महसूस
एक सखि थी हमारी , उम्र में हमसे काफी छोटी थी ,
मगर दिल के बहुत करीब थी ,उम्र रुकावट नहीं थी ||
जब भी वो दोस्त आती , तो रात को हम दोनों ,
छत पर तारों की छाँव में बैठते , मुस्कुराते थे ,
मैंने फूलों के पौधे लगाए थे , हम फूलों की महक लेते थे ,
घंटों बातें करते थे ,और खिलखिलाते थे ||
हम दोनों में प्यार का , रिश्ता इतना गहरा था ,
कि हम स्वयं को , एक -दूजे के बहुत करीब समझते थे ,
आज भी वो तारों की , छाँव याद आती है ,
आज भी वो फूलों की महक , महसूस होती है ,
आज मेरी वह सखि , इस दुनिया में नहीं है ,
ईश्वर उसकी आत्मा को शांति दें ||