मुस्कुराएगा
आज आईना बोला , क्यों फिक्र करती हो तुम ?
सारे काम तो सिर्फ , मुस्कानों के लिए करती हो तुम ,
तो उन्हीं कामों के बदले , मुस्कानें ही तो कमाईं तुमने ,
उन्हीं में डूब जाओ तुम , उन्हीं में खिल उठो तुम ||
रुको मत ,मुस्कुराती रहो , और कुछ बाँट भी दो ,
तभी तो सच्ची सी मुस्कानें , तुम्हारे होठों पे आएँगी ,
खिला लो सच्ची मुस्कानें , होठों पे सजा लो तुम ||
सभी के मुस्कुराने में , मुस्कुराओगी तुम ,
सभी के खिलखिलाने में , खिलखिलाओगी तुम ,
ये जग भी तो सारा , मुस्कानों से ही ,
मुस्कुराएगा , मुस्कुराएगा , मुस्कुराएगा ||