Monday, July 27, 2026

VISHESH ( JIVAN )

 

                                    विशेष 

 

जिंदगी ने जो समय दिया हमें  ,

लंबा समय तो बीत गया  ,

अब बचा शेष समय , हमें सुंदर बनाना है  ,

इसका अर्थ है उसको , विशेष बनाना है  , 

जिससे बचा समय सुगम ,

 सुंदर  और  मनमोहक बन जाए  || 

 

बीता समय सुंदरता से बीता ,  

फूलों की महक से भरा रहा , आगे भी महकेगा  ,

होठों पर मुस्कान जगी रहेगी  ,

यही हमारी दौलत है  

Sunday, July 26, 2026

THAHAAKE ( KSHANIKAA )

 

                            ठहाके  

 

वो दिन कुछ कितने सुंदर थे  ? जब हम बच्चे थे दोस्तों  ,

ना मोबाईल , ना टी .वी .  , ना कम्प्यूटर थे दोस्तों  ,

 दोस्तों के साथ मिलकर  , खेलते थे हम दोस्तों  ,

फोन करके नहीं बुलाते थे  , आवाज दे कर बुलाते दोस्तों   || 

 

रात को छत पर साथ - साथ सोते थे  , गगना की छाँव में  ,

चाँद - तारों को देखते हुए , बातें करते हुए सोते थे दोस्तों  ,

मुस्कानों के बीच में , खिलखिलाहटें भी सजती थीं दोस्तों ,

बिना फोटो लिए ही ये यादें , जीवन भर मुस्कानें देंगी दोस्तों  || 

 

क्या गुल्ली - डंडे या कंचों की , फोटो ली गई दोस्तों  ,

मगर नाम लेते ही , चलचित्र के समान फ्लैश बैक आ जाता है  , 

लुका - छिपी और आईस - पाईस  खेलते हुए , डैन आने पर ,

सबके छिपने पर , हम तो घर जाकर बैठते  थे दोस्तों  ,

इंतजार के बाद सभी दोस्त , हमें ढूँढते हुए आते  ,

और ठहाके गूँज उठते दोस्तों   || 

 

Saturday, July 25, 2026

CHAIN KII NIIND ( KSHANIKAA )

 

                              चैन की नींद 

 

जीवन में जो मोड़ आते हैं  , कुछ को वक्त लाता है  ,

कुछ किस्मत में होते हैं  , कुछ को हालात लाता  है  ,

सभी मोड़ सबक सिखाते हैं  , वक्त बीत जाता है   ,

यादें रह जाती हैं  , वक्त लौट नहीं पाता   है  || 

 

कर्म करते हुए , हम सोचते हैं दोस्तों  ,

ये कर्म हमने किया , करने के बाद हम सोचते हैं  ,

ये कर्म अच्छा है या बुरा  , और उलझन में पड़ते हैं  ,

पर क्या हम जानते हैं  , रचेता ही हमसे कर्म कराता है   || 

 

और जब हमें समझ आता है ,

कि रचेता ने हमसे कर्म कराया है  ,

तो उलझन सुलझ जाती है  ,

रचेता ही चैन दिलाता है  , चैन की नींद सुलाता है   || 

 

Friday, July 24, 2026

SHAAYAD ( KSHANIKAA )

 

                           शायद 

 

भीड़ में लोग तो मिलते हैं  , मगर क्या अपने हैं वो  ?

सभी आपसी बातों में लगे रहते हैं , शोर का हिस्सा हैं  ,

वो सब बातें  , क्या तुम समझ पाते हो   ?? 

 

क्या तुम्हें उनकी बातों में  , अपनापन महसूस होता है   ?

नहीं ना  ! तो फिर वो तुम्हारे अपने नहीं हैं   ,

आपसी बातों में वक्त बिताकर  , सब वापिस जाते हैं  || 

 

अरे , दोस्तों देखो , दो लोग रुके हैं  , शायद वो अपने हैं  ,

उनकी  मुस्कान ,  उनका व्यवहार तो सुंदर है  ,

शायद वही तुम्हारे अपने हैं  ,

और उन्हें तुम्हारी फिक्र है  || 

 

आओ - आओ , दोस्ती करते हैं उनसे  ,

मुस्कानें बाँटते हैं उनसे , आओ नए दोस्त हैं तुम्हारे  ,

मुस्कुराओ , खिलखिलाओ हमारे साथ   || 

 

Thursday, July 23, 2026

PRAJAATIYAAN ( KSHANIKAA )

 

                                 प्रजातियाँ 

 

दुनिया में मानव हैं  , जीव - जंतु हैं  , 

प्रकृति है  ---- 

पेड़ - पौधे , पहाड़ , नदियाँ , झरने , समंदर हैं ,

ये  सब तो सभी जानते हैं  दोस्तों   || 

 

जरा तांत्रिकों  से पूछो दोस्तों और कौन हैं  ?

परी हैं ,भूत हैं  , पिशाच हैं  , राक्षस हैं  , चुड़ैल हैं  ,

ये सब आपने देखे हैं क्या  ?

अगर देखे हों , तो हमें भी दिखाना या बताना ,

हमने कहानियाँ पढ़ी हैं दोस्तों   || 

 

ये अलग तरह की प्रजातियाँ ,

हम तो देख नहीं सकते , 

अगर देख लें , तो पहचान नहीं सकते  ,

इन्हें तो तांत्रिक ही , देख और पहचान सकते हैं   || 

 

हमें इन प्रजातियों के बारे में  ,

कुछ भी ज्ञान नहीं है दोस्तों  ,

तो अब लिखना बंद करती हूँ  ,

ठीक है ना दोस्तों  , विदा दोस्तों   || 

 

 

Wednesday, July 22, 2026

BHAAGYA - KARM ( KSHANIKAA )

 

                              भाग्य  - कर्म  

 

जो हमने भाग्य से पाया दोस्तों  , वह जीवन नहीं  ,

एक उपहार है , उस रचेता का  ,

जीवन तो वह है दोस्तों  , जो हमने अपने कर्मों से पाया है  ,

अपने कर्मों से बनाया है  , कर्म ही जीवन को बनाते हैं   || 

 

कर्म वही करो दोस्तों जो  , तुम्हारे और  ,

तुम्हारे अपनों के लिए , लाभकारी हों  ,

जो सबके दिल और दिमाग को शांति  दें  ,

जो सबके होठों पर , मुस्कानें सजा दें   || 

 

आओ   दोस्तों    थामो हाथ , अपने दोस्तों का  ,

और कर्म करने की  , लिस्ट बनाकर ,

आगे बढ़ो , कर्म करो  ,

और जीवन को सुंदर बना लो दोस्तों  ||  

 

 

Tuesday, July 21, 2026

MANJIL ( KSHANIKAA )

 

                                 मंजिल 

 

जीवन की राह पर कदम बढ़ाने  ,

पर मोड़ जो आते हैं  ,

पहला मोड़ हम पूरा कर लेते हैं  ,

होठों पर मुस्कान लिए  ,

आगे का मोड़ हम , खुद लेते हैं या नहीं  ?

कई बार वह मोड़  , वक्त ही ले आता है  || 

 

ये मोड़ हमें बहुत , कुछ सिखा जाते हैं  ,

कभी - कभी हालात ही  , मोड़ पार करना सिखाते हैं  ,

कई बार मंजिल भी , मोड़ में बदलाव लाती है  ,

अगर मंजिल बदल जाए  , तो मोड़ भी बदलेंगे  ,

इसलिए पहले मंजिल को निर्धारित करो  ,

तभी मोड़ भी उसी  अनुसार होंगे   ,

और सरलता से , तुम्हें मोड़ पार कराएँगे  ||