Monday, March 16, 2026

DIL CHAAHTAA HAI ( KSHANIKAA )

 

                             दिल चाहता है 

 

कभी - कभी दिल चाहता है दोस्तों  ,

ऊपर नीले गगना में उड़ जाऊँ मैं  ,

ऐ पंछी दो पंख उधार दे दे मुझे  ,

गगना में जाकर बदरा  संग  झूल  जाऊँ मैं  ,

चंदा को भी पास से देख आऊँ मैं  ,

पंछी तेरा बहुत  एहसान होगा मुझ पर   || 

 

कभी - कभी दिल चाहता है दोस्तों  ,

सागर की लहरों  लेट कर तैरती रहूँ  ,

चंचल लहरों संग मैं खेलती रहूँ ,

लहरों का प्यार पाऊँ और अपना प्यार दूँ  ,

सागर बुला मुझे और तैरना सिखा मुझे   || 

 

कभी - कभी दिल चाहता है दोस्तों  ,

चमन में फूलों के बीच ,

फूलों की तरह खिल जाऊँ मैं  ,

रंगीन तितलियों को अपने पास बुलाऊँ मैं  ,

अपनी महक को फैलाकर , चमन को महकाऊँ मैं  ,

ऐ फूलों महकना सिखा दो मुझे  ,

तितलियों से बात करना भी सिखा दो मुझे   || 

 

Sunday, March 15, 2026

KHETAA JAA ( KSHANIKAA )

 

                          खेता जा 

 

दिल की बातों को सुन ले यारा  ,

उन्हीं का तो है तुझको सहारा  ,

दिल बोलता हमेशा सच ही यारा  ,

झूठ का कभी भी ना लेता सहारा   || 

 

सच और प्यार से , भरी ये बातें करता , 

जिंदगी में मुस्कानों के , साथ आगे बढ़ता  ,

तो दिल की ही सुन ले , दिल की सुन ले   || 

 

कौन जाने आगे की , राहें  कैसी होंगी  ?

फूलों से भरी होंगी  , या काँटों भरी मिलेंगी  ? 

तू अपने दिल - ओ - दिमाग को , तैयार अभी कर ले   || 

 

रुकना ना कहीं भी , किसी भी हालात में  ,

जीवन की नैया को कभी भी , डुबोना ना भंवर में  ,

नैया को किनारे के , कम पानी में भी ना फँसाना  ,

गहरे पानी में ही तू , इसे खेता जा यारा   || 

 

दिल भी  खुश होगा  , दिमाग भी शांत होगा  ,

तभी तो होठों पर , मुस्कान तू लाएगा  ,

और अपनी नैया , पार लगाएगा  यारा   || 

 

DILLII SE SAAGAR ( KSHANIKAA )

 

                        दिल्ली  से सागर 

 

दिल्ली है ये दिल्ली , दिल्ली है दिल वालों की ,

हम जैसे मतवालों की , बस गए हम दिल्ली में  ,

सपने पलते गए दिल्ली में  , पूरे हुए हमारे सपने  || 

 

तभी एक आवाज है आई , सागर ने आवाज लगाई  ,

आ जाओ , आ भी जाओ , और हम दौड़ चले  ,

सागर के प्यार में खो गए , डूब गए  ,

सपने बदले , पलते गए , और पूरे हुए   || 

 

तभी दिल्ली ने पुकारा , एक बार तो आजा ,

आए हम और प्यार में  , फंस गए  दिल्ली में ,

सागर ने कहा ,जोर से पुकारा ,ऐ - दोस्त  ,

वापस लौट कर आ  , वहाँ मत रुकना , 

और  हम लौट आए  , हम लौट आए   || 

 

MUKTAK - 7

 

                             मुक्तक - 7 

 

दुनिया में सरहदें हैं  , देशों को बाँटने वाली  ,

मानव को अलग - अलग ,टुकड़ों में करने वाली ,

क्या कर रहा है मानव  ? क्यों तू यूँ बँट रहा है   ?

प्यार को बढ़ा कर  . सरहदों को खत्म कर दे  || 

MUKTAK - 6

 

                          मुक्तक - 6 

 

हवा तो उड़ती जाए , धूप चमकती जाए  ,

धूप  से सारा जग चमके  , जीवन बढ़ता जाए  ,

तभी तो सूरज अपना , जीवन दाता कहलाए   ||  

MUKTAK - 5

 

                                 मुक्तक - 5 

 

सतरंगा इंद्रधनुष ,चमका जब गगन में ,

मेरा दिल झूम उठा  , खड़े - खड़े अंगना में  ,

सारा जग नाच उठा  , प्यार भरे , मनुहार भरे राग में   ||  

MUKTAK - 4

 

                            मुक्तक - 4 

 

बड़े - बड़े शहरों की राहें , भरी हुई हैं भीड़ से ,

गाड़ियों की रफ्तार से , हॉर्न के बढ़ते शोर से ,

जीवन क्या ऐसा बनाया  ? दुनिया के रचनाकार ने  ||