शुभ रात्रि
आवाज आई गगना से , चाँद और सितारों की ,
जरा निगाहें उठा कर , तो देख सखि ,
जब देखा मैंने , तो उन्होंने मुस्का के कहा ,
देख सखि हम गगना से , बोल रहे हैं सखि ||
मैं भी मुस्का के बोली , क्या हाल - चाल हैं दोस्तों ?
वो भी पलट के बोले , हाल - चाल तो ठीक हैं ,
पर ये दूरी तुमसे , बहुत बुरी लगती है ||
रात में ही दिखाई देते हो , तुम सब दोस्तों ,
बात इतनी दूर से , अच्छी तरह नहीं हो पाती ,
पर जितनी भी होती है , उसी में सब्र करना है दोस्तों ||
चलो दोस्तों अब सो जाती हूँ ,
तुम्हारा तो जागने , और चमकने का समय है ,
पर मेरी तो रात है , सोने का समय ,
तो शुभ रात्रि दोस्तों ||