प्यार खूब
ईश्वर तेरी बनाई , इस सुंदर दुनिया में ,
क्यों मानव आपस में लड़ता है ?
एक - दूजे को मारता रहता है ,
क्यों दर्द दूजों को देता है ??
क्या प्यार नहीं , उसके दिल में ?
क्या धड़कन नहीं , उसके दिल में ?
क्यों प्यार को नहीं , पहचाने वो ?
क्यों धड़कन को नहीं , पहचाने वो ??
क्या चमन में खिलते , फूलों को देखकर ,
मुस्कान नहीं आती होठों पर ?
क्यों महक फूलों की ,उसकी साँसों को ,
महकाती नहीं अंतर्मन को ??
क्यों ईश्वर तुमने मानव के दिल को ,
ये सुंदर गुण नहीं दिए ?
क्यों दिमाग ही मानव के , विकसित खूब किए तुमने ?
विकसित तुम दिल को कर दो ,
धड़कनों में तुम प्यार भर दो ,
प्यार खूब , खूब , खूब भर दो ||