मस्त - बदरा
मस्त - मस्त ओ कारे बदरा , गरज - गरज कर आया तू ,
अपनी मटकी भर लाया तू , क्या सागर खाली कर आया तू ??
तपन से धरा हो गई प्यासी , उसकी प्यास बुझा जा तू ,
सागर भी कुछ - कुछ है प्यासा , उसकी भी प्यास बुझा जा तू ||
तेरी मूसलधार बरखा से , ताल - तलैया भरते जाते ,
नदिया भी दौड़ी उछल - उछल कर , सागर की लहरें भी उछलीं ,
प्यास तो सागर की भी बुझ गई , सागर की मुस्कान बढ़ी ||
पवन ने बदरा खूब उड़ाए , दामिनी भी कड़कड़ चमकाई ,
सब के संग हम भी मुस्काए , बच्चे बरखा में खूब नहाए ,
सुन के हमारी बातों को , बदरा कैसा मुस्काय तू ??