जगी मुस्कानें
शीतल सी बयार , कहाँ पर गई दोस्तों ?
चल रही थी पहले तो , अब कहाँ गई दोस्तों ?
होठों पर मुस्कान , ला रही थी पहले तो ,
कहाँ पर वो रुक गई दोस्तों ??
क्या किसी ने रोक लिया दोस्तों ?
क्या पिंजरे में कैद किया , उसको दोस्तों ?
चलो उसको छुड़ाते हैं दोस्तों ,
और उसके साथ हम भी , बहते जाते हैं दोस्तों ||
प्यारी सी वह बयार है ,
उसे भर लेते हैं साँसों में ,
सुकून का वह भंडार है ,
जीवन देती वह भरपूर है ,
चलो मुस्कानें जगा देते हैं दोस्तों ||