Wednesday, March 4, 2026

HEY RACHNAAKAAR ( AADHYAATMIK )

 

                     हे रचनाकार 

 

दुनिया के दुःख , दर्दों को दूर कर देना  ,

सभी के आँचल में  , सुख भर देना  ,

सुन रचना करने वाले  , संसार चलाने वाले   || 

 

मानव गलतियों का पुतला है  ,

सिर्फ अपना सुख ही चाहता है  ,

तुम उसकी बुद्धि को , कर दो विकसित  ,

सुन रचना करने वाले  , संसार चलाने वाले   || 

 

मानव खुद ना समझेगा , 

उसको समझाना पड़ेगा , हे रचनाकार  ,

जब मानव समझ जाएगा  ,

तभी तो वह इंसान कहलाएगा  ,

और दुनिया को सुंदर बना लेगा   || 

 

Tuesday, March 3, 2026

FAAG ( PREM )

 

                           फाग 

 

राधा करे है , इंतजार कान्हा का ,

होरी का दिन है , कान्हा कहाँ गया री सखि  ?

कोई ना जाने , कान्हा कहाँ है   ?

कोई तो साथ दे , उसे ढूँढने में   || 

 

पल - पल बीता जा रहा  ,

सारे ग्वाले रंग उड़ा रहे  ,

गोपियाँ भी ढूँढ रहीं कान्हा को  ,

राधा पुकार -  पुकार ,बुला रही कान्हा को   || 

 

कहाँ छिपे हो कन्हाई  ?

आ जाओ , आ भी जाओ बरसाने में  ,

होरी का ये दिन कन्हाई  ,

सूखा , बेरंग ना बीत जाए   ||  

 

तभी कान्हा और ,ग्वालों की टोली  ,

दौड़ती हुई आई , अब तो  ,

राधा और गोपियों की टोली भी  ,

उनके सामने थी  , खूब  रंग बरसा  ,

और फाग खेला गया , फाग खेला गया  || 

 

Monday, March 2, 2026

JAHAAN PEY ( CHANDRAMAA )

 

                                     जहाँ पे 

 

जहाँ पे चाँद रहता है  ,वहाँ जाने के लिए ,

सीढ़ी तो लगा लो यारों  ,

आसमान में छेद करने के लिए  ,

ताकत से एक पत्थर तो उछालो यारों   || 

 

जब जाओगे चाँद पर तुम  ,

चंदनिया अपने झोले में भर लो यारों  ,

ला कर उसे अपने साथ में  , 

धरा को उस से चमका लो यारों   || 

 

चाँद है इस धरा का दोस्त  , चमकता आसमान में यारों ,

मुस्कानें उसकी हैं नशीली ,तुम भी थोड़ा नशा कर लो यारों  ||  

 

धरा भी दोस्त है चंदा की , प्यार करती है उसी से यारों  ,

दोनों की दोस्ती को तो , तुम और बढ़ा लो यारों   || 

 

धरा पे हम सभी रहते हैं  , मगर चंदा भी दोस्त है  ,

चंदा की दोस्ती को तुम  , ऊँचाई पे चढ़ा लो यारों   ||  

 

Sunday, March 1, 2026

MADDHAM ( JALAD AA )

 

                         मद्धम  

 

पवन तू मद्धम - मद्धम चल  ,

मेरा हाथ थाम के पवना , मुझको भी ले चल  ,

पवन तू मद्धम - मद्धम  चल   || 

 

गगना के फैले अँगना में , उड़ान बदरा की होगी  ,

तभी तो धरती की तपन मिटेगी  ,

इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल   || 

 

बदरा तो जल की खान , देती बरखा का दान  ,

तभी तो धरा की प्यास बुझेगी  ,

इसीलिए तो , पवन तू मद्धम - मद्धम चल   || 

 

 बदरा की सखि है दामिनी  , छेड़ेगी जब वो रागिनी  ,

तभी तो धरा की तलैया भरेगी  ,

इसीलिए तो  , पवन तू मद्धम - मद्धम चल  ,

मेरा हाथ थाम के पवना  , मुझको भी ले चल   || 

 

Saturday, February 28, 2026

LAHAREN ( RATNAAKAR )

 

                                रत्नाकर 

 

सागर ने दी आवाज  , लो सागर मैं आ गई  ,

लहरें अपनी चंचलता लेकर , सागर तट पार कर गईं ,

सागर उन्हें रोकता रहा , मगर कौन रोक पाया है   ?

उन चंचला लहरों को , जो दौड़ती , खेलती रहीं  || 

 

लहरों ने हाथ थामा , एक - दूजे की ओर दौड़ पड़ीं  ,

सागर की आवाज और उसकी , पाबंदी भी उन्हें रोक ना पाई ,

उन चंचला लहरों को , कौन बाँध पाया हैं  ?

वो तो आजाद हैं  , वो तो आजाद हैं   || 

 

शक्तिशाली सागर अपनी ही , लहरों से मानो हार गया  ,

सागर तो तट बंध को , तोड़ नहीं सकता  ,

मगर लहरें तो उछलती - कूदती , दौड़ती जाती हैं  ,

तट बंध को पार  कर जाती हैं  , और खिलखिलाती हैं   || 

 

Friday, February 27, 2026

FAAYADAA ( KSHANIKAA )

 

                             फायदा 

 

एक राह जो पकड़ी हमने , सच और ईमान की ,

मगर बेईमान दुनिया में , उसका क्या फायदा   ??

 

उस राह में चले हम अकेले , आगे - पीछे कोई नहीं ,

अगर कोई दूसरा भी होता , तो क्या फायदा  ?? 

 

जिंदगी तो मिली जो हमको  ,छोटी सी है ,

अगर लंबी भी मिलती , तो उसका क्या फायदा  ?? 

 

कभी ना चाहे हमने , जिंदगी में सारे सुख  ,

दुःख भी साथ ना हो , तो सुख का क्या फायदा  ?? 

 

अपनी उसी राह पर , हम चलते जाएँगे  ,

चाहे कोई भी हो कायदा  ,

चाहे कुछ फायदा हो , या ना हो फायदा   || 

 

Thursday, February 26, 2026

SAAT KII MAHIMAA ( KSHANIKAA )

 

                    सात की महिमा 

 

सात रंग आकाश में , जब मिल जाएँ  ,

तब इंद्रधनुष बन जाता है  ,

सात दिन हाथ पकड़ , जब चलते जाएँ  ,

तब एक सप्ताह बन जाता है   || 

 

संगीत के सात स्वर  , कानों में रस घोलें  ,

सरगम ये कहलाती है ,

सात कदम साथ चलते हुए , जीवन में सुख लाएँ  ,

ये सप्तपदी कहलाती है   || 

 

सात समंदर पार करने की  , तमन्ना सभी की ,

दुनिया के दूसरे छोर पर  , जाने की तमन्ना सभी की ,

सुंदर होगा सब कुछ  , जो इस जन्म में पूरी हो जाए   || 

 

साथ - साथ मिलकर जब , जन्मों जन्म बिताएँ ,

वो जन्म तो सातों जन्म  बन  जाए , 

यही तो जीवन है  जानम , जो सात जन्म का बन जाए   || 

 

 सातवें आसमान पर ही , परमात्मा रहता   ,

ये बात तो सभी हैं जानते और मानते  ,

सभी उस सातवें आसमान में जाकर  ,

उस परमात्मा से मिलना चाहते हैं   ||