महकेंगी
मेरे उगाए छोटे - छोटे पौधों पर , खिले जब सुंदर फूल ,
फूलों के रंग खिले , मेरी साँसें महकीं ,
तितलियाँ फर - फर उड़ीं , फूल खुश हुए ,
अपनी साँसें महकने से , मेरे होंठ मुस्काए ||
तितलियों और फूलों का ये रिश्ता ,
आगे ही आगे बढ़ता रहा ,
फूलों की महक और बढ़ी , और बढ़ी ,
मेरी साँसें भी महकती , और महकती रहीं ||
तुम भी फूलों के पौधे लगाओ दोस्तों ,
उन पौधों पर जब , फूल खिलेंगे , महकेंगे ,
तब तुम्हारी साँसें भी महकेंगी , और होंठ मुस्काएँगे ||