हकीकत
जिंदगी की क्या हकीकत है यारों ?
कौन जाने इस राज को यारों ?
वैसे जानना तो हर कोई चाहता है ,
मगर उसे जानने की राह , उसे नहीं है पता ||
कोई जो राह पा जाता है ,
और हकीकत कुछ - कुछ जान जाता है ,
तो उसे जानकर परेशान हो जाता है ,
जिंदगी की हकीकत नहीं जान पाता ,
वह भी परेशान ही जिंदगी बिताता है ||
जिंदगी की हकीकत तो , कुछ सुख और दुःख है ,
उसको झेलकर जिंदगी सुकून से बिताना है ,
दोस्तों मेरे शब्द कुछ उलझन भरे हैं ,
सुलझा सको तो मुझे भी बताना दोस्तों ||