उजाला है
रचनाकार ने कुछ ना कुछ , सब के लिए संभाला है ,
किसी के लिए अँधेरा है थोड़ा , कुछ के लिए उजाला है ,
रात और दिन उसने सभी के , जीवन में लिख डाला है ||
सभी के जीवन को उस उजाले में , रंग डाला है ,
इसी से तो मानव सोचता है , जीवन फूलों की माला है ,
रचनाकार ने तो सभी के , जीवन को संभाला है ||
दूजा कोई भी इस तरह , जग को नहीं संभालेगा ,
दूजा कोई भी इस तरह पूरे , जग को नहीं उजालेगा ,
दूजा कोई भी इस तरह पूरे , मन में नहीं बसा लेगा ||
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