समां
होठों पे मुस्कान सजा लो ,
दिल से मलाल निकालो ,
महफिल में तभी तो रंग खिलेगा ,
पैरों को थोड़ा थिरका लो ,
कदमों को ना लड़खड़ाओ ,
महफ़िल में तभी तो रंग भरेगा ||
दिल ही दिल में मत ,
गीत गुनगुनाओ ,
थोड़ी तो तान सजाओ ,
संगीत संग शब्दों को ,
तुम गुनगुनाओ ,
महफिल में हर कोई , गुनगुनाएगा ||
ऐसा तभी तो होगा दोस्त ,
जब सभी मुस्काएँगे ,
मुस्कुराहटें फैलाएँगे ,
जिंदगी पूरी ही खिल जाएगी दोस्त मेरे ,
महफिल में तभी तो समां बँधेगा ||