विश्वास
मानव जब यह सोचता , सब कुछ मानव करता है ,
तब तो दोस्तों संघर्ष से , सब कुछ चलता है ,
मानव के हर कदम से , बनने से अधिक बिगड़ता है ,
और इसी रास्ते में , मानव तनाव में डूबता है ||
पर जब मानव ने सोचा , ईश्वर सब कुछ करता है ,
तब हुआ दूर तनाव , और भरोसा बढ़ता गया है ,
ईश्वर पर इस भरोसे ने , मानव का विश्वास बढ़ाया है ,
और रात भर मानव फिर , चैन की नींद में सोता है ||
तो मानव भरोसा कर , उस रचनाकार पर ,
उसी ने ये ब्रह्मांड बनाया , उसी ने पृथ्वी पर जीवन जगाया ,
तू तो एक कठपुतली है , जिसकी डोर रचनाकार के हाथ में है ,
विश्वास कर उसी पर , मानव विश्वास कर उसी पर ||