अंतर से
छाए जो बदरा गगना में ,मोर की आवाज गूँजी धरा पे ,
नाचे जो मोर धरा पे , मानव ह्रदय मुस्काया ,
खिलखिला उठा मेरा ह्रदय , ये आवाज अंतर से आई ||
चमकी दामिनी उसने , बदरा को भी चमकाया ,
उसकी कड़कड़ाहट ने , धरा का दिल दहलाया ,
मगर दामिनी ने पूरा , जग ही चमकाया ||
बदरा से जो बूँदें बरसीं , रिमझिम की फुहार में ,
उसी रिमझिम में तन और ,मन हमारा भीग गया ,
और साथ ही रिमझिम में , तन - मन झूल गया ||
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