झिलमिलाता
जिंदगी भर नहीं भूलेगी , वो तारों से भरी रात ,
किसी अनजाने से , अचानक ही , मुलाकात की रात ||
हाय वो धरा का तारों से , झिलमिलाता आँचल ,
धरा के रूप को देखा , तो चाँद भी हुआ पागल ,
उसने भेजी अपनी चंदनिया , बनी सौगात की रात ||
चंदनिया ने लपेटा धरा को , जब अपनी बाँहों में ,
धरा भी तो सिमट गई , सुंदर सी पनाहों में ,
यही तो बन गई दोनों के , मिलन की रात ||
देख कर जग ये , रूप धरती का ,
मुस्कानें सज गईं , सभी के चेहरे पर ,
खिलखिला उठी जोरों से , अनोखी सी ये रात ||
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