शायद
भीड़ में लोग तो मिलते हैं , मगर क्या अपने हैं वो ?
सभी आपसी बातों में लगे रहते हैं , शोर का हिस्सा हैं ,
वो सब बातें , क्या तुम समझ पाते हो ??
क्या तुम्हें उनकी बातों में , अपनापन महसूस होता है ?
नहीं ना ! तो फिर वो तुम्हारे अपने नहीं हैं ,
आपसी बातों में वक्त बिताकर , सब वापिस जाते हैं ||
अरे , दोस्तों देखो , दो लोग रुके हैं , शायद वो अपने हैं ,
उनकी मुस्कान , उनका व्यवहार तो सुंदर है ,
शायद वही तुम्हारे अपने हैं ,
और उन्हें तुम्हारी फिक्र है ||
आओ - आओ , दोस्ती करते हैं उनसे ,
मुस्कानें बाँटते हैं उनसे , आओ नए दोस्त हैं तुम्हारे ,
मुस्कुराओ , खिलखिलाओ हमारे साथ ||
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