Monday, July 6, 2026

LASSII ( KSHANIKAA )

 

                                  लस्सी 

 

सत्य को सत्य ही रहने दो दोस्तों  ,

झूठ की सीढ़ी ना चढ़ाओ उसको  ,

माना आज मिलावट का जमाना है  ,

मगर तुम सच - झूठ की ,लस्सी ना बनाओ दोस्तों  ||  

 

आशा और भरोसे की  , लस्सी जो बनाओगे दोस्तों  ,

ऐसी स्वाद लस्सी को , सबको जो पिलाओगे  ,

तो प्यार और मुस्कानें , जग में फैलाओगे   || 

 

अच्छे बोल ना बोल सको दोस्तों  ,

तो बुरे शब्द भी ना बोलो दोस्तों   ,

मौन रहकर मुस्कान की , लस्सी पिला दो दोस्तों   || 

 

जिंदगी की राहें तो , बार - बार मुड़ती हैं  ,

हर मोड़ एक नया , अनुभव दे जाता है  ,

उन अनुभवों को  , महसूस तो करो  ,

मगर उनकी लस्सी , ना बनाओ दोस्तों   || 

 

Sunday, July 5, 2026

MAUN ( PREM )

 

                         मौन 

 

शब्द ऐसे बोलो दोस्तों  , जो मौन से भी सुंदर हो  ,

होठों पर सुंदर सी  , मीठी सी मुस्कान  ,

उन्हीं से लो दोस्तों  , बोलों  का काम   || 

 

मौन है दिल की भाषा  , जिसे  दिल  समझता है  ,

जवाब  भी देता है  , दूजे के दिल को समझाता है  ,

और दोनों के दिल खुश हो जाते हैं   || 

 

 मौन है आँखों की भाषा  ,

यही आँखों में चमक लाता है  ,

आँखों ही आँखों में  , सब कुछ कह जाता है  ,

जीवन को सुंदर और  , संगीतमय बन जाता है   || 

 

मौन को प्यार से , अपना लो दोस्तों ,

मौन को प्यार में , डुबा लो दोस्तों  ,

तो मौन संसार की , सबसे सुंदर  ,

भाषा बन जाएगा  , और जग में प्यार बरसाएगा   ||  

 

 

Saturday, July 4, 2026

JHILMILATAA ( CHANDRAMAA )

 

                           झिलमिलाता 

 

जिंदगी भर नहीं भूलेगी , वो तारों से भरी रात  ,

किसी अनजाने से , अचानक ही , मुलाकात की रात   || 

 

हाय वो धरा का तारों से  , झिलमिलाता  आँचल  ,

धरा के रूप को देखा , तो चाँद भी हुआ पागल  ,

उसने भेजी अपनी चंदनिया  , बनी सौगात की रात  || 

 

चंदनिया ने लपेटा धरा को , जब अपनी बाँहों में  ,

धरा भी तो सिमट गई , सुंदर सी पनाहों में  ,

यही तो बन गई दोनों के , मिलन की रात   || 

 

देख कर जग ये , रूप  धरती का  ,

मुस्कानें सज गईं , सभी के चेहरे पर  ,

खिलखिला उठी जोरों से , अनोखी सी ये रात    || 

 

Friday, July 3, 2026

CHAMCHAMAYAA ( GEET )

 

                          चमचमाया 

 

नफरतों के काँटे , क्यों उगाए तुमने  ?

हमने तो प्रीत का , कमल खिलाया है  ,

गगना में रवि , भोर में उदित हुआ , 

रात में चंद्रमा  , चमचमाया है    || 

 

दुश्मनी कभी , किसी से ना करना  ,

दोस्ती ने मुस्कान , को जगाया है  ,

जिंदगी की राहों में , हर कदम पर  ,

दोस्तों  ने ही  , फूलों को बिछाया है   || 

 

नदियों का पानी , शीतल और मीठा है  ,

सागर ने ही , उसे खारा   बनाया है  ,

 तुम नदी के पानी , की तरह रहो दोस्तों  ,

सागर ने तुम्हें , मिलने बुलाया है   || 

 

गगना में बदरा छाए , तो बरखा बरसी , 

बरखा ने रिमझिम  , का गीत गाया है  ,

गगना ने उस  , रिमझिम में भी  ,

इंद्रधनुष अपने  , अँगना में सजाया है   || 

 

Thursday, July 2, 2026

ANTAR SEY ( JALAD AA )

 

                          अंतर से 

 

छाए जो बदरा गगना में ,मोर की आवाज गूँजी धरा पे ,

नाचे जो मोर धरा पे  , मानव ह्रदय मुस्काया  , 

खिलखिला उठा  मेरा ह्रदय  , ये आवाज अंतर से आई  || 

 

चमकी दामिनी उसने , बदरा को भी चमकाया  ,

उसकी कड़कड़ाहट ने , धरा का दिल दहलाया  ,

मगर दामिनी ने पूरा  , जग ही चमकाया   || 

 

बदरा से जो बूँदें बरसीं  , रिमझिम की फुहार में  ,

उसी रिमझिम  में तन और ,मन हमारा भीग गया  ,

और साथ ही रिमझिम में , तन - मन झूल गया   || 

  

Wednesday, July 1, 2026

PREM - PATRA ( PREM )

 

                            प्रेम - पत्र 

 

सारी धरा बन जाए कागज  , सागर बने स्याही  ,

कलम बनाऊँ पेड़ से , तभी लिख पाऊँ प्रेम - पत्र  || 

 

गगन के तारे , दिल के भाव उतारें , उस पत्र में  ,

परिंदों के स्वर , गीत का रूप लें , उस पत्र में  ,

जुगनुओं की चमक सज जाए , उस पत्र में  ,

तभी तो पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र   || 

 

जीवन प्रकृति से जुड़ा है दोस्तों  ,

उसी ने तो ये जीवन दिया है दोस्तों  ,

प्रकृति के बचने से ही , जीवन बचेगा दोस्तों  ,

दोनों बचेंगे तभी पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र   || 

 

मीठे से शब्द हों  , भावों से भरे हों  ,

होठों पे मुस्कान हो , आँखों में चमक हो  ,

तभी तो प्रकृति भी मुस्कुराएगी  ,

उसी से तो पूरा होगा  , मेरा प्रेम  -  पत्र   || 

 

Tuesday, June 30, 2026

DWAAR SAAGAR KAA ( RATNAAKAR )

 

                         द्वार सागर का 

 

सागर मैं आई हूँ  , तू हाथ बढ़ा अपना  ,

थाम कर  मेरा हाथ , खोल दे द्वार अपना  ,

मैं कैसे पहचानूँ  ? खुद ही तेरे द्वार को , 

कहीं भी किवड़िया नहीं है  , ना कोई कुंडी ही है   || 

 

ना कोई घंटी ही है सागर    ,

हर  ओर  लहरें उछल रही हैं  ,

उन्हीं का शोरगुल   बहुत है   || 

 

लहरों को बोल सागर  , रस्ता मुझे दिखाएँ  ,

अंदर मुझे हाथ थाम कर ले जाएँ  ,

तेरे ही कहने पर , वो ले जाएँगी मुझे  ,

वरना तो वो चंचला , भिगोती हैं सिर्फ मुझे  ,

खेल खिलाती हैं मुझे , प्यार दिखाती हैं मुझे   ||