एक से अनेक
प्यार कहो , इश्क कहो ,मोहब्बत कहो या कहो love ,
एक ही तो बात कह रहे हो दोस्त ,
दिल का ही तो मामला है दोस्त ||
दिल का मामला तो उलझनों से भरा है ,
और सरहदों में बंधक नहीं होता ,
पंछी की तरह कहीं भी उड़ जाता है दोस्त ||
कहीं भी अपना घर बनाता है ,
कहीं भी अपने दोस्त बनाता है ,
ये भी तो दिल की ,
धड़कनों को बढ़ाता है दोस्त ||