सहेली
कई बार हम सोचते हैं , सेवा - निवृत्ति के बाद ,
हम अकेले हैं , बच्चों के समझदार होने के बाद ,
मगर दोस्तों ये पूरा सच नहीं है ,
आप सब हैं ना , हमसे बातें करने के लिए ||
अरे - रे मेरी लेखनी तो है , मेरी सच्ची सहेली ,
मेरी सच्ची दोस्त , रात - दिन साथ निभाती सहेली ,
मेरी भावनाओं को ,शब्दों में बदलती सहेली ,
वही लेखनी जो , कागज की भी है सहेली ||
दोस्तों एक ऐसा सच्चा , दोस्त हो या सहेली ,
तुम भी अपना लो , ऐसा दोस्त या सहेली ,
जिंदगी सरल और , सुगम हो जाएगी ,
हाथ पकड़ेगा जब ऐसी सहेली ( लेखनी ) ,
दोस्तों अब तो ना , तुम अकेले हो ,
और ना मैं ही हूँ अकेली ||