Sunday, August 16, 2026

KHILIIN ( JIVAN )


                                    खिलीं 


मेरे कर्मों ने पूछा मुझसे  , " क्यों हमें किया तुमने  ?

हमने तो मुस्कानें बाँटीं , दूजों के होठों पर  ,

हमने तो है जोत  जलाई , जरूरत के आँगन में  ,

तुमने ही तो हाथ दिए , हम सबको ये करने में   || 

 

" बुद्धि तुम्हारी , हाथ तुम्हारे , किया है तुमने हमें ,

ईश्वर भी तो हुआ है खुश , हमको यूँ करने में ,

हम  हैं कर्म  तुम्हारे सखि ,जो रहते थे पहले दिल में  ,

वहाँ से निकल , तुमने हमें किया , हम भी हुए सुंदर  || "


कर्मों की बातें सुनकर   , मेरे होठों पर मुस्कान खिली ,

 मेरी मुस्कान देखकर दोस्त , दूजों की मुस्कान खिलीं ,

आज हुआ है दिल खुश सबका , सबकी जो मुस्कान खिलीं   || 


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