Wednesday, July 15, 2026

UJAALAA HAI ( AADHYAATMIK )

 

                         उजाला है 

 

रचनाकार ने  कुछ ना  कुछ  , सब के लिए संभाला है  ,

किसी के लिए अँधेरा है थोड़ा , कुछ के लिए उजाला है  ,

रात और दिन उसने सभी के  , जीवन में लिख डाला है  || 

 

सभी के जीवन को उस उजाले में , रंग डाला है  ,

इसी से तो मानव सोचता है , जीवन फूलों की माला है  ,

रचनाकार ने तो सभी के , जीवन को संभाला है   || 

 

दूजा कोई भी इस तरह , जग को नहीं संभालेगा  ,

दूजा कोई भी इस तरह पूरे , जग को नहीं उजालेगा  ,

दूजा कोई भी इस तरह पूरे , मन में नहीं बसा लेगा   || 

 

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