Saturday, July 4, 2026

JHILMILATAA ( CHANDRAMAA )

 

                           झिलमिलाता 

 

जिंदगी भर नहीं भूलेगी , वो तारों से भरी रात  ,

किसी अनजाने से , अचानक ही , मुलाकात की रात   || 

 

हाय वो धरा का तारों से  , झिलमिलाता  आँचल  ,

धरा के रूप को देखा , तो चाँद भी हुआ पागल  ,

उसने भेजी अपनी चंदनिया  , बनी सौगात की रात  || 

 

चंदनिया ने लपेटा धरा को , जब अपनी बाँहों में  ,

धरा भी तो सिमट गई , सुंदर सी पनाहों में  ,

यही तो बन गई दोनों के , मिलन की रात   || 

 

देख कर जग ये , रूप  धरती का  ,

मुस्कानें सज गईं , सभी के चेहरे पर  ,

खिलखिला उठी जोरों से , अनोखी सी ये रात    || 

 

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