Tuesday, September 22, 2026

DHARAA - GAGAN ( JIVAN )


                       धरा - गगन 


किया बिछौना धरती को , हमने ओढ़ा आसमान  ,

दोनों ने ही दिया हमको  , पूरा आराम समान  ,

हमारे दिल में आराम का , हुआ घमासान  || 


सभी पेड़ - पौधों का , हमने किया सम्मान ,

फूलों के रंगों और  खुश्बु का , हमने किया सम्मान ,

तितलियों की उड़ान और सुंदरता , लगी हमें समान  || 


परिंदों की मीठी आवाज में , सुना हमने गान  ,

उनका ये गान तो उनको , बना गया महान  ,

अपनी धरती माँ तो , खुद ही है महान  ,

गगन से दूरी धरा की , नहीं होता मिलान  || 



Monday, September 21, 2026

MEETHEY - SHABD ( JIVAN )

              

                          मीठे -  शब्द  


पठन - पाठन है जरूरी , 

सुनना - सुनाना भी जरूरी  ,

बोलना शुरु कर दो दोस्तों  ,

जो तुम पढ़ोगे , सुनाओगे सब को  ,

कोई पसंद करेगा , कोई नापसंद दोस्तों  || 


अपनी सोच का लेखन  , शुरु करो दोस्तों  ,

लेखन को जब , दूजों को सुनाओगे , 

अपनी लेखनी से निकले शब्दों को  ,

विस्तार से समझाओगे दोस्तों    || 


अगर मीठे शब्द उकेरोगे  कागज पर  ,

तो तुम तालियाँ बहुत पाओगे  ,

अन्यथा तो तुम  , उदासियों में डूब जाओगे  ,

और तुम्हारे शब्द भी , उदास हो जाएँगे  दोस्तों   || 


Sunday, September 20, 2026

JEET LO SANSAAR ( KSHANIKAA )


                      जीत लो संसार  


शब्द --- शब्द की कीमत जानो  ,

मीठे शब्द जलेबी जैसे  , मोहें मन को  ,

कड़वे  शब्द दूर भगाएँ अपनों को ,

तो कौन से शब्द बोलोगे दोस्तों  ?? 


प्यार भरे शब्द करें चुंबक का काम ,

खींचे सब को अपनी ओर  ,

अपना बना लें सबको  ,

तो कौन से शब्द बोलोगे दोस्तों   ?? 


तिरस्कार भरे शब्द ,

अपनों को दूर भगा दें ,

अपनों को भी गैर बना दें  ,

तो कौन से शब्द बोलोगे दोस्तों    ?? 


अपने शब्दों को बोलो , तोल - मोल कर  ,

मीठे और प्यार भरे शब्दों से , जीत लो संसार को  ,

सबको अपना बना  लो  ,

वसुधैव कुटुंबकम  को अपना लो   || 

 

Saturday, September 19, 2026

AASHEESH ( AADHYAATMIK )


                       आशीष 


आओ बप्पा आओ ना ,

मंगल तिलक लगवाओ ना ,

मैंने मोदक बहुत बनाए  ,

रुचि - रुचि भोग लगाओ ना  || 


पूजा , अर्चना की विधि मैं ना जानूँ ,

तुम ही मुझको समझाओ ना  ,

ऐसी अनगढ़ भक्तिन को ,

तुम ही बप्पा अपनाओ ना   || 


तुम ही सारे जग के रखवाले ,

सबको सद्बुद्धि और ज्ञान देने वाले ,

कुछ तो ज्ञान , मेरे प्यारे बप्पा ,

मुझको भी दे जाओ ना   || 


आओ बप्पा आओ ना ,

अपना आशीष हम पे बरसाओ ना  ,

बप्पा प्यार और आशीष बरसाओ ना   || 


Friday, September 18, 2026

SAADII MEIN NAARII ( PREM )


                        साड़ी में नारी  


ये है साड़ी दोस्तों  , रंग - बिरंगी  साड़ी  ,

भारतीय नारी की शान है , ये सुंदर साड़ी  ,

नारी साढ़े पाँच फ़ीट की , और छः गज की साड़ी  ,

नारी का रूप है निखरता , जब लिपटे उस पर साड़ी  || 


बहुत सी पोशाकें भारत में , जो पहने है नारी  ,

मगर सौंदर्य की प्रतिमा लगती  , जब पहने वह साड़ी  ,

साड़ी से मैचिंग अन्य कपड़े , जेवरात ,

श्रृंगार का सामान , सजाते सब ही नारी   || 


सबसे सुंदर , सबसे सुंदर , जग में नारी और साड़ी  ,

मुस्कानें और प्यार झलकता है  , जब हम देखें नारी और  साड़ी ,

जीवन सुंदरता से भर जाता , देख नारी और साड़ी  ,

तो दोस्तों मुस्का लो खूब  , देख नारी और साड़ी  || 


Thursday, September 17, 2026

TEEN SAHELIYAN ( PREM )


                      तीन सहेलियाँ 


तीन सहेलियाँ हैं दोस्तों  , सोच , मुस्कान और चमक ,

तीनों की दोस्ती गहरी है  दोस्तों ,

सब उभरीं दिल - दिमाग में  || 


सोच मीठी थी  , तो होठों पे मुस्कान खिली  ,

आँखों में चमक जगी   || 


सोच कड़वी थी  , तो होठों की मुस्कान मिटी  ,

आँखों की चमक खोई   || 


सोच प्यार की थी , तो होठ गुनगुनाए ,

आँखों ने नृत्य किया  || 


सोच तीखी सी थी  , होठों ने आह भरी  ,

आँखों में नमी छाई   || 


सोच हास्य की थी  , होंठ खिलखिलाए  ,

आँखों में मस्ती छाई   || 


तीनों   सहेलियाँ  हर रंग में  ,

सुंदर लगीं दोस्तों   ,  बहुत सुंदर  लगीं   || 


Wednesday, September 16, 2026

MELAA SHABDON KAA ( JIVAN )


                            मेला शब्दों का 


एक हाथ लंबी कलम से  , उकेरा जाता ,

मीलों तक लंबा समूह , शब्दों का  ,

एक मुट्ठी जितने बड़े , दिल से  ,

निकलता जाता मीलों लंबा समूह , शब्दों  का  ||  


उनमें कुछ शब्द हँसते , मुस्कुराते  ,

और कुछ शब्द गाते  ,  गुनगुनाते  ,

इन्हीं मुस्कुराहटों और , गुनगुनाहटों  के साथ  ,

एक बड़ा मेला लगा उन , शब्दों का   || 


आँखों की चमक जैसे  , चमकते शब्द   ,

आँखों के अश्रुओं जैसे  , बिखरते शब्द  ,

उन आँखों की चमक और  , अश्रुओं से  ,

एक बड़ा मेला लगा उन  , शब्दों  का  ,

आइए दोस्तों  , इस मेले में शब्दों के   || 


Tuesday, September 15, 2026

SAPNEY ( JIVAN )


                          सपने 


सपने हैं सपने , बिल्कुल ही अपने  ,
नींद में ही होठों पर , लाते मुस्कानें  ,
नहीं कोई मेहनत , करवाते सपने  ,
दिन में भी , सोच - सोच लाते मुस्कानें   || 


गुपचुप - गुपचुप , आते हैं सपने  ,
बिना कीमत हम , पाते हैं सपने  ,
बिना किराया दिए , जाते हैं घूमने  ,
नई - नई जगहों को देखने ,
नए - नए लोगों से मिलने   || 


बिना संदेसे आते ,  हमारे सपने  ,
हमारे दोस्तों को , साथ में लाते सपने  ,
हँसी खूब बरसाते हैं सपने  ,
झर - झर - झर , झरवाते  झरने  ,
देखा कितने , मीठे - मीठे हैं सपने  ?
पलकों में बस जाते हैं सपने   || 

Monday, September 14, 2026

ANKHIYAN ( PREM )


                                अँखियाँ 


अँखियों री अँखियों , मेरी प्यारी सखियों  ,

सारी दुनिया तुम ही दिखातीं  ,

सभी रंगों का अहसास दिलातीं  || 


नींद आने पर , रात्रि के पहर में ,

तुम तो बंद हो जातीं   ,

मगर रात भर तुम मुझको  ,

सुंदर स्वप्न दिखाती जातीं  || 


स्वप्न दिखाते - दिखाते तुम  ,

सारी दुनिया की सैर करातीं  ,

जो जगहें हमने ना देखी हों  ,

उनकी भी तुम तो सैर करातीं   || 


प्यारी सखियों , मेरी अँखियों  , 

जीवन के आकाश में तुम , 

इंद्रधनुष भी सजा जातीं  ,

वह इंद्रधनुष , जिससे तुम , 

हमें क्या ,आकाश को भी रंग जातीं    ?? 


Sunday, September 13, 2026

VIDHAAN VIDHI KAA ( AADHYAATMIK )


                       विधान विधि का 


विधि का विधान ही तो  , संसार को चलाता है  ,

हर किसी के लिए , नियम बने होते हैं  ,

कोई भी तो  , इस नियम से परे नहीं होता है   || 


स्वयं परमात्मा भी तो , इसी से बँधे होते हैं  ,

जो कुछ विधान में लिखा होता है , 

वही उन्हें भी अपनाना होता है   || 


गजानन का जन्म ही , विधि विधान से ही हुआ है ,

कान्हा भी इसी कारण , राधा से दूर रहे ,

राम ने भी इसी कारण , सीता को त्याग कर वन भेजा  ,

मानव योनि में रहकर , मानव जीवन बिताया   || 


विष्णु , शिव सभी बँधे ,विधि की डोर में ,

कोई भी अपने मन की , नहीं  कर सका था  ,

तो हम क्या कर सकते हैं दोस्तों   ?? 


Saturday, September 12, 2026

BHAAV ( PREM )


                             भाव 


राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने ,

बहुत सुंदर भावों को , व्यक्त किया अपनी लेखनी से  ,

" जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमें रसधार नहीं ,

वह ह्रदय नहीं है पत्थर है  , जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं "|| 


दोस्तों ह्रदय को ह्रदय , बनाए रखना है तो  ,

ह्रदय में भावों का , समावेश होना जरूरी है  || 


ईश्वर के लिए   ------ ,

एक भक्तिभाव जरूरी है  ,

ईश्वर के लिखे विधान के लिए  ,

ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास ,

जो कुछ ईश्वर ने हमें दिया , उसके लिए  ,

समर्पण और धन्यवाद जरूरी है   || 


अपने देश के लिए   -------  ,

प्यार के सम्मान के भाव जरूरी हैं  ,

देश की धरा , प्रकृति ,पहाड़ ,नदियाँ ,समंदर ,

हर  स्थान , हर मानव से प्यार जरूरी है   || 


अपनों के लिए   -------- ,

अपनों के प्यार के लिए  ,

अपनों के दिए सम्मान और भरोसे के लिए  ,

उनके प्रति आदर ,प्यार और विश्वास जरूरी है  || 


ये भाव जब दिल को भर देंगे ,

तो दिल में सभी के लिए ,

प्यार ही उत्पन्न होता है  ,

विश्व में सभी के लिए  ,

प्यार और सम्मान का भाव जरूरी है  ,

समझो दोस्तों  ---  विश्व बंधुत्व जरूरी है   || 



Friday, September 11, 2026

DHEERE - DHEERE ( PREM )

                             धीरे - धीरे 


बदलोगे जो खुद को , तो रंग जमा लोगे  ,
जहां की मुसीबतों से , पीछा छुड़ा लोगे  ,
कोई कुछ भी बोले बंद तुम , कान कर लोगे ,
अपने दिल की बातें दिल में ,ही छुपा लोगे    || 


दुनिया वालों का तो काम है , कुछ भी कहना ,
तब अपने कानों में तुम , थोड़ी सी रुई रखना  ,
फिर मजे से तुम दोस्तों , मुस्कुराते रहना ,
तभी तो तुम मजे से , जीवन बिता लोगे   || 


दोस्तों ये जिंदगी तुम्हारी है  , मत भूलो यह बात  ,
दिन के बाद आती है  , हमेशा रात  ,
चैन की नींद सो जाओगे  , बीतेगी  रात  ,
सुबह को उठो तो खूब  ,  खिलखिला लोगे   || 


बगीचे की घास  पर चलो  , नंगे पैर धीरे - धीरे  ,
मानो चल रहे हो तुम ,नदिया के तीरे ,
समेटो  फूलों की महक अपनी  , साँसों में धीरे - धीरे  ,
फूलों पे जमी ओस की बूँदें , होठों पे तुम समेट लोगे   || 

HAMARAA BAGEECHAA ( JIVAN )


                        हमारा बगीचा  


एक दिन था दोस्तों  , बहुत समय पहले  ,

दुनिया वालों के बगीचे में , देख खिलते फूल ,

मगर ना हमारे पास थी , भूमि कि खिलते फूल   || 


सोच - सोच कर हमने , एक सोच ली चुन  ,

उसे कार्यान्वित करने को , नई सोच ली बुन  ,

उसकी विधि को हमारे , दिल ने ली सुन   || 


लाए हम गमले , मिट्टी  और खाद ,

गमलों को हमने , अपनी छत पर जमाया  ,

मिट्टी और खाद मिला , गमलों को सजाया ,

अब पौधों और बीजों को मिट्टी में जमाया   || 


एक सप्ताह बीतते , अंकुरण शुरु हो गया  ,

कुछ पौधे जो लगाए थे , उनका बढ़ना शुरु हुआ  ,

करीब 15 - 20 दिनों में , उम्मीद के फूल खिले  ,

और कुछ समय बाद  , हमारा बगीचा शुरु हुआ  ,

हमारा सपना पूरा हुआ  , बगीचा खिल गया   || 

 

Thursday, September 10, 2026

DIL MEIN MAHAK ( JIVAN )


                           दिल में महक 


प्यार बाँटते चलो , प्यार बाँटते चलो  ,

मुस्कानें भर लो झोली में , सभी में बाँटते चलो  ,

रिमझिम सी बरखा आई , तो दिल बोला ,

ये रिमझिम भर लो दिल में , अँगना लो भिगोते चलो  || 


कलियाँ जब चटखीं , फूल खिले , तो उनकी महक से ,

सारे जहां को , महकाते चलो दोस्तों   || 


मुस्कानों के बाँटने से , सभी तो मुस्काए  ,

रिमझिम बरखा से तो दोस्तों , समंदर लहराए  ,

लहरें उनकी नाचीं  , समंदर मुस्काए  ,

फूलों की महक से तो , चमन सारे महके  ,

जहां महका और  , दिल में महक समाए  || 


Tuesday, September 8, 2026

ROSHAN - PUNJ ( JIVAN )

         

                      रोशन पुंज 


गगना में चमका , रोशन - पुंज सूर्य  ,

धरा का सारा संसार , रोशन हो उठा ,

जाग गए सभी जीव - जंतु , चेहरा खिल उठा  ,

चहल - पहल मच गयी  , वातावरण खुल उठा   || 


परिंदे चहक उठे  , उनकी चहक से ,

वातावरण गुंजायमान हो उठा  ,

कलियाँ खिल कर , फूल बन गईं  ,

जिनकी महक से , चमन महक उठा   || 


तितलियाँ जब  , उड़ीं फर - फर  ,

बच्चों की किलकारियाों से  , 

चमन मुखरित हो उठा  ,

सभी देखने वालों के दिल  ,

और होठों पर , मुस्कानें जग उठीं   || 


Monday, September 7, 2026

BACHPAN SEY ( PREM )


                         बचपन से 


चल , चल री लेखनी  , शब्दों को तू सजा दे  ,

सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे  ,

मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे   || 


तू ही मेरी प्यारी लेखनी  , शब्दों को सजाने वाली  ,

तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली  ,

रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली   || 


चल , चल री लेखनी  , दिल में खुशियाँ भर दे  ,

तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे  ,

उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली   || 


Sunday, September 6, 2026

SAMAAN ( PREM )

  

                                समां 


होठों पे मुस्कान सजा लो ,

दिल से मलाल निकालो  ,

महफिल में तभी तो रंग खिलेगा  ,

पैरों को थोड़ा थिरका लो ,

कदमों को ना लड़खड़ाओ ,

महफ़िल में तभी तो रंग भरेगा   || 


दिल ही दिल में मत ,

गीत गुनगुनाओ  ,

थोड़ी तो तान सजाओ  ,

संगीत संग शब्दों को  ,

तुम गुनगुनाओ ,

महफिल में हर कोई  , गुनगुनाएगा  || 


ऐसा तभी तो होगा दोस्त  ,

जब सभी मुस्काएँगे  ,

मुस्कुराहटें फैलाएँगे ,

जिंदगी पूरी ही खिल जाएगी दोस्त मेरे  ,

महफिल में तभी  तो  समां बँधेगा  || 

Saturday, September 5, 2026

INDRADHANUSH ( KSHANIKAA )

 

                                इंद्रधनुष 

 

मेरी खिड़की से झाँका  जो आज ,  इंद्रधनुष  ,

उसने तो कर दिया सखि री मेरे  , दिल को खुश   || 

 

चमक उठे मेरे नयना देख कर , इंद्रधनुष  ,

मचल उठा मेरा दिल , लेने को उसका , अक्स   || 

 

छाए हुए थे घने बदरा , गगना में जब आया , ये मेघधनुष  ,

जब हमने लिया सखि री उसका  ,  अक्स   || 

 

इतना सुंदर , सतरंगा जब गगन पे उभरा , वह इंद्रायुध ,

हम भूल गए इस दुनिया को देखकर , वह इंद्रायुध  || 

 

कुछ ही पलों में सखि री , बरखा बरसी , मूसलाधार  ,

और गुम हो गया , हमारा वो प्यारा सा , इंद्रधनुष   ||  

 

Friday, September 4, 2026

CHAANDNII ( CHANDRAMAA )


                             चाँदनी 


चाँदनी ने कहा चाँद से  ,

" तू है चाँद मेरा , मैं हूँ तेरी चाँदनी  ,

मैं तो चमकती हूँ सजना , पा के तेरी रोशनी  || 


तेरी मुस्कान से ही तो , मैं चमक जाती हूँ  ,

साथ ही दूजों को भी तो  , मैं चमका जाती हूँ  || 


रात के आँचल में , छिप गया है सारा जग  ,

मैं ही अपना आँचल देकर , जग को चमका जाती हूँ  || 


रात के अँधियारे की चादर तो , जग की मुस्कान रोक देती है ,

तो चाँदनी जगवालों के होठों पे , मुस्कान देती जाती है  || "


 मैं तो चाँद और चाँदनी , दोनों की ही दोस्त हूँ  ,

और उनकी दोस्ती में , मैं तो मस्त हूँ दोस्तों   || 

Thursday, September 3, 2026

KAANHA ( PREM )

 

                                 कान्हा 

 

कान्हा , ओ कान्हा आओ ना  , 

बंसी मधुर बजाओ ना  ,

सब बंसी की तान को तरसें  ,

उनको तान सुनाओ ना   || 

 

नंद गाँव में तो कान्हा ,

माँ यशोदा बाट जोहतीं ,

सारी की सारी वहाँ गोपियाँ ,

जुड़कर तुम्हारी राहें तकतीं ,

उन समझो दर्शन दे जाओ ना  || 

 

मधुबन में राधा रानी पुकारे ,

कब आओगे कान्हा हमारे  ?

राधा की पुकार तो सुनलो कान्हा  ,

दौड़ के मधुबन में आओ ना  ,

मीठी तान सुनाओ ना  ,

बरसों बीते आ जाओ ना   || 

 

Wednesday, September 2, 2026

CHITRAKAARII ( JALAD AA )


                      चित्रकारी  


बदरा लाए इतना पानी , क्या सागर खाली किया  ?

झम - झम पानी बरसाया , तुमने हर पार्क , हर गली ,

क्या तुम थकते नहीं बदरा , इतना पानी लाते  ?

पानी भरते , उठाते , लाते और बरसाते , थके या नहीं  ?? 


गगना में हवा ने झुलाया , दामिनी ने चमकाया ,

तुमने रिमझिम जल बरसाया  ,

तो धरा पे हरियाली छाई  , मानो धरा मुस्कुराई  ,

जगवासियों ने मुस्कानें फैलाईं   || 


रवि किरणों ने बदरा पे , अपना जाल बिछाया ,

अलग - अलग रंगों से , चित्रकारी को सजाया  ,

रिमझिम के कुछ समय बाद ,

गगना में इंद्रधनुष मुस्कुराया   || 

Tuesday, September 1, 2026

BEETAA KAL ( KSHANIKAA )

 

                           बीता कल 

 

मत करो विश्वास , सुनी - सुनाई बातों का  ,

सुनी - सुनाई बातें भी , क्या सच हो सकती हैं  ?

उनमें तो झूठ ही , बसता होगा दोस्तों   || 

 

विश्वास उसी पर रखो दोस्तों ,

जो अपना जीवन दाता है  ,

उसी के हाथ में तो , अपना जीवन है  ,

वही उसे सुगम , सफल और सुंदर बनाएगा   || 

 

जीवन में कल जो बीत गया , 

वो तो बीत गया दोस्तों  ,

और अब बदला नहीं जा सकता  ,

आगे आने वाले , कल में क्या होगा  ?

विश्वास रखो , जो  होगा सुंदर होगा  || 

 

किसी भी पल , कहीं से भी  ,

प्यार और दोस्ती , जन्म ले सकते हैं  ,

और उन्हीं से ही , जीवन सुंदर होगा  ,

प्यार से ही , मुस्कानें  खिलेंगी   ||