Saturday, September 19, 2026

AASHEESH ( AADHYAATMIK )


                       आशीष 


आओ बप्पा आओ ना ,

मंगल तिलक लगवाओ ना ,

मैंने मोदक बहुत बनाए  ,

रुचि - रुचि भोग लगाओ ना  || 


पूजा , अर्चना की विधि मैं ना जानूँ ,

तुम ही मुझको समझाओ ना  ,

ऐसी अनगढ़ भक्तिन को ,

तुम ही बप्पा अपनाओ ना   || 


तुम ही सारे जग के रखवाले ,

सबको सद्बुद्धि और ज्ञान देने वाले ,

कुछ तो ज्ञान , मेरे प्यारे बप्पा ,

मुझको भी दे जाओ ना   || 


आओ बप्पा आओ ना ,

अपना आशीष हम पे बरसाओ ना  ,

बप्पा प्यार और आशीष बरसाओ ना   || 


Friday, September 18, 2026

SAADII MEIN NAARII ( PREM )


                        साड़ी में नारी  


ये है साड़ी दोस्तों  , रंग - बिरंगी  साड़ी  ,

भारतीय नारी की शान है , ये सुंदर साड़ी  ,

नारी साढ़े पाँच फ़ीट की , और छः गज की साड़ी  ,

नारी का रूप है निखरता , जब लिपटे उस पर साड़ी  || 


बहुत सी पोशाकें भारत में , जो पहने है नारी  ,

मगर सौंदर्य की प्रतिमा लगती  , जब पहने वह साड़ी  ,

साड़ी से मैचिंग अन्य कपड़े , जेवरात ,

श्रृंगार का सामान , सजाते सब ही नारी   || 


सबसे सुंदर , सबसे सुंदर , जग में नारी और साड़ी  ,

मुस्कानें और प्यार झलकता है  , जब हम देखें नारी और  साड़ी ,

जीवन सुंदरता से भर जाता , देख नारी और साड़ी  ,

तो दोस्तों मुस्का लो खूब  , देख नारी और साड़ी  || 


Thursday, September 17, 2026

TEEN SAHELIYAN ( PREM )


                      तीन सहेलियाँ 


तीन सहेलियाँ हैं दोस्तों  , सोच , मुस्कान और चमक ,

तीनों की दोस्ती गहरी है  दोस्तों ,

सब उभरीं दिल - दिमाग में  || 


सोच मीठी थी  , तो होठों पे मुस्कान खिली  ,

आँखों में चमक जगी   || 


सोच कड़वी थी  , तो होठों की मुस्कान मिटी  ,

आँखों की चमक खोई   || 


सोच प्यार की थी , तो होठ गुनगुनाए ,

आँखों ने नृत्य किया  || 


सोच तीखी सी थी  , होठों ने आह भरी  ,

आँखों में नमी छाई   || 


सोच हास्य की थी  , होंठ खिलखिलाए  ,

आँखों में मस्ती छाई   || 


तीनों   सहेलियाँ  हर रंग में  ,

सुंदर लगीं दोस्तों   ,  बहुत सुंदर  लगीं   || 


Wednesday, September 16, 2026

MELAA SHABDON KAA ( JIVAN )


                            मेला शब्दों का 


एक हाथ लंबी कलम से  , उकेरा जाता ,

मीलों तक लंबा समूह , शब्दों का  ,

एक मुट्ठी जितने बड़े , दिल से  ,

निकलता जाता मीलों लंबा समूह , शब्दों  का  ||  


उनमें कुछ शब्द हँसते , मुस्कुराते  ,

और कुछ शब्द गाते  ,  गुनगुनाते  ,

इन्हीं मुस्कुराहटों और , गुनगुनाहटों  के साथ  ,

एक बड़ा मेला लगा उन , शब्दों का   || 


आँखों की चमक जैसे  , चमकते शब्द   ,

आँखों के अश्रुओं जैसे  , बिखरते शब्द  ,

उन आँखों की चमक और  , अश्रुओं से  ,

एक बड़ा मेला लगा उन  , शब्दों  का  ,

आइए दोस्तों  , इस मेले में शब्दों के   || 


Tuesday, September 15, 2026

SAPNEY ( JIVAN )


                          सपने 


सपने हैं सपने , बिल्कुल ही अपने  ,
नींद में ही होठों पर , लाते मुस्कानें  ,
नहीं कोई मेहनत , करवाते सपने  ,
दिन में भी , सोच - सोच लाते मुस्कानें   || 


गुपचुप - गुपचुप , आते हैं सपने  ,
बिना कीमत हम , पाते हैं सपने  ,
बिना किराया दिए , जाते हैं घूमने  ,
नई - नई जगहों को देखने ,
नए - नए लोगों से मिलने   || 


बिना संदेसे आते ,  हमारे सपने  ,
हमारे दोस्तों को , साथ में लाते सपने  ,
हँसी खूब बरसाते हैं सपने  ,
झर - झर - झर , झरवाते  झरने  ,
देखा कितने , मीठे - मीठे हैं सपने  ?
पलकों में बस जाते हैं सपने   || 

Monday, September 14, 2026

ANKHIYAN ( PREM )


                                अँखियाँ 


अँखियों री अँखियों , मेरी प्यारी सखियों  ,

सारी दुनिया तुम ही दिखातीं  ,

सभी रंगों का अहसास दिलातीं  || 


नींद आने पर , रात्रि के पहर में ,

तुम तो बंद हो जातीं   ,

मगर रात भर तुम मुझको  ,

सुंदर स्वप्न दिखाती जातीं  || 


स्वप्न दिखाते - दिखाते तुम  ,

सारी दुनिया की सैर करातीं  ,

जो जगहें हमने ना देखी हों  ,

उनकी भी तुम तो सैर करातीं   || 


प्यारी सखियों , मेरी अँखियों  , 

जीवन के आकाश में तुम , 

इंद्रधनुष भी सजा जातीं  ,

वह इंद्रधनुष , जिससे तुम , 

हमें क्या ,आकाश को भी रंग जातीं    ?? 


Sunday, September 13, 2026

VIDHAAN VIDHI KAA ( AADHYAATMIK )


                       विधान विधि का 


विधि का विधान ही तो  , संसार को चलाता है  ,

हर किसी के लिए , नियम बने होते हैं  ,

कोई भी तो  , इस नियम से परे नहीं होता है   || 


स्वयं परमात्मा भी तो , इसी से बँधे होते हैं  ,

जो कुछ विधान में लिखा होता है , 

वही उन्हें भी अपनाना होता है   || 


गजानन का जन्म ही , विधि विधान से ही हुआ है ,

कान्हा भी इसी कारण , राधा से दूर रहे ,

राम ने भी इसी कारण , सीता को त्याग कर वन भेजा  ,

मानव योनि में रहकर , मानव जीवन बिताया   || 


विष्णु , शिव सभी बँधे ,विधि की डोर में ,

कोई भी अपने मन की , नहीं  कर सका था  ,

तो हम क्या कर सकते हैं दोस्तों   ??