समय चक्र
सफर जो शुरु हुआ हमारा ,
जन्म लेते ही राहें चल पड़ीं दोस्तों ,
कदम जो चलना सीख कर दौड़ पड़े ,
दोस्तों का मेला - सा लग गया दोस्तों ||
कदम विद्यालय में पहुँचे तो ,
आशीष मिला गुरुओं का दोस्तों ,
कक्षा में मिले हम को सहपाठी ,
और खेल के मैदान में तुम दोस्तों ||
समय बीतता गया , कॉलेज का जमाना आया ,
और हमने आगे कदम बढ़ाया ,
दोस्तों की संख्या बढ़ती गई ,
और प्यार भी उनका बढ़ता गया दोस्तों ||
फिर गृहस्थी बसी , व्यस्तता बढ़ी ,
जिम्मेदारियाँ भी बढ़ीं दोस्तों ,
सब कुछ निभाते - निभाते ,
अब सेवा - निवृत्त हुए दोस्तों ,
अब तो आती है , उन्हीं प्यारे दिनों की याद दोस्तों ||