Monday, November 2, 2026

PANKH UDHAAR ( JALAD AA )


                        पंख उधार 


कोई तो दे दे पंख उधार  , मैं उड़ जाऊँ बदरा पार ,

बदरा की डोली में  , मैं हो जाऊँ सवार   ,

कोई तो  ------   || 


गगना में  चमकते चंदा , तारों को मैं देखूँ  ,

उन चंदा - तारों को मैं  , अपनी चूनर में भर लूँ  ,

फिर पहन के उस चूनर को , मैं इठलाती घूमूँ  ,

कोई तो   --------   || 


बदरा के पास ही , मिले बहुत से पंछी ,

दो क्या , दस क्या , बीस पंख तू ले ले  ,

फिर उड़ चल हमरे साथ  , हम खेलेंगे बदरा पार  ,

कोई तो  --------   || 


तुमने पंख दिए जो मुझको  , किया बहुत अहसान  ,

कभी ना भूलूँगी मैं  , ये सुंदर अहसान  ,

जीवन की सुंदर राहें  , फिर हो जाएँगी पार  ,

कोई तो   --------   || 


दिए जो तुमने पंख उधार  , मैं उड़ आई बदरा पार  ,

उड़ आई  मैं उड़ आई  , उड़ आई बदरा पार   ||  


Sunday, November 1, 2026

DIL KHO GAYAA (GEET )


                   दिल खो गया 


कुछ तो हुआ है  , कुछ हो गया है  ,

प्यार की राह में , दिल खो गया है   || 


जिंदगी अपनी , डूबी है प्यार में  ,

जिंदगी खिली है  , अब की बहार में  ,

दिल भी महका है  , अब की बहार में  ,

महकने से ये दिल  , बहक  सा गया है   || 


रंग आँचल में ,  सिमट से गए हैं   ,

फूल आँचल में  , देखो भर गए हैं  ,

आँचल भी मेरा  , चमन बन गया है   || 


रात तारों से  , जगमगा गई है   ,

नींद भी पलकों में  , अंदर आ गई है  ,

मेरा हर सपना  ,  सच हो गया है   ||  


Saturday, October 31, 2026

SHUBH RAATRII ( CHANDRAMAA )


                       शुभ रात्रि  


आवाज आई गगना से , चाँद और सितारों की  ,

जरा निगाहें उठा कर , तो देख सखि ,

जब देखा मैंने , तो उन्होंने मुस्का के कहा  , 

देख सखि हम गगना से , बोल रहे हैं सखि   || 


मैं भी मुस्का के बोली  , क्या हाल - चाल हैं दोस्तों  ?

वो भी पलट के बोले , हाल - चाल तो ठीक हैं  ,

पर ये दूरी तुमसे , बहुत बुरी लगती है  || 


रात में ही दिखाई देते हो  , तुम  सब  दोस्तों  ,

बात इतनी दूर से , अच्छी तरह नहीं हो पाती  ,

पर जितनी भी होती है  , उसी में सब्र करना है दोस्तों   || 


चलो दोस्तों अब सो जाती हूँ  ,

तुम्हारा तो  जागने , और चमकने का समय है  ,

पर मेरी तो रात है  , सोने का समय  ,

तो शुभ रात्रि दोस्तों   || 


Friday, October 30, 2026

AA REY , AA REY ( PREM )


                       आ  रे  , आ  रे 


दिल में बसा तेरा प्यार पुकारे  ,

आ  रे  , आ   रे  , मेरे सजना  आ   रे  ,

जीवन की नदिया के  , धारे पुकारें  ,

आ   रे  , आ   रे  --------   || 


प्यार के रंग गुलाबी  , महक फैलाएँ वो तो भीनी  ,

चमन में खिलते फूल पुकारें  ,

आ   रे  , आ   रे   --------- || 


प्यार और फूलों की , महक  ने  ,

जीवन को सुंदर बनाया  ,

जीवन की हरियाली ने  , हमें प्यार सिखलाया  ,

इसी हरियाली ने सजाए , सपने हमारे  ,

आ   रे  , आ   रे   ---------   || 


Thursday, October 29, 2026

DAASTAN ( JIVAN )


                         दास्तां 


प्यार की दास्तां , तुम सुनो तो कहें  ,

क्या करेगा सुन के जहां  ?

तुम सुनो तो कहें  || 


खिल गए हैं फूल चमन में  ,

खुश्बुएँ फैल गईं हैं सहन में , 

खुश्बु को भर लो , अपनी साँसों में ,

महका लो तुम भी  ,  अपनी  साँसों  को  ,

मुस्कानें फैलेंगी तुम्हारी   || 


दूजों  को क्यों हम  , अपनी दास्तां सुनाएँ  ,

अपनों के प्यार में  ही , हम डूब जाएँ  ,

तुम सोच लो हमारी मजबूरियाँ  ,

और अपनी दास्तां , दोस्तों को सुनाएँ  ,

तभी तो मुस्कानें भी फैलेंगी  ,

तो दोस्तों तुम भी , मुस्का लो  साथ हमारे   || 

Wednesday, October 28, 2026

NEEND - SAPANEY ( JIVAN )


                 नींद - सपने 


सपनों ने जब पुकारा , कहा - नींद में डूबो ,

सो जाओगे , तब हम आएँगे  ,

दुनिया तुम्हें घुमाएँगे  ,

पहले तुम सो जाओ  || 


नींद  जब हमें आई  , सपनों में ले गई  ,

सारी दुनिया घूमी हमने  , 

सपनों में डूबे ही डूबे हम  ,

खुला मोहब्बत का दरवाजा ,और हम मुस्काए   || 


नींद और सपनों का साथ , हमेशा का है  ,

नींद में ही सपने आते हैं , 

सपनों से मुस्कान खिलती ,

नींद जरूरी है जीवन के लिए , सपनों के लिए  || 


तो शांत मन से , चैन से सोकर ,

सपनों का आनंद , लीजिए दोस्तों  ,

घूमिए दुनिया , मुस्कुराइए , खिलखिलाइए   || 



SHIKSHAK AUR GURU ( JIVAN )


                    शिक्षक और गुरु 


जब हम छोटे बच्चे थे  , विद्यालय गए  ,

वहाँ कुछ शिक्षक थे दोस्तों  , कुछ गुरु थे  ,

दोनों का सिखाने  का , ज्ञान देने का ,

तरीका अलग था ,   शिक्षक पुस्तकें पढ़ाते थे  ,

मगर गुरु जीवन के चारों तरफ के  ,

ज्ञान को समझाते थे  || 


गुरु के शब्द हमारे , दिल और दिमाग तक ,

पहुँचते थे  , हमारे ज्ञान को आगे बढ़ाते थे  ,

गुरु हमें ज्ञान देने के साथ ,

अपनी मुस्कान भी बिखराते थे , 

जिससे हमें उनके , प्यार का आभास होता था  ,

और हमें सब कुछ ,अच्छी प्रकार से ,

समझ आता था   || 


उन्हीं गुरुओं को हमारा नमन है  ,

नमन है ,  नमन है  , नमन है  ||