Friday, September 11, 2026

DHEERE - DHEERE ( PREM )

                             धीरे - धीरे 


बदलोगे जो खुद को , तो रंग जमा लोगे  ,
जहां की मुसीबतों से , पीछा छुड़ा लोगे  ,
कोई कुछ भी बोले बंद तुम , कान कर लोगे ,
अपने दिल की बातें दिल में ,ही छुपा लोगे    || 


दुनिया वालों का तो काम है , कुछ भी कहना ,
तब अपने कानों में तुम , थोड़ी सी रुई रखना  ,
फिर मजे से तुम दोस्तों , मुस्कुराते रहना ,
तभी तो तुम मजे से , जीवन बिता लोगे   || 


दोस्तों ये जिंदगी तुम्हारी है  , मत भूलो यह बात  ,
दिन के बाद आती है  , हमेशा रात  ,
चैन की नींद सो जाओगे  , बीतेगी  रात  ,
सुबह को उठो तो खूब  ,  खिलखिला लोगे   || 


बगीचे की घास  पर चलो  , नंगे पैर धीरे - धीरे  ,
मानो चल रहे हो तुम ,नदिया के तीरे ,
समेटो  फूलों की महक अपनी  , साँसों में धीरे - धीरे  ,
फूलों पे जमी ओस की बूँदें , होठों पे तुम समेट लोगे   || 

HAMARAA BAGEECHAA ( JIVAN )


                        हमारा बगीचा  


एक दिन था दोस्तों  , बहुत समय पहले  ,

दुनिया वालों के बगीचे में , देख खिलते फूल ,

मगर ना हमारे पास थी , भूमि कि खिलते फूल   || 


सोच - सोच कर हमने , एक सोच ली चुन  ,

उसे कार्यान्वित करने को , नई सोच ली बुन  ,

उसकी विधि को हमारे , दिल ने ली सुन   || 


लाए हम गमले , मिट्टी  और खाद ,

गमलों को हमने , अपनी छत पर जमाया  ,

मिट्टी और खाद मिला , गमलों को सजाया ,

अब पौधों और बीजों को मिट्टी में जमाया   || 


एक सप्ताह बीतते , अंकुरण शुरु हो गया  ,

कुछ पौधे जो लगाए थे , उनका बढ़ना शुरु हुआ  ,

करीब 15 - 20 दिनों में , उम्मीद के फूल खिले  ,

और कुछ समय बाद  , हमारा बगीचा शुरु हुआ  ,

हमारा सपना पूरा हुआ  , बगीचा खिल गया   || 

 

Thursday, September 10, 2026

DIL MEIN MAHAK ( JIVAN )


                           दिल में महक 


प्यार बाँटते चलो , प्यार बाँटते चलो  ,

मुस्कानें भर लो झोली में , सभी में बाँटते चलो  ,

रिमझिम सी बरखा आई , तो दिल बोला ,

ये रिमझिम भर लो दिल में , अँगना लो भिगोते चलो  || 


कलियाँ जब चटखीं , फूल खिले , तो उनकी महक से ,

सारे जहां को , महकाते चलो दोस्तों   || 


मुस्कानों के बाँटने से , सभी तो मुस्काए  ,

रिमझिम बरखा से तो दोस्तों , समंदर लहराए  ,

लहरें उनकी नाचीं  , समंदर मुस्काए  ,

फूलों की महक से तो , चमन सारे महके  ,

जहां महका और  , दिल में महक समाए  || 


Tuesday, September 8, 2026

ROSHAN - PUNJ ( JIVAN )

         

                      रोशन पुंज 


गगना में चमका , रोशन - पुंज सूर्य  ,

धरा का सारा संसार , रोशन हो उठा ,

जाग गए सभी जीव - जंतु , चेहरा खिल उठा  ,

चहल - पहल मच गयी  , वातावरण खुल उठा   || 


परिंदे चहक उठे  , उनकी चहक से ,

वातावरण गुंजायमान हो उठा  ,

कलियाँ खिल कर , फूल बन गईं  ,

जिनकी महक से , चमन महक उठा   || 


तितलियाँ जब  , उड़ीं फर - फर  ,

बच्चों की किलकारियाों से  , 

चमन मुखरित हो उठा  ,

सभी देखने वालों के दिल  ,

और होठों पर , मुस्कानें जग उठीं   || 


Monday, September 7, 2026

BACHPAN SEY ( PREM )


                         बचपन से 


चल , चल री लेखनी  , शब्दों को तू सजा दे  ,

सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे  ,

मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे   || 


तू ही मेरी प्यारी लेखनी  , शब्दों को सजाने वाली  ,

तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली  ,

रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली   || 


चल , चल री लेखनी  , दिल में खुशियाँ भर दे  ,

तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे  ,

उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली   || 


Sunday, September 6, 2026

SAMAAN ( PREM )

  

                                समां 


होठों पे मुस्कान सजा लो ,

दिल से मलाल निकालो  ,

महफिल में तभी तो रंग खिलेगा  ,

पैरों को थोड़ा थिरका लो ,

कदमों को ना लड़खड़ाओ ,

महफ़िल में तभी तो रंग भरेगा   || 


दिल ही दिल में मत ,

गीत गुनगुनाओ  ,

थोड़ी तो तान सजाओ  ,

संगीत संग शब्दों को  ,

तुम गुनगुनाओ ,

महफिल में हर कोई  , गुनगुनाएगा  || 


ऐसा तभी तो होगा दोस्त  ,

जब सभी मुस्काएँगे  ,

मुस्कुराहटें फैलाएँगे ,

जिंदगी पूरी ही खिल जाएगी दोस्त मेरे  ,

महफिल में तभी  तो  समां बँधेगा  || 

Saturday, September 5, 2026

INDRADHANUSH ( KSHANIKAA )

 

                                इंद्रधनुष 

 

मेरी खिड़की से झाँका  जो आज ,  इंद्रधनुष  ,

उसने तो कर दिया सखि री मेरे  , दिल को खुश   || 

 

चमक उठे मेरे नयना देख कर , इंद्रधनुष  ,

मचल उठा मेरा दिल , लेने को उसका , अक्स   || 

 

छाए हुए थे घने बदरा , गगना में जब आया , ये मेघधनुष  ,

जब हमने लिया सखि री उसका  ,  अक्स   || 

 

इतना सुंदर , सतरंगा जब गगन पे उभरा , वह इंद्रायुध ,

हम भूल गए इस दुनिया को देखकर , वह इंद्रायुध  || 

 

कुछ ही पलों में सखि री , बरखा बरसी , मूसलाधार  ,

और गुम हो गया , हमारा वो प्यारा सा , इंद्रधनुष   ||