दास्तां
प्यार की दास्तां , तुम सुनो तो कहें ,
क्या करेगा सुन के जहां ?
तुम सुनो तो कहें ||
खिल गए हैं फूल चमन में ,
खुश्बुएँ फैल गईं हैं सहन में ,
खुश्बु को भर लो , अपनी साँसों में ,
महका लो तुम भी , अपनी साँसों को ,
मुस्कानें फैलेंगी तुम्हारी ||
दूजों को क्यों हम , अपनी दास्तां सुनाएँ ,
अपनों के प्यार में ही , हम डूब जाएँ ,
तुम सोच लो हमारी मजबूरियाँ ,
और अपनी दास्तां , दोस्तों को सुनाएँ ,
तभी तो मुस्कानें भी फैलेंगी ,
तो दोस्तों तुम भी , मुस्का लो साथ हमारे ||