दौड़ाया हमने
जीवन की लंबी राहों में ,
क्या खोया और क्या पाया हमने ?
कुछ प्यार मिला , तो कुछ नफरतें ,
सब को ही अपनाया हमने ||
देने वालों ने वही दिया ,
जो कुछ उनकी झोली में था ,
हमारे दिल में प्यार बसा , होठों पर मुस्कानें थीं ,
तो वही सब को बाँटा हमने ||
मिले प्यार को हमने दिल में बसाया ,
नफरत को भुला दिया हमने ,
प्यार तो बढ़ता गया हमारा ,
मुस्कानें होठों पे सजा लीं हमने ||
इस जीवन की धूप - छाँव में ,
सभी तो चलते जाते हैं ,
इस जीवन की टेढ़ी - मेढ़ी राहों में ,
स्वयं को दौड़ाया हमने ||