परछाईं
हमारी परछाईं , हरदम हमारे साथ चलती है ,
कोई और नहीं हमारे साथ , ना दोस्त , ना घरवाले ,
मगर परछाईं हमारा , पीछा नहीं छोड़ती है ||
एक दिन हमने परछाईं से , पूछ ही लिया दोस्तों ,
तुम क्यों हमारे साथ चलती जाती हो , क्या तुम दोस्त हो ?
नहीं ! परछाईं ने कहा ,
क्या तुम मेरी रिश्तेदार हो ? मैंने कहा ,
नहीं ! परछाईं ने कहा ,
तो क्यों मेरा पीछा करती हो ? मैंने कहा ||
मैं तो तुमसे ही जुड़ी हूँ ,
बताओ और कौन है ?
जो तुमसे जुड़ा है ? तुम्हारे साथ रहता है ?
दोस्तों उसने सच कहा , कोई नहीं है अपना ,
परछाईं ही तो अपनी है ||