Friday, September 11, 2026

HAMARAA BAGEECHAA ( JIVAN )


                        हमारा बगीचा  


एक दिन था दोस्तों  , बहुत समय पहले  ,

दुनिया वालों के बगीचे में , देख खिलते फूल ,

मगर ना हमारे पास थी , भूमि कि खिलते फूल   || 


सोच - सोच कर हमने , एक सोच ली चुन  ,

उसे कार्यान्वित करने को , नई सोच ली बुन  ,

उसकी विधि को हमारे , दिल ने ली सुन   || 


लाए हम गमले , मिट्टी  और खाद ,

गमलों को हमने , अपनी छत पर जमाया  ,

मिट्टी और खाद मिला , गमलों को सजाया ,

अब पौधों और बीजों को मिट्टी में जमाया   || 


एक सप्ताह बीतते , अंकुरण शुरु हो गया  ,

कुछ पौधे जो लगाए थे , उनका बढ़ना शुरु हुआ  ,

करीब 15 - 20 दिनों में , उम्मीद के फूल खिले  ,

और कुछ समय बाद  , हमारा बगीचा शुरु हुआ  ,

हमारा सपना पूरा हुआ  , बगीचा खिल गया   || 

 

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