Tuesday, August 18, 2026

AAJ ( JIVAN )

 

                        आज 


मत सोचो , कल क्या हुआ  ? वह बीत गया , 

मत सोचो , कल क्या होगा  ? वह अनजाना है ,

जो आज है , उसे बिता लो  , मुस्काना है  || 


दोस्तों के संग बिता लो  , आज का दिन  ,

गप्पें खूब लड़ा लो  , आज के दिन  ,

समय खूब तुम्हारे पास  , आज के दिन ,

कल क्या पता , तुम या दोस्त  , व्यस्त हो  ?

फिर कैसे ला पाओगे तुम  , आज का दिन  ?? 


दिल की बातें कह डालो  , आज के दिन  ,

खुशी और गम सभी कुछ , बाँट लो  , आज  के दिन ,

फिर कैसे ला पाओगे  तुम ,  आज का दिन   ??  






NAMAN - NAMAN ( DESH )


                           नमन - नमन 


सीमा पर जब संकट आया , वीरों ने दूर भगाया  ,

अपनी भारत माता को - संकट से मुक्त कराया ,

अपना तिरंगा  जग में , ऊँचाई पर लहराया   ,

अपनी भारत माता को  -------  || 


अपने वीरों का शौर्य ,  जग में सबसे ऊँचा है  ,

सारे जग में ही उनकी , वीरता का चर्चा है  ,

वीरों ने अपना तिरंगा , गगना में लहराया  ,

अपनी भारत माता को  --------  || 


वीरों ने ही देश की खातिर , अपने प्राण गँवाए  ,

अपनी नींदे कर बलिदान , चैन से सबको सुलाए  ,

अपना तिरंगा हो ना नीचा , सिर चाहे कट जाए  ,

अपनी भारत माता को -------   || 


हम तो तुमको प्यार हैं करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

नमन  , नमन हम करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

अपने तिरंगे को मिल के , गगना में लहराया  , 

अपनी भारत माता को --------   || 



Monday, August 17, 2026

CHAAI - PAKAUDEY ( JIVAN )


                                   चाय - पकौड़े 


साँझ हुई सूरज गया  , अपने घर दोस्तों  ,

बदरा छाए , गगना भी , छिप गया दोस्तों ,

मौसम थोड़ा - थोड़ा शीतल , हो चला दोस्तों ,

ऐसे में एक - एक कप चाय ,हो जाए  दोस्तों  || 


पवन संग बदरा धीरे - धीरे , झूल रहे दोस्तों ,

बदरा झूलते - झूलते थोड़ी सी बूँदें , आ रहीं दोस्तों  ,

ऐसे में एक - एक कप चाय , हो जाए दोस्तों   || 


सूरज का अपना समय ,बदरा का अपना समय ,

बरखा भी अपने समय से , रिमझिम  आती दोस्तों  ,

कभी - कभी दामिनी भी  , आती है  दोस्तों ,

चाय के साथ - साथ , पकौड़े ,भी हो जाएँ  दोस्तों  || 




 




 

Sunday, August 16, 2026

KHILIIN ( JIVAN )


                                    खिलीं 


मेरे कर्मों ने पूछा मुझसे  , " क्यों हमें किया तुमने  ?

हमने तो मुस्कानें बाँटीं , दूजों के होठों पर  ,

हमने तो है जोत  जलाई , जरूरत के आँगन में  ,

तुमने ही तो हाथ दिए , हम सबको ये करने में   || 

 

" बुद्धि तुम्हारी , हाथ तुम्हारे , किया है तुमने हमें ,

ईश्वर भी तो हुआ है खुश , हमको यूँ करने में ,

हम  हैं कर्म  तुम्हारे सखि ,जो रहते थे पहले दिल में  ,

वहाँ से निकल , तुमने हमें किया , हम भी हुए सुंदर  || "


कर्मों की बातें सुनकर   , मेरे होठों पर मुस्कान खिली ,

 मेरी मुस्कान देखकर दोस्त , दूजों की मुस्कान खिलीं ,

आज हुआ है दिल खुश सबका , सबकी जो मुस्कान खिलीं   || 


Saturday, August 15, 2026

NEEYAT ( JIVAN )

 

                              नीयत 


जिंदगी में मिलने वाले सभी लोग ,

दोस्त नहीं होते दोस्तों ,

भरोसा ना करो , सभी मिलने  वालों पर , 

दोस्तों पर तो भरोसा ,किया जा सकता है , 

मगर सब पर नहीं  || 


सभी मिलने वाले लोग , दुश्मन भी नहीं होते  , 

तो सभी पर अविश्वास ,नहीं किया जा सकता  ,

उनमें से कुछ पर , अविश्वास करना ठीक है  ,

मगर सब पर नहीं  || 


दोस्तों सब की नीयत पहचानना सीखो ,

कौन विश्वास के काबिल है   ?

और  कौन अविश्वास के काबिल   है ?

यह योग्यता तो आपको स्वयं ही  ,

अपने अंदर जगानी होगी दोस्तों  ,

तभी आप उनकी नीयत पहचान पाओगे  दोस्तों   || 







सभी 










  


NAMAN - NAMAN ( DESH )

  नमन - नमन 


सीमा पर जब संकट आया , वीरों ने दूर भगाया  ,

अपनी भारत माता को - संकट से मुक्त कराया ,

अपना तिरंगा  जग में , ऊँचाई पर लहराया   ,

अपनी भारत माता को  -------  || 


अपने वीरों का शौर्य ,  जग में सबसे ऊँचा है  ,

सारे जग में ही उनकी , वीरता का चर्चा है  ,

वीरों ने अपना तिरंगा , गगना में लहराया  ,

अपनी भारत माता को  --------  || 


वीरों ने ही देश की खातिर , अपने प्राण गँवाए  ,

अपनी नींदे कर बलिदान , चैन से सबको सुलाए  ,

अपना तिरंगा हो ना नीचा , सिर चाहे कट जाए  ,

अपनी भारत माता को -------   || 


हम तो तुमको प्यार हैं करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

नमन  , नमन हम करते , वीरों तुम्हें प्रणाम  ,

अपने तिरंगे को मिल के , गगना में लहराया  , 

अपनी भारत माता को --------   || 



Friday, August 14, 2026

DHAN - JIVAN ( JIVAN )


                               धन - जीवन 


आज मानव - जीवन में , धन का ही मोल है ,

धन के पीछे मानव , भाग रहा है दोस्तों  ,

धन ही उसके जीवन का , लक्ष्य बन गया है दोस्तों   || 


धन के लिए ही वह , दूजों को दुःख देता है  ,

धन प्राप्त करके , स्वयं को उच्च समझता है  ,

और वह दूजों को  , नीचा समझता है   || 


धन - धन करता मानव , मार्ग भटक गया है  ,

अपने  कर्म और सोच को , मजबूत बनाकर ,

जीवन को सुंदर और ,स्वस्थ बनालो दोस्तों   || 


धन जरूरी है , जीवन यापन के लिए  ,

मगर धन ही सब ,कुछ नहीं है दोस्तों  ,

एक रास्ता है धन  , जरूरतें पूरी करने के लिए है दोस्तों   ||