Thursday, July 2, 2026

ANTAR SEY ( JALAD AA )

 

                          अंतर से 

 

छाए जो बदरा गगना में ,मोर की आवाज गूँजी धरा पे ,

नाचे जो मोर धरा पे  , मानव ह्रदय मुस्काया  , 

खिलखिला उठा  मेरा ह्रदय  , ये आवाज अंतर से आई  || 

 

चमकी दामिनी उसने , बदरा को भी चमकाया  ,

उसकी कड़कड़ाहट ने , धरा का दिल दहलाया  ,

मगर दामिनी ने पूरा  , जग ही चमकाया   || 

 

बदरा से जो बूँदें बरसीं  , रिमझिम की फुहार में  ,

उसी रिमझिम  में तन और ,मन हमारा भीग गया  ,

और साथ ही रिमझिम में , तन - मन झूल गया   || 

  

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