Wednesday, March 25, 2026

PRANAAM ( DESH )

 

                              प्रणाम 

 

जय - जय हे  , जय - जय मातृ भूमि  ,

तुम को  शत - शत प्रणाम  , शत - शत प्रणाम   || 

 

तुमने ही हमको पाला  पोसा , इतना बड़ा किया  ,

ये सारा जग , ये प्यारा जहां , तुमने हमको दिया  ,

शत - शत तुम्हें प्रणाम , शत - शत तुम्हें प्रणाम   || 

 

ये संसार दिखाया हमको  , आशीष हम पे बरसाया  ,

वही पाकर तो हमने  , सुखमय जीवन बिताया  ,

शत - शत तुम्हें नमन , शत - शत तुम्हें नमन  || 

 

भारत माता हो तुम अपनी , भारत भूमि हो तुम  ,

भारत वासी होने का , तुमने ही गौरव हमें दिया  ,

शत - शत तुम्हें प्रणाम  , शत - शत तुम्हें प्रणाम    ||  

 

Tuesday, March 24, 2026

KEEMAT PYAAR KII ( PREM )

 

                        कीमत प्यार की 

 

कीमत क्या होती है  , प्यार की दोस्तों  ?

प्यार जो दिल में  , पलता है दोस्तों  ,

दिमाग से तो प्यार , दूर  ही रहता है  ,

दिल ही है जो  , प्यार में धड़कता है   || 

 

प्यार एक भाव है  , जो दिमाग में नहीं उमड़ता  ,

ये भाव किसी के प्रति  ,  समर्पण है  ,

जो दिल का किसी को , अर्पण है  ,

दिल ही तो है जो  , प्यार में धड़कता है  || 

 

दिल में बसा लो  , प्यार को  दोस्तों  ,

कर दो दिल किसी को  ,  अर्पण दोस्तों  ,

पूरा करना अपना  , समर्पण दोस्तों  ,

दिल को धड़कनें दो  , प्यार में दोस्तों  ,

चुका  दो कीमत तुम  ,  प्यार  की  दोस्तों   ||  

 

Monday, March 23, 2026

RAKSHAK ( DESH )

 

                                  रक्षक 

 

हर समय में , हर परिस्थिति में , देश की रक्षा करने ,

कोई ना कोई तो , आगे को बढ़ता है  ,

वही है देश का रक्षक , जो रक्षा सबकी करता है  || 

 

हर रक्षक ना होता सीमा पर ,

हर रक्षक ना दुश्मन से लड़ता ,

अंदर रहकर जो देश को ,ईमानदारी से चलाए  ,

जो देशवासियों को , चैन की नींद दें ,

सारे देशवासियों का जीवन ,सुखमय बना दें   || 

 

देशवासियों के लिए , रोजमर्रा की सहूलियतें ,

अधिकार , जीवनोपयोगी सभी वस्तुएँ  ,

सभी आराम दिलाने में सहायता ,

सभी को बराबरी का और सम्मान पूर्ण जीवन  ,

दिलाने में सहायता करने वाले भी  ,

देश के रक्षक हैं  , देश के रक्षक हैं   || 

 

Sunday, March 22, 2026

MILL PAAEN ( KSHANIKAA )

 

                         मिल पाएँ 

 

जब तुम देते हो आवाज दोस्तों  ,

कदम दौड़ पड़ते हैं , तुम्हारी ओर दोस्तों  ,

ये प्यार है हमारे , दिलों का दोस्तों  ,

तभी तो मिलने को , तड़प उठते हैं दोस्तों  || 

 

मगर राहों में ,रुकावटें आती हैं दोस्तों ,

उन रुकावटों को दूर करके , 

ना तुम  पहुँच पाते हो दोस्तों  ,

ना ही हम पहुँच पाते हैं दोस्तों   || 

 

ईश्वर से यही प्रार्थना है दोस्तों  ,

सभी रुकावटें दूर हों हमारी राहों से ,

और हम आपस में मिल पाएँ दोस्तों  ,

हम आपस में मिल पाएँ दोस्तों   || 

 

Saturday, March 21, 2026

JODD KAR ( KSHANIKAA )

 

                        जोड़ कर 

 

अक्षरों ने जो दी आवाज  , हम भी आ गए  ,

अक्षरों को जोड़ - जोड़ कर , हमने शब्द बनाए  ,

उनका भी ज्ञान बढ़ा  दोस्तों , हमारा भी बढ़ा  दोस्तों  || 

 

शब्दों ने हमको घेरा  , और बोले हमसे  ,

हमको भी जोड़ो , और कुछ  करो  ,

हम भी मुस्काए  , शब्दों से गीत बनाए  दोस्तों   ||  

 

उन गीतों को लय और  , ताल  में बाँधा  ,

उन गीतों को गुनगुनाया  , जीवन मुस्कुराया  ,

तो मुस्कुराते चलो  ,  गुनगुनाते चलो दोस्तों   ||  

 

  

Friday, March 20, 2026

KURUKSHETRA ( AADHYAATMIK )

 

                      कुरुक्षेत्र 

 

हर जीवन एक कुरुक्षेत्र है दोस्तों ,

आमने - सामने खड़े सभी अपने हैं  ,

कोई दुश्मन नहीं है रणभूमि में ,

सभी एक ही रचनाकार की रचना  हैं   || 

 

मगर क्यों सब एक - दूसरे के सामने हैं  ?

क्यों एक - दूसरे के साथ नहीं हैं  ?

जिंदगी में नफरतें क्यों फैली हैं  ?

दिलों से प्यार कहाँ खो गया है   ?? 

 

किसने ये सब  राज  जानने की कोशिश की है  ?

किसने नफरतों को मिटाने की कोशिश की है   ?

किसने प्यार को बाँटने की कोशिश की  ?

कोशिश करके इस राज को जानने में लग जाओ दोस्तों  || 

 

क्या रचनाकार ने ऐसी दुनिया बनाई थी  ?

क्या कुरुक्षेत्र की रणभूमि , रचनाकार ने बनाई थी  ?

यदि उसने बनाई , तो क्यों बनाई  ?

यदि उसने नहीं बनाई , तो फिर किसने बनाई   ?? 

 

Thursday, March 19, 2026

VICHARON SEY HII ( KSHANIKAA )

 

                    विचारों से ही 

 

सुंदर से सुंदरतम तक , फूलों से चमन तक  ,

कदमों को बढ़ाते  जाओ दोस्तों  ,

रंगों से इंद्रधनुष तक , धरा से गगन तक  ,

रुको ना बढ़ते जाओ दोस्तों   || 

 

अधिक से अधिकतम तक , फूलों से महक तक ,

महक से महकते जाओ दोस्तों  ,

तितलियों की फर - फर तक  , बच्चों की दौड़ तक  ,

तुम भी दौड़ लगाते जाओ दोस्तों   || 

 

पहाड़ों की कंदराओं तक , नदिया के उद्गम से सागर तक  ,

तुम भी बहते जाओ दोस्तों ,

पंछियों के घोंसलों तक , पंछियों की ऊँची  उड़ान तक , 

कोशिश करके उड़ते जाओ दोस्तों  ,

पंखों से ना सही , विचारों से ही  दोस्तों   ||