया   || 

 

बदरा से जो बूँदें बरसीं  , रिमझिम की फुहार में  ,

उसी रिमझिम  में तन और ,मन हमारा भीग गया  ,

और साथ ही रिमझिम में , तन - मन झूल गया   || 

  

Wednesday, July 1, 2026

PREM - PATRA ( PREM )

 

                            प्रेम - पत्र 

 

सारी धरा बन जाए कागज  , सागर बने स्याही  ,

कलम बनाऊँ पेड़ से , तभी लिख पाऊँ प्रेम - पत्र  || 

 

गगन के तारे , दिल के भाव उतारें , उस पत्र में  ,

परिंदों के स्वर , गीत का रूप लें , उस पत्र में  ,

जुगनुओं की चमक सज जाए , उस पत्र में  ,

तभी तो पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र   || 

 

जीवन प्रकृति से जुड़ा है दोस्तों  ,

उसी ने तो ये जीवन दिया है दोस्तों  ,

प्रकृति के बचने से ही , जीवन बचेगा दोस्तों  ,

दोनों बचेंगे तभी पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र   || 

 

मीठे से शब्द हों  , भावों से भरे हों  ,

होठों पे मुस्कान हो , आँखों में चमक हो  ,

तभी तो प्रकृति भी मुस्कुराएगी  ,

उसी से तो पूरा होगा  , मेरा प्रेम  -  पत्र   ||