Tuesday, July 7, 2026

MAHAKENGII ( KSHANIKAA )

 

                            महकेंगी 

 

मेरे उगाए छोटे - छोटे पौधों पर  , खिले जब सुंदर फूल  ,

फूलों के रंग खिले , मेरी साँसें महकीं ,

तितलियाँ फर - फर उड़ीं , फूल खुश हुए  , 

अपनी साँसें महकने से , मेरे होंठ मुस्काए  || 

 

तितलियों और फूलों  का  ये रिश्ता  ,

आगे ही आगे बढ़ता रहा  ,

फूलों की महक और बढ़ी , और बढ़ी  ,

मेरी साँसें भी महकती , और महकती रहीं   || 

 

तुम भी फूलों के पौधे लगाओ दोस्तों  ,

उन पौधों पर जब , फूल खिलेंगे , महकेंगे  ,

तब तुम्हारी साँसें भी महकेंगी , और होंठ मुस्काएँगे  || 

 

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