Saturday, August 8, 2026

DAREECHEY MEIN ( PREM )


                           दरीचे में 


दिल के दरीचे में , जो हमने तस्वीर है लगाई  ,

उसी ने हमारी , रातों की नींद है उड़ाई ,

वो तस्वीर तो हमें , बहुत प्यारी है  ,

उसी ने तो नींद से , हमारी दुश्मनी बनाई   || 


उस तस्वीर को हम , सभी को नहीं दिखा सकते ,

उसे तो हम , बेनकाब कर नहीं सकते  ,

उस तस्वीर में हम , प्यार के रंग तो भर सकते ,

मगर उसे हम , दिल से मिटा नहीं सकते   || 


वह तस्वीर तो हमारी जिंदगी है ,

वह तस्वीर तो हमारी बंदगी है  ,

वही तो हमारा सच्चा प्यार है ,

उसी के प्यार में तो हमारा ,

दिल बेकरार है , दिल  बेकरार है   || 


Friday, August 7, 2026

JAGMAGAA UTHEGAA ( JIVAN )


                जगमगा उठेगा 


बोल दोस्त ,मीठे - मीठे  बोल , मन मोहें सबका  ,

प्यार भर ले जीवन में , मुस्कान सबकी जगा  ,

बयार के समान रख , गति धीमी और शीतलता ,

खुद भी बयार के , समान ही बन जाना  || 


तेज गति ले के , आँधी ना बन जाना  ,

जो अपने साथ , विध्वंस लाती है  ,

बयार का हाथ पकड़ , धीरे कदम बढ़ाना  ,

पहुँच के अपनी मंजिल , मुस्कानें फैलाना  || 


मीठे बोल , धीमी बयार , मुस्कानें शीतलता ,

ये सब गुण जगा ले , अपना मन जगा ले ,

प्यार में ये गुण तुझे , पहुँचाएँगे मंजिल तक ,

जीवन जगमगा उठेगा तेरा , जगमगा उठेगा   || 

Thursday, August 6, 2026

DHARAA MUSKAAI ( GEET )

 

                            धरा मुस्काई 


पेड़ों से छनकर , धरा पे धूप जब आई , धरा मुस्काई ,

शीतल सी बयार , कोंपलों से टकराई ,धरा मुस्काई ,

बद्र की रिमझिम बूँदें , धरा से टकराई ,धरा मुस्काई || 


परिंदो की मीठी तान , जग में छाई , धरा मुस्काई  ,

उछलती नदिया की ,छल-छलाहट आई,धरा मुस्काई ,

सागर की लहरों की उछाल , जब आई ,धरा मुस्काई  || 


फूलों की रंगत पर, जब तितलियाँ आईं ,धरा मुस्काई ,

फूलों की महक से ,जब महकी अँगनाई ,धरा मुस्काई ,

साँझ की लालिमा ,जब गगन पे छाई , धरा मुस्काई  || 


रात का अँधियारा छाया ,गगना से चाँदनी उतर आई ,धरा मुस्काई ,

धीरे -धीरे तारों की बारात जगमगाई , धरा मुस्काई ,

सभी कुछ देख जग में ,धरा मुस्काई ,

धरा मुस्काई ,हाँ जी ,धरा मुस्काई  || 




Wednesday, August 5, 2026

RAAT KAA SAMAA ( CHANDRMAA )


                          रात  का समां 


रात का अँधियारा  छाया , धरा और गगना में ,

धरा ने दी आवाज , जो पहुँची गगना तक  ,

चाँद ने सुनी , वह गगना में चमका ,

तारे भी दौड़े - दौड़े आए , चाँद के साथ दोस्तों   || 


धरा मुस्काई उन्हें देखकर  ,

चाँदनी की ओढ़नी , धरा ने ओढ़ी ,

  सारा  जग चमचमा उठा , चाँदनी की चमक से  ,

अँधियारा दूर हुआ , चाँदनी की चमक से दोस्तों  || 


जगवासी रात के अँधियारे में , ये चमक देख मुस्काए ,

उन  सभी की आँखों में , उतर आई एक चमक ,

दिल सभी के गुनगुना उठे , साथ मिलकर  ,

ये ही रात का प्यारा समां है दोस्तों   || 

Tuesday, August 4, 2026

TELIPATHII ( PREM )


                               टेलीपैथी 


दिल ले करीब जो होते हैं  , वही सच्चे दोस्त होते हैं  ,

जो हम को समझते हैं , हम जिनको समझते हैं ,

आपस में हम मुस्कानें बाँटते हैं  || 


रहें पास या दूर , मगर यादों में बसते हैं  ,

कभी भूले नहीं जाते , दिल में समाए रहते हैं  ,

उदासियों में वही दोस्त , तो साथ देते हैं  || 


नहीं जरूरत होती फोन , या मैसेज की दोस्तों  ,

दिल से निकलने वाली , तरंगों से ही काम लेते हैं  ,

उसी को तो दोस्त  , टेलीपैथी कहते हैं  || 

Monday, August 3, 2026

BADARIYAA ( JALAD AA )


                           बदरिया 

संदेसा बदरिया का आया  , सखि आ रही हूँ मैं  ,
दौड़कर आई बाहर मैं  , 
बदरिया मुस्कुरा दी खूब , बोली -- वाह ,
तुझसे मिलने की , मुझे बहुत थी चाह   || 

दोनों हाथ थाम , मेरे आँगन में जा बैठे ,
बतियाते रहे घंटों , वहीं  बैठे - बैठे  , 
ना सुध थी  किसी को , क्या काम है बाकि  ?
बीता पूरा पहर , वहीं बैठे - बैठे  || 

तभी दामिनी चमकती आई , मेरे आँगन में ,
उसकी कड़क सुन , हम हिल गए बैठे - बैठे ,
मुझे भूल कर , बतिया रही हो दोनों  ,
यह सुन कर तो हम , हँस दिए बैठे - बैठे   || 

Sunday, August 2, 2026

MAHSOOS ( PREM )


                               महसूस 


एक सखि थी हमारी , उम्र में हमसे काफी छोटी थी  ,

मगर दिल के बहुत करीब थी ,उम्र रुकावट नहीं थी  || 


जब भी वो दोस्त आती , तो रात को हम दोनों  ,

छत पर तारों की छाँव में बैठते , मुस्कुराते थे  ,

मैंने फूलों के पौधे लगाए थे , हम फूलों की महक लेते थे ,

घंटों बातें करते थे ,और खिलखिलाते थे   || 


हम दोनों में प्यार का , रिश्ता इतना गहरा था ,

कि हम स्वयं को , एक -दूजे के बहुत करीब समझते थे ,

आज भी वो तारों की , छाँव याद आती है , 

आज  भी  वो फूलों की महक , महसूस होती है  ,

आज मेरी वह सखि , इस दुनिया में नहीं है  ,

ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दें  ||