नशीली बरखा
जिंदगी आज भीग गई बरखा में ,
ये बरखा कैसे छिपी थी , बरखा के आँचल में ?
बरस गई रिमझिम बन के , आज मेरे आँगन में ,
उसी ने भिगो दिया मेरा आँचल ||
इसी रिमझिम सी बरखा ने , हमें नशे में डूबा दिया ,
चलो इसी रिमझिम को , भर लें बोतल में ,
जब ये बरखा बंद हो जाएगी ,
तो उसी पानी से फिर , नशे में डूब जाएँगे ||
दोस्तों क्या ऐसा नशा भी होता है ,
जिसमें बरखा की रिमझिम डुबाती है ,
ख्वाबों की सुंदर नगरी में वो ,
रिमझिम ही लेकर जाती है ||
ये नशा तो ना किसी शराब है ,
और ना ही किसी अन्य चीज में है ,
ये तो सिर्फ बरखा की रिमझिम में है ,
जो बरस रही है , बदरा के आँचल से ||