Wednesday, June 10, 2026

MAHAABHARAT GHAR - GHAR KII ( SAAMAAJIK )

 

                        महाभारत घर - घर  की 

 

महाभारत की कहानी पढ़ी जाती है  ,

इस कहानी पर नाटक और सीरियल बनते हैं  ,

मगर दोस्तों आज घर - घर की  ,

महाभारत को कोई नहीं समझता है   || 

 

ताकतवर घर का , सब कुछ छीन लेता है  ,

दूसरे को वह कुछ नहीं देना चाहता है  ,

जिम्मेदारी ताकतवर नहीं उठाता है  ,

दूसरे को थमा देता है   || 

 

जो जिम्मेदारी उठाता है,बेवकूफ,कमजोर कहलाता है  ,

और ताकतवर मौज उड़ाता है  , 

आज भी हर घर में  , महाभारत ही चलती है  ,

नाम अलग हैं , मगर कहानी वही है  || 

 

एक जिम्मेदारी उठाने वाले को ,

सारी की सारी जिम्मेदारियाँ  दे दी जाती हैं , 

वही भीष्म है , वही विदुर है , वही पांडव हैं  ,

सामने दुर्योधन , दुशासन , शकुनि विराजमान हैं  || 

 

कर्ण जैसा तो बहुत ही  बुरे  ,हालातों से पीड़ित है ,

माँ का त्यागा हुआ  जरूरत पड़ने पर , 

वही माँ उसे ,नया पाठ पढ़ाती है   ,

घरों में भी यही हाल है  ,

जरूरत पड़ने पर दो मीठे बोलों से ,

उसे ठग लिया जाता है दोस्तों   || 

 

BADALAA PRAKRITI KAA ( KSHANIKAA )

 

                        बदला प्रकृति का  

 

ईश्वर ने जब दुनिया बनाने की शुरुआत की  ,

तो एक बड़ी गूँज हुई  , जो ईश्वर के ,

पूरे कार्य को आगे बढ़ा गई  ,

जो मैटीरियल था , उसे फैला दिया  ,

इसे नाम मिला बिग बैंग  ( बड़ी गूँज  )  || 

 

बिग बैंग से उत्पन्न छोटे - बड़े टुकड़े  ,

चारों तरफ को सभी जा बिखरे  ,

बीच के टुकड़े के चारों और घूमें , 

गोल घूमते हुए सभी गोल हो गए   || 

 

धीरे - धीरे ये पिंडठंडे हुए  ,

बीच का गर्म पिंड  सभी को ऊर्जा देता रहा ,

 उन्हीं में से एक पिंड पर जीवन जन्मा ,

सभी जीव - जंतु , वनस्पतियाँ और मानव   || 

 

आज मानव विज्ञान के सहारे  ,

बहुत आगे बढ़ चला , मगर उसने ,

प्रकृति को तबाह कर दिया  ,

और उसी का बदला , प्रकृति मानव से  ,

लेती जा  रही है  ,

मानव को डुबाती जा रही है  ||  

Monday, June 8, 2026

MAISEJ ( KSHANIKAA )

 

                            मैसेज 

 

मोबाईल  फोन आने के बाद  ,

प्रायः सभी लोग अपने दोस्तों को ,

मैसेज भेजते रहते हैं  ,

मस्त - मस्त मैसेज मुस्कान दे जाते हैं   || 

 

कॉल करके बात करने से  , मैसेज सस्ते होते हैं  ,

पर अगर अर्थ गलत , कोई निकाल ले  , 

तो नींद उड़ा देते हैं , तनाव बढ़ाते हैं  ,

मगर ये मैसेज ही , मुस्कानें दे जाते हैं  || 

 

दोस्तों का प्यार , मिलता रहता है मैसेज से  , 

मैसेज लंबी दूरियों को , खत्म करके ,

दोस्तों को पास बुलाते हैं  , उनसे मुलाकात कराते हैं   ||  

Sunday, June 7, 2026

SANVAARO ( KSHANIKAA )

 

                            संवारो 

 

कुछ चाहतें  , कुछ इच्छाएँ , जिन्हें शौक कहते हैं  ,

हम शौक की लहरों के साथ , बह चले दोस्तों  ,

उस बहाव में जुड़ीं , मुस्कानें दोस्तों  ,

साथ ही जुड़ा तुम्हारा , साथ और प्यार दोस्तों  || 

 

शौक की लहरें , तो तेजी से बहती हैं  ,

उनके बहाव के साथ ही , अपनी भी गति बढ़ाओ दोस्तों ,

तभी तो साथ - साथ बह पाओगे  ,

और मुस्कुराहटों के साथ , जीवन बिताओगे दोस्तों  || 

 

तुम अपने शौक , किसके साथ जोड़ोगे दोस्तों  ?

इतनी सुंदर ये दुनिया है , प्रकृति है  ,

तो प्रकृति के साथ ही , जोड़ लो दोस्तों  ,

प्यार और प्यार कर लो , प्रकृति को दोस्तों  ,

संवारो और सुंदर बना लो , प्रकृति को दोस्तों    || 

 

Saturday, June 6, 2026

MEETHE GAANE ( GEET )

 

                              मीठे गाने  

 

कान्हा की बंसी की  , धुन जो पहुँची बरसाने   ,

राधा के कदम दौड़ चले  , यमुना के तट आने   || 

 

गोपियाँ भी सारी की सारी , पहुँची उनके पास  ,

ग्वाले भी आए सारे , शुरु हो गया रास  ,

बंसी और घुँघरु  , बाजे और संग नाचे   || 

 

ऐसा सुंदर रास हुआ  , सारे जग ने देखा   ,

सभी देख - देख कर मुस्काए  ,  रास के  ताने - बाने  ,

राधा संग अब नाचे कन्हाई  , जब शुरु  हो  गए गाने   || 

 

यमुना तट भी नाच उठा , सुनकर सारी आवाजें ,

यमुना जल की लहरें भी उछलीं  , सुनकर सारी आवाजें  ,

सारी दुनिया के जन , झूम उठे सुनकर ये मीठे गाने   || 

 

PYAAR HUAA ( PREM )

 

                           प्यार हुआ  

 

चमन में फूल जब महके , चमन से प्यार हुआ दोस्तों  ,

गगन में चंदा - तारे जब चमके ,गगन से प्यार हुआ दोस्तों  , 

बदरा से बरखा जब बरसी , बदरा से प्यार हुआ दोस्तों  || 

 

पर्वत शिखर से नदिया जब उतरी  , नदिया मैदान में आई ,

लंबा रास्ता पार कर  , नदिया समंदर में समाई , 

नदिया का जल था मीठा , मगर नदिया  ,

समंदर का जल ना मीठा कर पाई   || 

 

भोर में जब सूरज उदित हुआ , धरा चमक उठी  ,

धरा पर जीवन उगा  , जीव - जंतु जन्में ,

पेड़ - पौधे जन्में , उन पेड़ - पौधों से  ,

मानव ने सभी सुविधाएँ पाईं दोस्तों   || 

 

इन सब  हमें प्यार हुआ दोस्तों   ,

आप सब भी उनसे प्यार करो दोस्तों    ||  

 

Friday, June 5, 2026

ANOKHII CHAADAR ( CHANDRAMAA )

 

                          अनोखी चादर 

 

धरा का बना बिछौना  , कितना सुंदर है  ? 

लेटकर उस पर पाया हमने , प्यार धरती माँ का  ,

माँ की गोद में आई चैन की , नींद सुंदर सपने  ,

सपनों में घूमें हम  , सारी दुनिया   || 

 

ओढ़ लिया आसमान हमने  , चादर बना के  ,

शीतल चादर ओढ़ी जब हमने  , आई नींद चैन की  ,

सपनों की दुनिया में पहुँचे  , और दुनिया घूमे   || 

 

बीच रात में नींद खुली तो  , चादर में देखे हमने  ,

चाँद , तारे झिलमिल - झिलमिल करते  ,

दिल हमारा नाच उठा , दोस्तों खुशियों से  ,

होठों पे उतरीं मुस्कानें , चमक गईं आँखें   || 

 

काश जीवन का हर पल , ऐसे ही कटे दोस्तों  ,

दुआ है यह हमारी दोस्तों  ,

ईश इसे पूरा कर देना  , पूरा कर देना   ||