Sunday, August 23, 2026

KEEMAT ( KSHANIKAA )


                           कीमत  


मुस्कानों ने पुकारा है , दोस्तों मुस्काओ  ,

आओ दोस्तों  , महफिल में तुम आओ  ,

ये जीवन जो मिला हमको  , मुस्का  कर बिता जाओ  ,

जिंदगी के हर पल में  , दोस्तों खिलखिलाओ   || 


रचेता साथ है सबके , उसका साथ सब पाओ  ,

उसको जब साथ में पाओ  , आशीष उसका पाओ  || 

तब तुम भी उसके  , भरोसे - मंद बन जाओ   || 


कीमत तुम समझो , मुस्कानों की दोस्तों  ,

कीमत तुम समझो  , जीवन की दोस्तों  ,

कीमत तुम समझो  , वक्त की दोस्तों  ,

कीमत तुम समझो , अपनी भी दोस्तों  ,

ना कुछ भी व्यर्थ गँवाओ  दोस्तों  ,

ना कुछ भी व्यर्थ गँवाओ   || 









DOSH ( JIVAN )

 

                                दोष 

 

किसी भी विपत्ति में फँसने पर , हर कोई  ,

पितृ दोष ,गृह दोष , वास्तु दोष , शनि दोष को ,

सारा दोष दे देता है दोस्तों  ,

मगर वह कहीं  भी  , अपना दोष नहीं देखता दोस्तों   || 

 

जरा आँखें बंद करके , अंतर्मन को देखो दोस्तों ,

थोड़ा विचार करो दोस्तों ,तो जान जाओगे ,

दोष तो तुम्हारा ही है दोस्तों    || 

 

उस दोष को समझो दोस्तों , और उस दोष को ,

दूर करने का प्रयास करो दोस्तों  ,कोशिश करोगे ,

तो अपने दोष को , दूर कर लोगे दोस्तों   || 

 

कोशिश करने वालों की , हार  नहीं होती ,

जीत हो ना हो ,मगर विपत्ति दूर करने का ,

कुछ तो हल निकलेगा , और आप ,

उस विपत्ति से बाहर , निकल ही जाओगे  दोस्तों  ||  

 

Friday, August 21, 2026

SAMAY KO SAMAY SE ( JIVAN )

 

                           समय को समय से 

 

समय ने शोर मचाया , कहा , तुम सभी कर्म करो  ,

व्यर्थ ना गँवाओ मुझे , फुर्सत के नाम पर  ,

धीरे - धीरे तुम जीवन ही  , व्यर्थ गँवा दोगे दोस्तों   ?? 

 

यदि नहीं समझे दोस्तों  , तो पूरी  कोशिश करो  ,

अगर समझ जाओगे , तभी तो सोचकर समय खर्च करोगे  ,

समय जाने के बाद कभी , लौट कर नहीं आता दोस्तों  ,

इसलिए समय को , समेट  कर रखो दोस्तों  || 

 

समेटने का अर्थ मुट्ठी में , पकड़ना नहीं है  ,

मुट्ठी से तो वह ,  रेत की तरह फिसल जाएगा  ,

समय को समय से  , खर्च करो दोस्तों   ||  

 

Thursday, August 20, 2026

FURSAT ( JIVAN )

 

                               फुर्सत 


कुछ खास पल तो , जीवन से चुरा लो दोस्तों  ,

क्या पता आगे समय , ना मिले दोस्तों  ,

जिम्मेदारियाँ जरा सी भी , फुर्सत जो नहीं देतीं   || 


कुछ खास रिश्तों को , निभा लो दोस्तों  ,

उन्हें समय देकर कुछ और , मजबूत बना लो दोस्तों  ,

जिम्मेदारियाँ जरा सी भी  , फुर्सत जो नहीं देतीं   || 


अपने देखे सपनों को  ,पूरा करने की कुछ  ,

और कोशिश तो कर लो दोस्तों  ,

अधिक कोशिशें शायद , कुछ को पूरा कर दें दोस्तों   ,

जिम्मेदारियाँ जरा सी भी , फुर्सत जो नहीं देतीं   || 





 





Tuesday, August 18, 2026

AAJ ( JIVAN )

 

                        आज 


मत सोचो , कल क्या हुआ  ? वह बीत गया , 

मत सोचो , कल क्या होगा  ? वह अनजाना है ,

जो आज है , उसे बिता लो  , मुस्काना है  || 


दोस्तों के संग बिता लो  , आज का दिन  ,

गप्पें खूब लड़ा लो  , आज के दिन  ,

समय खूब तुम्हारे पास  , आज के दिन ,

कल क्या पता , तुम या दोस्त  , व्यस्त हो  ?

फिर कैसे ला पाओगे तुम  , आज का दिन  ?? 


दिल की बातें कह डालो  , आज के दिन  ,

खुशी और गम सभी कुछ , बाँट लो  , आज  के दिन ,

फिर कैसे ला पाओगे  तुम ,  आज का दिन   ??  






NAMAN - NAMAN ( DESH )


                           नमन - नमन 


सीमा पर जब संकट आया , वीरों ने दूर भगाया  ,

अपनी भारत माता को - संकट से मुक्त कराया ,

अपना तिरंगा  जग में , ऊँचाई पर लहराया   ,

अपनी भारत माता को  -------  || 


अपने वीरों का शौर्य ,  जग में सबसे ऊँचा है  ,

सारे जग में ही उनकी , वीरता का चर्चा है  ,

वीरों ने अपना तिरंगा , गगना में लहराया  ,

अपनी भारत माता को  --------  || 


वीरों ने ही देश की खातिर , अपने प्राण गँवाए  ,

अपनी नींदे कर बलिदान , चैन से सबको सुलाए  ,

अपना तिरंगा हो ना नीचा , सिर चाहे कट जाए  ,

अपनी भारत माता को -------   || 


हम तो तुमको प्यार हैं करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

नमन  , नमन हम करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

अपने तिरंगे को मिल के , गगना में लहराया  , 

अपनी भारत माता को --------   || 



Monday, August 17, 2026

CHAAI - PAKAUDEY ( JIVAN )


                                   चाय - पकौड़े 


साँझ हुई सूरज गया  , अपने घर दोस्तों  ,

बदरा छाए , गगना भी , छिप गया दोस्तों ,

मौसम थोड़ा - थोड़ा शीतल , हो चला दोस्तों ,

ऐसे में एक - एक कप चाय ,हो जाए  दोस्तों  || 


पवन संग बदरा धीरे - धीरे , झूल रहे दोस्तों ,

बदरा झूलते - झूलते थोड़ी सी बूँदें , आ रहीं दोस्तों  ,

ऐसे में एक - एक कप चाय , हो जाए दोस्तों   || 


सूरज का अपना समय ,बदरा का अपना समय ,

बरखा भी अपने समय से , रिमझिम  आती दोस्तों  ,

कभी - कभी दामिनी भी  , आती है  दोस्तों ,

चाय के साथ - साथ , पकौड़े ,भी हो जाएँ  दोस्तों  || 




 




 

Sunday, August 16, 2026

KHILIIN ( JIVAN )


                                    खिलीं 


मेरे कर्मों ने पूछा मुझसे  , " क्यों हमें किया तुमने  ?

हमने तो मुस्कानें बाँटीं , दूजों के होठों पर  ,

हमने तो है जोत  जलाई , जरूरत के आँगन में  ,

तुमने ही तो हाथ दिए , हम सबको ये करने में   || 

 

" बुद्धि तुम्हारी , हाथ तुम्हारे , किया है तुमने हमें ,

ईश्वर भी तो हुआ है खुश , हमको यूँ करने में ,

हम  हैं कर्म  तुम्हारे सखि ,जो रहते थे पहले दिल में  ,

वहाँ से निकल , तुमने हमें किया , हम भी हुए सुंदर  || "


कर्मों की बातें सुनकर   , मेरे होठों पर मुस्कान खिली ,

 मेरी मुस्कान देखकर दोस्त , दूजों की मुस्कान खिलीं ,

आज हुआ है दिल खुश सबका , सबकी जो मुस्कान खिलीं   || 


Saturday, August 15, 2026

NEEYAT ( JIVAN )

 

                              नीयत 


जिंदगी में मिलने वाले सभी लोग ,

दोस्त नहीं होते दोस्तों ,

भरोसा ना करो , सभी मिलने  वालों पर , 

दोस्तों पर तो भरोसा ,किया जा सकता है , 

मगर सब पर नहीं  || 


सभी मिलने वाले लोग , दुश्मन भी नहीं होते  , 

तो सभी पर अविश्वास ,नहीं किया जा सकता  ,

उनमें से कुछ पर , अविश्वास करना ठीक है  ,

मगर सब पर नहीं  || 


दोस्तों सब की नीयत पहचानना सीखो ,

कौन विश्वास के काबिल है   ?

और  कौन अविश्वास के काबिल   है ?

यह योग्यता तो आपको स्वयं ही  ,

अपने अंदर जगानी होगी दोस्तों  ,

तभी आप उनकी नीयत पहचान पाओगे  दोस्तों   || 







सभी 










  


NAMAN - NAMAN ( DESH )

  नमन - नमन 


सीमा पर जब संकट आया , वीरों ने दूर भगाया  ,

अपनी भारत माता को - संकट से मुक्त कराया ,

अपना तिरंगा  जग में , ऊँचाई पर लहराया   ,

अपनी भारत माता को  -------  || 


अपने वीरों का शौर्य ,  जग में सबसे ऊँचा है  ,

सारे जग में ही उनकी , वीरता का चर्चा है  ,

वीरों ने अपना तिरंगा , गगना में लहराया  ,

अपनी भारत माता को  --------  || 


वीरों ने ही देश की खातिर , अपने प्राण गँवाए  ,

अपनी नींदे कर बलिदान , चैन से सबको सुलाए  ,

अपना तिरंगा हो ना नीचा , सिर चाहे कट जाए  ,

अपनी भारत माता को -------   || 


हम तो तुमको प्यार हैं करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

नमन  , नमन हम करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

अपने तिरंगे को मिल के , गगना में लहराया  , 

अपनी भारत माता को --------   || 



Friday, August 14, 2026

DHAN - JIVAN ( JIVAN )


                               धन - जीवन 


आज मानव - जीवन में , धन का ही मोल है ,

धन के पीछे मानव , भाग रहा है दोस्तों  ,

धन ही उसके जीवन का , लक्ष्य बन गया है दोस्तों   || 


धन के लिए ही वह , दूजों को दुःख देता है  ,

धन प्राप्त करके , स्वयं को उच्च समझता है  ,

और वह दूजों को  , नीचा समझता है   || 


धन - धन करता मानव , मार्ग भटक गया है  ,

अपने  कर्म और सोच को , मजबूत बनाकर ,

जीवन को सुंदर और ,स्वस्थ बनालो दोस्तों   || 


धन जरूरी है , जीवन यापन के लिए  ,

मगर धन ही सब ,कुछ नहीं है दोस्तों  ,

एक रास्ता है धन  , जरूरतें पूरी करने के लिए है दोस्तों   || 


Thursday, August 13, 2026

JUDAAV ( KSHNIKAA )



                                          जुड़ाव 


जैसे माँ भी जन्म लेती है , जब बच्चा जन्म लेता है  ,

वैसे समस्या के साथ ही , समाधान भी जन्म लेता है ,

तो ढूँढो समाधान  को दोस्तों  || 


हर समस्या के साथ ही , समाधान जुड़ा होता है  ,

समस्या की गहराई में डूब कर , समाधान पा लो  ,

वह गहराई ही , समाधान दिलाएगी  दोस्तों  || 


समंदर से उड़ती वाष्प से , बादल का जन्म होता है  ,

बादल से बरसी बरखा से , समंदर लहराता है  ,

दोनों का जीवन , एक - दूजे से जुड़ा है दोस्तों   || 


आपस में जुड़े , कई  रिश्ते हैं दोस्तों  ,

जैसे नींद से , सपनों का जुड़ाव है दोस्तों  ,

सपने पूरे होने पर , मुस्कान का ,

प्यार के साथ  भी , मुस्कान का जुड़ाव है दोस्तों   || 


Wednesday, August 12, 2026

PREM KAHAANII ( PREM )

 

                   प्रेम कहानी  


ये अपनी प्रेम कहानी , जैसे नदिया में बहता पानी ,

ये कहानी किसी ने ना जानी , और ना ही हमने बतानी  || 


कोई क्या करेगा , ये सब जान कर  ?

कोई क्या करेगा , हमारी मुस्कान देखकर  ?

हम ही तो खुश होंगे , अपने ही दिल में  ,

चैन ही मिलेगा  , हमको अपने दिल में   || 


ये अपनी प्रेम कहानी , सिर्फ दिल में छुपानी  ,

खिलती कलियाँ भी हमने , सिर्फ दिल में छुपानी  ,

किसी को ना बतानी , ये बातें हैं रूहानी  ,

ये अपनी प्रेम कहानी , ये अपनी प्रेम कहानी   || 

 

Monday, August 10, 2026

KHOLII ( AADHYAATMIK )


                       खोली 


दुनिया रंग - रंगीली  भोले , दुनिया रंग - रंगीली ,

एक तेरी मीठी है बोली , दुनिया की कड़वी बोली ,

एक तू ही भरता है झोली  , दुनिया तो लूटे झोली   || 


पर तू तो है कैलाशी , ना उतरे तू धरती पर  ,

आजा कभी तो आजा नीचे , हम भी सुनें तेरी बोली   || 


दर्शन तुम्हारे होंगे तो  , जीवन सफल ये होगा  ,

सुंदरतम बन जाएगा जो ,सुन लें तेरी बोली   || 


जीवन को सुंदर बना दो , ऐ - कैलाश के वासी ,

आ जाओ तुम घर हमारे , भर दो हमारी खोली   || 


Saturday, August 8, 2026

DAREECHEY MEIN ( PREM )


                           दरीचे में 


दिल के दरीचे में , जो हमने तस्वीर है लगाई  ,

उसी ने हमारी , रातों की नींद है उड़ाई ,

वो तस्वीर तो हमें , बहुत प्यारी है  ,

उसी ने तो नींद से , हमारी दुश्मनी बनाई   || 


उस तस्वीर को हम , सभी को नहीं दिखा सकते ,

उसे तो हम , बेनकाब कर नहीं सकते  ,

उस तस्वीर में हम , प्यार के रंग तो भर सकते ,

मगर उसे हम , दिल से मिटा नहीं सकते   || 


वह तस्वीर तो हमारी जिंदगी है ,

वह तस्वीर तो हमारी बंदगी है  ,

वही तो हमारा सच्चा प्यार है ,

उसी के प्यार में तो हमारा ,

दिल बेकरार है , दिल  बेकरार है   || 


Friday, August 7, 2026

JAGMAGAA UTHEGAA ( JIVAN )


                जगमगा उठेगा 


बोल दोस्त ,मीठे - मीठे  बोल , मन मोहें सबका  ,

प्यार भर ले जीवन में , मुस्कान सबकी जगा  ,

बयार के समान रख , गति धीमी और शीतलता ,

खुद भी बयार के , समान ही बन जाना  || 


तेज गति ले के , आँधी ना बन जाना  ,

जो अपने साथ , विध्वंस लाती है  ,

बयार का हाथ पकड़ , धीरे कदम बढ़ाना  ,

पहुँच के अपनी मंजिल , मुस्कानें फैलाना  || 


मीठे बोल , धीमी बयार , मुस्कानें शीतलता ,

ये सब गुण जगा ले , अपना मन जगा ले ,

प्यार में ये गुण तुझे , पहुँचाएँगे मंजिल तक ,

जीवन जगमगा उठेगा तेरा , जगमगा उठेगा   || 

Thursday, August 6, 2026

DHARAA MUSKAAI ( GEET )

 

                            धरा मुस्काई 


पेड़ों से छनकर , धरा पे धूप जब आई , धरा मुस्काई ,

शीतल सी बयार , कोंपलों से टकराई ,धरा मुस्काई ,

बद्र की रिमझिम बूँदें , धरा से टकराई ,धरा मुस्काई || 


परिंदो की मीठी तान , जग में छाई , धरा मुस्काई  ,

उछलती नदिया की ,छल-छलाहट आई,धरा मुस्काई ,

सागर की लहरों की उछाल , जब आई ,धरा मुस्काई  || 


फूलों की रंगत पर, जब तितलियाँ आईं ,धरा मुस्काई ,

फूलों की महक से ,जब महकी अँगनाई ,धरा मुस्काई ,

साँझ की लालिमा ,जब गगन पे छाई , धरा मुस्काई  || 


रात का अँधियारा छाया ,गगना से चाँदनी उतर आई ,धरा मुस्काई ,

धीरे -धीरे तारों की बारात जगमगाई , धरा मुस्काई ,

सभी कुछ देख जग में ,धरा मुस्काई ,

धरा मुस्काई ,हाँ जी ,धरा मुस्काई  || 




Wednesday, August 5, 2026

RAAT KAA SAMAA ( CHANDRMAA )


                          रात  का समां 


रात का अँधियारा  छाया , धरा और गगना में ,

धरा ने दी आवाज , जो पहुँची गगना तक  ,

चाँद ने सुनी , वह गगना में चमका ,

तारे भी दौड़े - दौड़े आए , चाँद के साथ दोस्तों   || 


धरा मुस्काई उन्हें देखकर  ,

चाँदनी की ओढ़नी , धरा ने ओढ़ी ,

  सारा  जग चमचमा उठा , चाँदनी की चमक से  ,

अँधियारा दूर हुआ , चाँदनी की चमक से दोस्तों  || 


जगवासी रात के अँधियारे में , ये चमक देख मुस्काए ,

उन  सभी की आँखों में , उतर आई एक चमक ,

दिल सभी के गुनगुना उठे , साथ मिलकर  ,

ये ही रात का प्यारा समां है दोस्तों   || 

Tuesday, August 4, 2026

TELIPATHII ( PREM )


                               टेलीपैथी 


दिल ले करीब जो होते हैं  , वही सच्चे दोस्त होते हैं  ,

जो हम को समझते हैं , हम जिनको समझते हैं ,

आपस में हम मुस्कानें बाँटते हैं  || 


रहें पास या दूर , मगर यादों में बसते हैं  ,

कभी भूले नहीं जाते , दिल में समाए रहते हैं  ,

उदासियों में वही दोस्त , तो साथ देते हैं  || 


नहीं जरूरत होती फोन , या मैसेज की दोस्तों  ,

दिल से निकलने वाली , तरंगों से ही काम लेते हैं  ,

उसी को तो दोस्त  , टेलीपैथी कहते हैं  || 

Monday, August 3, 2026

BADARIYAA ( JALAD AA )


                           बदरिया 

संदेसा बदरिया का आया  , सखि आ रही हूँ मैं  ,
दौड़कर आई बाहर मैं  , 
बदरिया मुस्कुरा दी खूब , बोली -- वाह ,
तुझसे मिलने की , मुझे बहुत थी चाह   || 

दोनों हाथ थाम , मेरे आँगन में जा बैठे ,
बतियाते रहे घंटों , वहीं  बैठे - बैठे  , 
ना सुध थी  किसी को , क्या काम है बाकि  ?
बीता पूरा पहर , वहीं बैठे - बैठे  || 

तभी दामिनी चमकती आई , मेरे आँगन में ,
उसकी कड़क सुन , हम हिल गए बैठे - बैठे ,
मुझे भूल कर , बतिया रही हो दोनों  ,
यह सुन कर तो हम , हँस दिए बैठे - बैठे   || 

Sunday, August 2, 2026

MAHSOOS ( PREM )


                               महसूस 


एक सखि थी हमारी , उम्र में हमसे काफी छोटी थी  ,

मगर दिल के बहुत करीब थी ,उम्र रुकावट नहीं थी  || 


जब भी वो दोस्त आती , तो रात को हम दोनों  ,

छत पर तारों की छाँव में बैठते , मुस्कुराते थे  ,

मैंने फूलों के पौधे लगाए थे , हम फूलों की महक लेते थे ,

घंटों बातें करते थे ,और खिलखिलाते थे   || 


हम दोनों में प्यार का , रिश्ता इतना गहरा था ,

कि हम स्वयं को , एक -दूजे के बहुत करीब समझते थे ,

आज भी वो तारों की , छाँव याद आती है , 

आज  भी  वो फूलों की महक , महसूस होती है  ,

आज मेरी वह सखि , इस दुनिया में नहीं है  ,

ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दें  || 

 


MADHUR PYAAR ( RATNAAKAR )

 

                              मधुर  प्यार 

 

जब भी दोस्तों ने पुकारा  , हम चले आए  ,

आज तो रत्नाकर ने दी आवाज  , लो हम चले आए   || 

 

लहरें उछल - उछल कर  , मचल - मचल कर ,

हमारे पास में आईं , हाथ थाम कर  ,

वो ले चलीं , रत्नाकर के द्वार  || 

 

हम भी हँस  दिए , उनकी चपलता पर  ,

और चल दिए , रत्नाकर के द्वार  ,

आज खुल गया था  , रत्नाकर का द्वार  ,

हमने कदम रखा अंदर  , देखा उसका घर - द्वार  || 

 

बसी थी पूरी , नई दुनिया अंदर  ,

जो थी अनदेखी , अनजान मगर सुंदर  ,

नन्हीं मछलियाँ , हमारे इर्द - गिर्द घूम कर  ,

दिखा रहीं थीं  , अपना सुंदर व्यवहार   || 

 

लहरों और मछलियों की चपलता देखकर  ,

हम तो भूल गए अपना संसार  ,

डूब  गए  हम उस  अनोखी दुनिया में  ,

पाकर उन सबका प्यार  , मधुर प्यार   || 

 

Saturday, August 1, 2026

SARHADEN ( DESH )

 

                                 सरहदें 

 

लकीरें रचेता ने सिर्फ , हाथों में बनाईं  ,

एक हाथ में किस्मत की  , दूसरे में अपने कर्म की  ,

मानव ने लकीरें घरों में खींचीं  , ये तेरा घर ,  ये मेरा  घर  ,

घरों के बाद ये लकीरें , देशों की सरहदें बना दी गईं  || 

 

देशों में रहने वाले पहले  , दोस्त हुआ करते थे , 

मगर अब सरहदों के पार , रहने वाले दुश्मन हो गए ,

दोस्तों इन लकीरों को , अपने दिलों पर ना बनाना  ,

नहीं तो दिल भी दुश्मनी में ,डूबकर दूर हो जाएँगे   || 

 

सरहदों के पार रहकर भी , मुस्कान तुम देना  ,

दोस्त ना बना पाओ ,कोई बात नहीं  ,

उन्हें दुश्मन ना बनाना ,

फूलों की खुश्बु  , जैसा हवाओं के साथ ही  ,

दूर से तुम मुस्कुरा कर  , मुस्कानें बिखराओ  ,

बदले में तुम भी मुस्कानें पाओगे   ||