Friday, May 8, 2026

MOGRAA ( JIVAN )

 

                                मोगरा 

 

मोगरा फूला है सखि री , चमन में  ,

खुश्बुएँ फैली हैं सखि री , सहन में  ,

आ जाओ सखि तुम , मेरे आँगन में  ,

गुनगुनाएँगे वो गीत जो  ,महकते हैं जीवन में   || 

 

गीतों के वो शब्द आज भी , बसे हैं जहन में  ,

उन्हीं की याद भी आती है , रोज सपन में  ,

उन्हीं के अक्षर तो बसे हैं , मेरी कलम में   || 

 

मोगरा तो हर बार फूलता है , चमन में ,

उसी  खुश्बु तो बस गई है  ,मेरे तन - मन में  ,

उसी की खुश्बु से महका लें , हम अपनी साँसों को ,

तभी तो महकेंगी खुश्बु  , हमारे दामन में   || 

 

साँसें महकेंगी , तो चैन आएगा  ,

कदमों  का निशां , गीली रेत पर रह जाएगा  ,

जिंदगी का समय भी , मुस्का के गुजर जाएगा   ||  

 

Thursday, May 7, 2026

AATMAA ( AADHYAATMIK )

 

                             आत्मा    

 

रचनाकार ने जब ये संसार बनाया  ,

सबसे सुंदर एक पुतला ( मानव  ) बनाया ,

अपने कुछ अंश को आत्मा का रूप दिया ,

और मानव के अंदर आत्मा को बसाया   || 

 

मानव और उसकी आत्मा में  ,

सोचने , समझने की शक्ति थी ,

कुछ बनाने और मिटाने की शक्ति थी ,

मानव ने इस दुनिया में कुछ बनाया ,

साथ ही रचनाकार की , कुछ रचनाओं को मिटाया  || 

 

मानव के अंदर आत्मा तो दोस्तों ,

उसी रचनाकार ( परमात्मा ) का अंश है  ,

उस परमात्मा को पाने के लिए ,

अपने अंदर परमात्मा के ,अंश को जगाओ दोस्तों  ||  

 

आत्मा ही अपनी बुद्धि और प्रेम भरी शक्ति से , 

उस परमात्मा को पा सकती है  ,

इस रास्ते  पर चलकर ही उस ,

परमात्मा को पाने की , कोशिश कर लो दोस्तों   ||  

 

Wednesday, May 6, 2026

KINAARE ( KSHANIKAA )

 

                             किनारे 

 

जीवन है एक नदिया  , सुख - दुःख दो किनारे  ,

पास - पास वो रहते , पर ना मिलते हैं दोनों  ,

साथ - साथ चलते रहते  , पर ना मिलते हैं दोस्तों  || 

 

कोई कितनी भी कोशिश कर ले ,

पर दोनों किनारों को मिला नहीं सकता  ,

चलो हम सब मिल कर कोशिश करते हैं  ,

नदिया के दोनों किनारों को मिलाने की   ||  

 

सुख - दुःख दोनों , एक साथ नहीं मिल सकते  ,

बारी - बारी से तो आते , मगर साथ में नहीं  ,

एक का सुख दूसरे के लिए , दुःख हो सकता है  ,

पर एक का ही , सुख और दुःख  एक साथ नहीं  || 

 

Tuesday, May 5, 2026

PRAKAASH - PUNJ ( CHANDRAMAA )

 

                          प्रकाश - पुंज 

 

साँझ ने जब रात ,  हाथ मिलाया , अँधियारा छाया  ,

उजियारे की कोई किरन , नहीं थी राहों में  ,

दो - चार कदम चले ही थे हम ,कि प्रकाश -पुंज  चमक उठा  ,

गगना पे चंद्रमा  चमक उठा , धरा तक चाँदनी पहुँच गई  ,

धरा तो पूरी की पूरी  , चंदनिया से भीग गई   || 

 

हम भी चंदनिया में नहा गए , आँखें भी चमक उठीं  ,

दिल भी मुस्कुराया दोस्तों , धड़कनें भी बढ़ गईं  ,

आस - पास कलियाँ खिल गईं  , बगिया भी महक गई  ,

संसार ही मानो महक से भर गया  ,

चमन भी तितलियों से भर गया  ,

गगना का चाँद भी , मुस्कुरा उठा दोस्तों   || 

 

Monday, May 4, 2026

POORNATAA ( PREM )

 

                                   पूर्णता 

 

जिंदगी है मेरे हमदम  , एक सुहाना सा सफर  ,

मुस्कानें होठों पर आईं हैं  , जब  तुम हो हमसफर  ,

खूबसूरत हो गया हर पल  , तुमसे मिल कर   || 

 

इस जिंदगी का सारा समय , चल रहा धीरे - धीरे  ,

सपने जो देखे थे सोते हुए  , पूरे हो रहे धीरे - धीरे  ,

नींद के सपनों को पूरे करेंगे , हम दोनों मिल कर   || 

 

प्यार ही इस , जिंदगी की नींव है दोस्त  , 

प्यार के पहियों से ही  , जिंदगी की गाड़ी चलती है  ,

जिंदगी की राह पूरी होते - होते  , मंजिल मिलते - मिलते  ,

जीवन ही पूर्णता को प्राप्त हो जाता है   ||  

 

Sunday, May 3, 2026

BHEEGA - BHEEGA ( JALAD AA )

 

                          भीगा - भीगा 

 

कारे - कारे बादरा  ,आ रे - आ रे  बादरा  ,

आजा उतर कर , मेरे आँगना  , मेरे आँगना  ,

तू जो पानी लाएगा , मेरा अँगना भर जाएगा  ,

मुझ को भी साथ ही , भिगो जा बादरा    ||

 

तेरी चम - चम दामिनी  , कड़क - कड़क कर आएगी  ,

मेरे घर  , मेरी आँखों को , चमक खूब दे जाएगी  ,

सब कुछ मेरे साथ - साथ , चमका जा तू बादरा   || 

 

मैं इंतजार करती हूँ  , आओ जल्दी आओ  ,

आते - आते इस मौसम को , तुम बदलते जाओ  ,

भीगा सा मौसम कर दो  , दिल भी भीगा तुम कर दो  ,

मुस्कानें दे जाओ , मेरे प्यारे से बादरा    ||  

 

 

Saturday, May 2, 2026

BHOR ( KSHANIKAA )

 

                              भोर 

 

भोर की लाली गगन पे छाई  ,

सूरज ने अपनी खिड़की खोली  ,

सारा जहां चमक उठा , सूरज की किरणों से  ,

पंछी भी सारे गुनगुना उठे   || 

 

पेड़ - पौधों ने ली अंगड़ाई  ,

जीव - जंतु सभी अपने काम में लग गए  ,

मानव ने भी अपनी दिनचर्या शुरु की  ,

मानो चल पड़ा जीवन  , कदम -दर -कदम  || 

 

जीवन देने वाला सूरज , कड़क हो उठा  ,

बढ़ गई गर्मी धरा पर  ,

मेहनत करने वालों का पसीना बहा  ,

और मेहनत से  , काम पूरे हुए सभी के   ||