Sunday, February 8, 2026

KHILAA MAN ( KSHANIKAA )

 

                          खिला मन  

 

शब्द मिलें शब्दों से , तो गीत बन जाता है  ,

सुर मिलें सुरों से , तो संगीत बन जाता है  ,

गीत और संगीत के मिलने से  , राग बन जाता है  ,

जो दिल में बस जाता है , मुस्कान बन जाता है   || 

 

मुस्कान उतरे होठों पर , तो चेहरा भी सज जाता है  ,

चेहरे के सजते ही , आँखों में चमक आती है  ,

उसी चमक से तो , ये दुनिया चमक जाती है   || 

 

दुनिया के चमकने से ही  ,मन भी खिल उठता है  ,

तभी तो चमन के फूल भी खिल जाते हैं  ,

फूलों के खिलने से , पूरा चमन महक उठता है  ,

हर चमन की खुश्बुओं  से , ये जग महक उठता है   ||  

 

Saturday, February 7, 2026

MUSKURAAHATEN ( KSHANIKAA )

 

                            मुस्कुराहटें 

 

अपनी मुस्कुराहटों में से  ,  कुछ मुस्कुराहटें ,

दूसरों में बाँट कर  , उनकी मुस्कानें सजा दो  ,

जग में सभी की मुस्कानें  , खिलखिलाएँगी   || 

 

फूल बाँटने वालों के हाथों में  ,

फूलों की महक बस जाती है   ,

ऐसे ही मुस्कानें बाँटने वालों के  ,

चेहरे पर मुस्कानें जगमगाएँगी   || 

 

इस जीवन  में आपने , कितनी मुस्कानें बाँटी  ?

कान्हा जी सब देख रहे हैं  ,

उसी का फल तो कान्हा जी  ,

आपको भरपूर देंगे दोस्तों   ||  

 

Friday, February 6, 2026

EK - DOOJE SE ( CHANDRAMAA )

 

                              एक - दूजे से  

 

चलती हुई पवन है , शांत और शीतल  ,

यही पवन तो  , उड़ा ले जाएगी हमें  ,

ले चल पवन हमें ऊपर , गगन के प्रांगण में ,

जहाँ चाँद रहता है  , हम चाहते हैं पवन  ,

हम वहाँ जाएँ  , चाँद से दो बातें कर आएँ    || 

 

मेरी पवन , प्यारी पवन ,तेरा बहुत उपकार होगा  ,

जो हमें उड़ाएगी ,बहुत दूर  ले  जाएगी   ,

आजा - आजा ले चल ,हमें अपने साथ  ,

अपने पंखों के सहारे  ,  ले  चल  हमें उड़ाकर  || 

 

चाँद भी तो अकेला है , गगना के प्रांगण में  ,

उसे भी दोस्त मिल जाएँगे  , हमारे वहाँ जाने से  ,

तुम्हारा साथ भी होगा पवन  , सभी दोस्त मिल कर  ,

मुस्कानें बाँटेंगे , एक - दूजे से  ,एक - दूजे से  || 

 

Thursday, February 5, 2026

BECHAIN ( AADHYAATMIK )

 

                              बेचैन 

 

ऊपर आसमान में रहने वाले से ,

दुनिया बनाने वाले से , पूछा एक दिन  ,

जवाब मिला हमें ---- क्यों तू है सुनती ,सारी बातें जहां की ? 

दो कान दिए हैं मैंने , एक से सुन , दूसरे से  निकाल  ,

सारे जहां की बातें , दिल में तू मत रख  ||  

 

जो तुझे नहीं समझते अपना , तू भी ना समझ उन्हें अपना  ,

जो प्यार ना करें तुझे  ,तू भी ना डूब प्यार में उनके लिए  ,

छोड़ उनका हाथ और दूर तू निकल   || 

 

संसार में रंगों का खजाना है , तू भी कुछ चुन  ,

इंद्रधनुष बना कर , आँखों में  तू बसा ले  ,

अपना जहां सजा ले  ,अपना जहां सजा ले   || 

 

और जीवन अपना , मुस्कानों में डुबा ले  ,

राहें सुंदर कर ले  , उन पर कदम बढ़ा ले  ,

अपनी मंजिल पा ले , जीवन नया बना ले   || 

  

Wednesday, February 4, 2026

NASHEELII BARAKHAA ( JALAD AA )

 

                             नशीली बरखा 

 

जिंदगी आज भीग गई बरखा में ,

ये बरखा कैसे छिपी थी , बरखा के आँचल में  ?

बरस गई रिमझिम बन के , आज मेरे आँगन  में  ,

उसी ने भिगो दिया मेरा आँचल   || 

 

इसी रिमझिम सी बरखा ने , हमें नशे में डूबा दिया ,

चलो इसी रिमझिम को , भर लें  बोतल में  ,

जब ये बरखा बंद हो जाएगी  ,

तो उसी पानी से फिर , नशे में डूब जाएँगे   || 

 

दोस्तों क्या ऐसा नशा भी होता है  ,

जिसमें बरखा की रिमझिम डुबाती है  ,

ख्वाबों की सुंदर नगरी में वो , 

रिमझिम ही लेकर जाती है  ||  

 

ये नशा तो ना किसी शराब  है  ,

और ना ही किसी अन्य चीज में है  ,

ये तो सिर्फ बरखा की रिमझिम में है  ,

जो बरस रही है , बदरा के आँचल से  || 

 

Tuesday, February 3, 2026

KARM ( KSHANIKAA )

 

                                       कर्म 

 

घर के पते कितने भी , बदल लो यारों   ?

 छिपने की कोशिश , कितनी भी कर लो यारों  ?

कर्मों को तुम्हारा , हर ठिकाना मिल ही जाएगा  || 

 

आपके कर्मों की गंध , तेजी से फैल जाती है  ,

उसी गंध का छोर पकड़ कर  , कर्म पहुँच जाते हैं  ,

तो कर्मों को सुंदर राह पर ही ,ले जाओ यारों  || 

 

परिणाम भी कर्मों के तरीके  , पर ही मिलेंगे  ,

उसी के अनुसार ही , फूल भी खिलेंगे  ,

और उन्हीं फूलों की महक से  ,राहें महकेंगी   || 

 

Monday, February 2, 2026

ULAAHANAA ( RATNAAKAR )

 

                            उलाहना 

 

नदिया  की धार दौड़ चल  , पहुँच जा सागर - तट पर ,

तेरा मीठा पानी लेकर भी , सागर है खारा  ,

ना जाने वो कहाँ से पाता  ? 

नमक की बड़ी सी गठरी नदिया  ,

तेरे मीठे पानी को भी  , बना देता है खारा   || 

 

चल - चल - चल , मैं साथ में दौडूँ  ,

तेरे साथ - साथ मैं भी  , सागर - तट पर पहुँचू  ,

उसकी लहरों के साथ - साथ ही  ,

मैं भी उछलूँ  - कूदूँ   || 

 

सागर सदा बुलाता रहता ,मैं ही ना जा पाती  ,

उसकी चंचल - चंचल लहरें , सदा ही मुझे बुलातीं  ,

आज तो मौका आया नदिया , तेरे संग हूँ जाती  ,

सागर ने भी प्यार से , दिया एक उलाहना  ,

आज ही दूर भगाती  , उससे मैं मिल आती   ||