Saturday, September 12, 2026

BHAAV ( PREM )


                             भाव 


राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने ,

बहुत सुंदर भावों को , व्यक्त किया अपनी लेखनी से  ,

" जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमें रसधार नहीं ,

वह ह्रदय नहीं है पत्थर है  , जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं "|| 


दोस्तों ह्रदय को ह्रदय , बनाए रखना है तो  ,

ह्रदय में भावों का , समावेश होना जरूरी है  || 


ईश्वर के लिए   ------ ,

एक भक्तिभाव जरूरी है  ,

ईश्वर के लिखे विधान के लिए  ,

ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास ,

जो कुछ ईश्वर ने हमें दिया , उसके लिए  ,

समर्पण और धन्यवाद जरूरी है   || 


अपने देश के लिए   -------  ,

प्यार के सम्मान के भाव जरूरी हैं  ,

देश की धरा , प्रकृति ,पहाड़ ,नदियाँ ,समंदर ,

हर  स्थान , हर मानव से प्यार जरूरी है   || 


अपनों के लिए   -------- ,

अपनों के प्यार के लिए  ,

अपनों के दिए सम्मान और भरोसे के लिए  ,

उनके प्रति आदर ,प्यार और विश्वास जरूरी है  || 


ये भाव जब दिल को भर देंगे ,

तो दिल में सभी के लिए ,

प्यार ही उत्पन्न होता है  ,

विश्व में सभी के लिए  ,

प्यार और सम्मान का भाव जरूरी है  ,

समझो दोस्तों  ---  विश्व बंधुत्व जरूरी है   || 



Friday, September 11, 2026

DHEERE - DHEERE ( PREM )

                             धीरे - धीरे 


बदलोगे जो खुद को , तो रंग जमा लोगे  ,
जहां की मुसीबतों से , पीछा छुड़ा लोगे  ,
कोई कुछ भी बोले बंद तुम , कान कर लोगे ,
अपने दिल की बातें दिल में ,ही छुपा लोगे    || 


दुनिया वालों का तो काम है , कुछ भी कहना ,
तब अपने कानों में तुम , थोड़ी सी रुई रखना  ,
फिर मजे से तुम दोस्तों , मुस्कुराते रहना ,
तभी तो तुम मजे से , जीवन बिता लोगे   || 


दोस्तों ये जिंदगी तुम्हारी है  , मत भूलो यह बात  ,
दिन के बाद आती है  , हमेशा रात  ,
चैन की नींद सो जाओगे  , बीतेगी  रात  ,
सुबह को उठो तो खूब  ,  खिलखिला लोगे   || 


बगीचे की घास  पर चलो  , नंगे पैर धीरे - धीरे  ,
मानो चल रहे हो तुम ,नदिया के तीरे ,
समेटो  फूलों की महक अपनी  , साँसों में धीरे - धीरे  ,
फूलों पे जमी ओस की बूँदें , होठों पे तुम समेट लोगे   || 

HAMARAA BAGEECHAA ( JIVAN )


                        हमारा बगीचा  


एक दिन था दोस्तों  , बहुत समय पहले  ,

दुनिया वालों के बगीचे में , देख खिलते फूल ,

मगर ना हमारे पास थी , भूमि कि खिलते फूल   || 


सोच - सोच कर हमने , एक सोच ली चुन  ,

उसे कार्यान्वित करने को , नई सोच ली बुन  ,

उसकी विधि को हमारे , दिल ने ली सुन   || 


लाए हम गमले , मिट्टी  और खाद ,

गमलों को हमने , अपनी छत पर जमाया  ,

मिट्टी और खाद मिला , गमलों को सजाया ,

अब पौधों और बीजों को मिट्टी में जमाया   || 


एक सप्ताह बीतते , अंकुरण शुरु हो गया  ,

कुछ पौधे जो लगाए थे , उनका बढ़ना शुरु हुआ  ,

करीब 15 - 20 दिनों में , उम्मीद के फूल खिले  ,

और कुछ समय बाद  , हमारा बगीचा शुरु हुआ  ,

हमारा सपना पूरा हुआ  , बगीचा खिल गया   || 

 

Thursday, September 10, 2026

DIL MEIN MAHAK ( JIVAN )


                           दिल में महक 


प्यार बाँटते चलो , प्यार बाँटते चलो  ,

मुस्कानें भर लो झोली में , सभी में बाँटते चलो  ,

रिमझिम सी बरखा आई , तो दिल बोला ,

ये रिमझिम भर लो दिल में , अँगना लो भिगोते चलो  || 


कलियाँ जब चटखीं , फूल खिले , तो उनकी महक से ,

सारे जहां को , महकाते चलो दोस्तों   || 


मुस्कानों के बाँटने से , सभी तो मुस्काए  ,

रिमझिम बरखा से तो दोस्तों , समंदर लहराए  ,

लहरें उनकी नाचीं  , समंदर मुस्काए  ,

फूलों की महक से तो , चमन सारे महके  ,

जहां महका और  , दिल में महक समाए  || 


Tuesday, September 8, 2026

ROSHAN - PUNJ ( JIVAN )

         

                      रोशन पुंज 


गगना में चमका , रोशन - पुंज सूर्य  ,

धरा का सारा संसार , रोशन हो उठा ,

जाग गए सभी जीव - जंतु , चेहरा खिल उठा  ,

चहल - पहल मच गयी  , वातावरण खुल उठा   || 


परिंदे चहक उठे  , उनकी चहक से ,

वातावरण गुंजायमान हो उठा  ,

कलियाँ खिल कर , फूल बन गईं  ,

जिनकी महक से , चमन महक उठा   || 


तितलियाँ जब  , उड़ीं फर - फर  ,

बच्चों की किलकारियाों से  , 

चमन मुखरित हो उठा  ,

सभी देखने वालों के दिल  ,

और होठों पर , मुस्कानें जग उठीं   || 


Monday, September 7, 2026

BACHPAN SEY ( PREM )


                         बचपन से 


चल , चल री लेखनी  , शब्दों को तू सजा दे  ,

सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे  ,

मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे   || 


तू ही मेरी प्यारी लेखनी  , शब्दों को सजाने वाली  ,

तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली  ,

रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली   || 


चल , चल री लेखनी  , दिल में खुशियाँ भर दे  ,

तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे  ,

उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली   || 


Sunday, September 6, 2026

SAMAAN ( PREM )

  

                                समां 


होठों पे मुस्कान सजा लो ,

दिल से मलाल निकालो  ,

महफिल में तभी तो रंग खिलेगा  ,

पैरों को थोड़ा थिरका लो ,

कदमों को ना लड़खड़ाओ ,

महफ़िल में तभी तो रंग भरेगा   || 


दिल ही दिल में मत ,

गीत गुनगुनाओ  ,

थोड़ी तो तान सजाओ  ,

संगीत संग शब्दों को  ,

तुम गुनगुनाओ ,

महफिल में हर कोई  , गुनगुनाएगा  || 


ऐसा तभी तो होगा दोस्त  ,

जब सभी मुस्काएँगे  ,

मुस्कुराहटें फैलाएँगे ,

जिंदगी पूरी ही खिल जाएगी दोस्त मेरे  ,

महफिल में तभी  तो  समां बँधेगा  ||