मधुर प्यार
जब भी दोस्तों ने पुकारा , हम चले आए ,
आज तो रत्नाकर ने दी आवाज , लो हम चले आए ||
लहरें उछल - उछल कर , मचल - मचल कर ,
हमारे पास में आईं , हाथ थाम कर ,
वो ले चलीं , रत्नाकर के द्वार ||
हम भी हँस दिए , उनकी चपलता पर ,
और चल दिए , रत्नाकर के द्वार ,
आज खुल गया था , रत्नाकर का द्वार ,
हमने कदम रखा अंदर , देखा उसका घर - द्वार ||
बसी थी पूरी , नई दुनिया अंदर ,
जो थी अनदेखी , अनजान मगर सुंदर ,
नन्हीं मछलियाँ , हमारे इर्द - गिर्द घूम कर ,
दिखा रहीं थीं , अपना सुंदर व्यवहार ||
लहरों और मछलियों की चपलता देखकर ,
हम तो भूल गए अपना संसार ,
डूब गए हम उस अनोखी दुनिया में ,
पाकर उन सबका प्यार , मधुर प्यार ||