Sunday, April 12, 2026

PYAAR KHOOB ( AADHYAATMIK )

 

                              प्यार खूब  

 

ईश्वर तेरी बनाई , इस सुंदर दुनिया में ,

क्यों मानव आपस में लड़ता है  ?

एक - दूजे को मारता रहता है  ,

क्यों दर्द दूजों को देता है   ?? 

 

क्या प्यार नहीं , उसके दिल में ?

क्या धड़कन नहीं , उसके दिल में  ?

क्यों प्यार को नहीं , पहचाने वो  ?

क्यों धड़कन को नहीं  , पहचाने वो   ?? 

 

क्या चमन में खिलते , फूलों को देखकर  ,

मुस्कान नहीं आती होठों पर  ?

 क्यों  महक फूलों की   ,उसकी साँसों को ,

महकाती नहीं अंतर्मन को   ??

 

क्यों ईश्वर तुमने मानव के दिल को , 

ये सुंदर गुण नहीं दिए  ?

क्यों दिमाग ही मानव के , विकसित खूब किए तुमने  ?

विकसित तुम दिल को कर दो ,

धड़कनों में तुम प्यार भर दो  ,

प्यार खूब , खूब  , खूब भर दो   ||  

Saturday, April 11, 2026

MILII SIIKH ( KSHANIKAA )

 

                          मिली हुई सीख 

 

समय अपनी चाल से चलता रहता है  , 

चाहे वह गम में डूबा हो , या मुस्कान में  ,

तो दोस्तों भूल जाओ उस गम को  ,

मगर उसने जो सिखाया , वह मत भूलना ,

वह सीख जो गम ने सिखाई ,

वही आपको आगे का रास्ता दिखाएगी  || 

 

यदि गलती कोई हुई है आपसे   ,

 तो अपनी जिंदगी की किताब से  ,

उस  गलती वाले पन्ने को फाड़ दो दोस्तों  ,

और पूरी किताब को संभाल लो  ,

बस उस  गलती को  ,

फिर मत दोहराना दोस्तों  , जिंदगी संवर जाएगी  || 

 

हर सीख जो किसी भी , राह में मिलती है  ,

वह हमें नई राह दिखाती है , राहों को आसान बनाती है ,

वही सीख हमारी मुस्कानों को बढ़ाएगी , समझ गए ना   ||  

Friday, April 10, 2026

WAKT KII BAAT ( KSHANIKAA )

 

                         वक्त की बात  

 

छोड़ो  कल की बातें  , कल की बात पुरानी ,

आने वाले कल की  , सारी बातें  सपनी  ,

आज की ही बातें दोस्तों  , हैं सिर्फ अपनी   || 

 

बीते कल को दोस्तों  , बदला नहीं जा सकता  ,

आने वाले कल के बारे में , सोचा नहीं जा सकता  ,

आज को ही दोस्तों  , एन्जॉय किया जा सकता   || 

 

आज का दिन भी दोस्तों  , कल को कल हो जाएगा  ,

आने वाला कल भी कल को  , आज हो जाएगा  ,

ये तो वक्त है दोस्तों  , प्रतिपल  , प्रतिक्षण ,

बदलता जाता है , बीतता ही जाता है   ,

तो अफसोस ना करना दोस्तों  ,

अच्छा हो या बुरा  , सारा वक्त बीत ही जाता है   || 

 

NIINV ( KSHANIKAA )

 

                                 नींव 

 

सपने तो जीवन की , नींव  हैं दोस्तों  ,

जैसे हर इमारत नींव पर  , खड़ी होती है  ,

वैसे  ही जीवन  सपनों पर  , ही खड़ा होता है  || 

 

मानव अपने सपने पूरे , करने की कोशिश करता है  ,

उसकी कोशिशों से  , कई सपने पूरे होते हैं  ,

मगर कुछ सपने कोशिशों के , बावजूद भी पूरे नहीं होते  || 

 

जो सपने पूरे हो जाते हैं  , वही जीवन को खड़ा करते हैं  ,

जो सपने अधूरे रह जाते हैं  , वो सपने कहीं खो जाते हैं  || 

 

पूरे हुए सपने ही जीवन का , स्तंभ बन जाते हैं  ,

तो दोस्तों अपनी पूरी , कोशिशों को लगा दो  ,

और अपने सपनों को  , पूरा करने में लगा दो  ,

यही अपने जीवन का लक्ष्य बना लो   || 

 

Wednesday, April 8, 2026

GOONJ ( KSHANIKAA )

 

                          गूँज 

 

सारी दुनिया में , आवाजों का शोरगुल है  ,

कानों में उन आवाजों की ,  गूँज हमेशा है  ,

इस शोर को कौन  , कम कर सकता है  ?

कौन उसकी गूँज को  , खत्म कर सकता है   ??

 

दुनिया को खिलखिलाहटों में , डुबा लो यारों  , 

साथ में तुम भी खूब  , खिलखिला लो यारों  ,

जिंदगी में खिलखिलाहटें होंगी  , 

तभी तो जिंदगी सुंदरतम , स्थान  पाएगी यारों   || 

 

दुनिया की राहें इतनी , सुंदर हो जाएँगी  ,

कि हर कोई सुगमता से  , उन पर दौड़ जाएगा  ,

और जीवन को हँसी में , डुबा लेगा यारों   || 

 

Tuesday, April 7, 2026

INDRADHANUSH JAGMAGAAYAA ( KSHANIKAA )

 

                          इंद्रधनुष  जगमगाया  

 

रवि किरणों में छिपे हैं  , सात रंग  ,

पर आँखें देख पाते हैं  , एक ही रंग  ,

वो है रंग सफेद  , जिसमें छिपे सातों रंग   || 

 

 ये सब क्या जादू है , रवि किरणों  का  ?

कौन इसे सुलझाएगा  ? क्या रवि   ?

रवि तो वर्णन नहीं  कर पाएगा   || 

 

मानव ने ही इस जादू को सुलझाया  ,

प्रिज़्म  बनाकर  ,

जिसने रवि किरणों के रंग अलग बिखराए  ,

हर रंग को अलग - अलग दिखलाया   || 

 

रवि ने तो गगन की ऊँचाई में  ,

वर्षा ऋतु में  , बरखा के बाद  ,

रंग अलग छनकाए , और इंद्रधनुष जगमगाया   || 

 

Monday, April 6, 2026

ABHILAASHAAEN ( KSHANIKAA )

 

                            अभिलाषाएँ 

 

अभिलाषा का अर्थ है गहरी इच्छा  ,

जो हम दिल की गहराइयों से चाहते हैं  ,

यही हमारी अभिलाषा है ,यह तो हमारे दिल की भी है , 

अब हम फूलों की अभिलाषा ,जानने की कोशिश करते हैं  || 

 

फूल जब खिलते हैं चमन में , 

तो मानव उनके सौंदर्य ,और महक में डूब जाता है ,

फूल तोड़कर उनका उपयोग ,विभिन्न रूपों में करता है  || 

 

फूलों की अपनी अभिलाषा और चाहतें हैं ,

ईश्वर के चरणों में चढ़ाया जाऊँ ,

मंदिरों और ईश्वर की सज्जा में ,प्रयोग किया जाऊँ ,

मानव तू मेरी अभिलाषा ,पूरी कर दो दोस्त  || 

 

नारी के अनोखे और सुंदर बालों में ,

गजरे और सुंदरता के ,रूप में सजाया जाऊँ  ,

क्या मानव तुम मेरी अभिलाषा पूरी करोगे  ??

 

सभी के चमन और घरों को ,सजाऊँ  और महकाऊँ ,

क्या मानव तुम मेरी अभिलाषा , पूरी करने में मदद करोगे  ?? 

 

 एक सबसे बड़ी अभिलाषा  हमारी है मानव  ,

हम वीरों की राहों को सुंदर बनाएँ और महकाएँ  ,

वो वीर जो देश पर जान कुर्बान करने चल देते हैं  ,

और देश , देशवासियों को सुरक्षित रखते हैं  ,

वही हमारे आदर्श हैं , प्रेरणा हैं  ,

तो मानव करो हमारी अभिलाषा पूरी   ||