Saturday, April 4, 2026

PYAAR KE RAASTE ( CHANDRAMAA )

 

                      प्यार के रास्ते  

 

छन - छन के आई चंदनिया  , मेरी खिड़की के रास्ते ,

अपनी चाँदी जैसी चमक से  , मुझे रंगने के वास्ते  ,

और मुझको अपना दोस्त  , बनाने के वास्ते   || 

 

मेरी मुस्कान अपनी के जैसी  , खिलाने के वास्ते  ,

चंदा से मेरी मुलाकात  , कराने के वास्ते  ,

अपनी मुस्कान का जादू  , जगाने के वास्ते   || 

 

मैंने भी दिया जवाब उसकी खुशी को  , बढ़ाने के वास्ते  ,

अब खुल ही गए थे हम दोनों के  , मिलने के रास्ते  ,

ये हैं  प्यार के रास्ते  , ये हैं  प्यार के रास्ते   ||  

 

Friday, April 3, 2026

PYAAR KE BEEJ ( KSHANIKAA )

 

                      प्यार के बीज 

 

प्यार के बीज उगा दो ईश  , मानव के दिल में  ,

इसका तो खर्चा नहीं होगा  पूरा  ,  किसी भी बिल में  ,

आज जो इस जग में हो रहा  है , ढूँढों सभी के दिल में   || 

 

मानव - मानव का बना है दुश्मन  , दुनिया के इस मेले में  ,

मानव तू कर अपना सुधार  , मत पड़ किसी झमेले में  ,

धरती पर प्यार उगा  ले , मत डूब बमों के रेले  में   || 

 

क्या मिलेगा मानव  , तुझको इसका फल  ?

इस जलजले में खत्म , हो जाएगा सारा जल  ,

नहीं बच पाएगी , मानव शुद्ध पवन  ,

फिर क्या बच पाएगा  , मानव तेरा जीवन   ?? 

 

Thursday, April 2, 2026

MASTT - BADARAA ( JALAD AA )

 

                               मस्त - बदरा 

 

मस्त - मस्त ओ कारे बदरा  , गरज - गरज कर आया तू  ,

अपनी मटकी भर लाया तू  , क्या सागर खाली कर आया तू   ??

 

तपन से धरा हो गई प्यासी  , उसकी प्यास बुझा जा तू   ,

सागर भी कुछ - कुछ है प्यासा  , उसकी भी प्यास बुझा जा तू   || 

 

तेरी मूसलधार बरखा से  , ताल - तलैया भरते जाते  ,

नदिया भी दौड़ी उछल - उछल कर  , सागर की लहरें भी उछलीं  ,

प्यास तो सागर की भी बुझ गई  , सागर की मुस्कान बढ़ी   || 

 

 पवन ने बदरा खूब उड़ाए  , दामिनी भी कड़कड़ चमकाई  ,

सब के संग हम भी मुस्काए  , बच्चे बरखा में खूब नहाए  ,

सुन के हमारी बातों को  , बदरा कैसा मुस्काय तू    ?? 

 

Wednesday, April 1, 2026

BHAVSAAGAR ( AADHYAATMIK )

 

                               भवसागर 

 

किस के नैनों में इतनी शक्ति है  ?

जो ईश्वर को भरपूर देख सके  ,

भावों से जो कोशिश कर लेगा  ,

वह ही ईश्वर के दर्शन  पाएगा   || 

 

भावों को नींद से जगा ले प्यारे  ,

उन्हीं से तू भवसागर पार कर जाएगा  ,

नहीं तो इसी भवसागर को   ,

बीच में ही तू डूब जाएगा   || 

 

भवसागर तो गहरा है प्यारे  ,

हर कोई डूब जाता इसमें  ,

जो भाव शृद्धा के लाएगा  ,

वही तो तैर कर जाएगा   || 

 

ईश जगाओ मानव के भाव  ,

तभी तो लौ लगा पाएगा  ,

ईश्वर के चरणों में मानव तू   ,

तभी तो आशीष ईश का पाएगा   || 

 

Tuesday, March 31, 2026

LAHAREN SAAGAR KII ( RATNAAKAR )

 

                       लहरें सागर की 

 

जीवन की राहों पर  , जब दौड़ चले हम  ,

तभी तो जाना कितना सुंदर  , है ये सारा जग   ?

 

रंग भरी इस दुनिया में  , फूलों से चमन महके  ,

  उसी महक में डूब गया , ये प्यारा सा  जग  || 

 

सागर की लहरें , उछलीं - कूदीं  तट पर  ,

सागर ने दी आवाज  , मगर ना लौटीं वो वापस  || 

 

लहरों का ये देख के खेला  , सब रुके तट पर  ,

सब के होठों की  मुस्कान  , सज गई उनके मुख पर   || 

 

लहरें मुस्काईं सबकी  , देख - देख मुस्कानें  ,

लहरों ने फिर छलांग लगाई  , खूब उछल  - उछल कर   || 

 

Monday, March 30, 2026

MUSKAANON KO ( KSHANIKAA )

 

                            मुस्कानों  को 

 

दुनिया के इस रंगमंच पर  , अनेकों किरदार हैं  ,

कुछ की आँखों में  आँसू , कुछ में चमकार है  ,

कुछ के होठों पर आहें  , कुछ पर फैली मुस्कान है   || 

 

सब का अपना - अपना भाग्य , जो लिखा रचेता ने  ,

 सब की अपनी - अपनी मेहनत , जो लिखी स्वयं  ने  ,

दोनों जो जीवन में मिल जाएँ  , तो फैलेगी मुस्कान  || 

 

अगर कोई कमी रही  ,  तो फैलेंगी आहें  ,

मेहनत में कमी ना छोड़ो  , तभी तो आएगी मुस्कान  ,

तो खिलाओ मुस्कानों को  , अपना लो मुस्कानों को  || 

 

सब को अपना - अपना  , किरदार   निभाने दो  ,

तभी तो रंगमंच सजेगा  , सज कर पूर्ण होगा  ,

सारे जग का दिल बहलाएगा  , आनंदित करेगा   ||  

 

Sunday, March 29, 2026

KYAA HOGAA ? ( KSHANIKAA )

 

                        क्या होगा  ?  

 

ईश्वर ने धरा बनाई  ,

उस पर जल और थल बनाए  ,

फिर जीव - जंतुओं को जन्म दिया  ,

जलचर और थलचर को बनाया   || 

 

सागर , जंगल , पहाड़ ,  मैदान सभी में ,

जीवों का मेला लग गया बंधु  ,

तब ईश्वर की सबसे बुद्धिमान रचना  ,

मानव की रचना हुई बंधु  || 

 

ईश्वर ने सभी जीवित वनस्पति , 

और जीवों को समान उपहार दिए  ,

मगर मानव ने धरा पर सरहदें बनाईं  ,

सभी ने अपने लिए  , सब कुछ हथियाना चाहा   || 

 

हथियाने की आपा - धापी में  ,

मानव ने ईश्वर की बनाई दुनिया को  ,

नष्ट करना शुरु कर दिया  ,

जंगल काटे , पर्वत खोदे  , जल को दूषित किया   || 

 

आज मानव युद्ध की , उस कगार पर खड़ा है  ,

कि दूसरों को नहीं , स्वयं को ही मार रहा है  ,

जब मानव जीवन ही नहीं रहेगा  ,

तो क्या होगा  ? क्या धरा मिट जाएगी  ??