हमारा बगीचा
एक दिन था दोस्तों , बहुत समय पहले ,
दुनिया वालों के बगीचे में , देख खिलते फूल ,
मगर ना हमारे पास थी , भूमि कि खिलते फूल ||
सोच - सोच कर हमने , एक सोच ली चुन ,
उसे कार्यान्वित करने को , नई सोच ली बुन ,
उसकी विधि को हमारे , दिल ने ली सुन ||
लाए हम गमले , मिट्टी और खाद ,
गमलों को हमने , अपनी छत पर जमाया ,
मिट्टी और खाद मिला , गमलों को सजाया ,
अब पौधों और बीजों को मिट्टी में जमाया ||
एक सप्ताह बीतते , अंकुरण शुरु हो गया ,
कुछ पौधे जो लगाए थे , उनका बढ़ना शुरु हुआ ,
करीब 15 - 20 दिनों में , उम्मीद के फूल खिले ,
और कुछ समय बाद , हमारा बगीचा शुरु हुआ ,
हमारा सपना पूरा हुआ , बगीचा खिल गया ||
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