चाय - पकौड़े
साँझ हुई सूरज गया , अपने घर दोस्तों ,
बदरा छाए , गगना भी , छिप गया दोस्तों ,
मौसम थोड़ा - थोड़ा शीतल , हो चला दोस्तों ,
ऐसे में एक - एक कप चाय ,हो जाए दोस्तों ||
पवन संग बदरा धीरे - धीरे , झूल रहे दोस्तों ,
बदरा झूलते - झूलते थोड़ी सी बूँदें , आ रहीं दोस्तों ,
ऐसे में एक - एक कप चाय , हो जाए दोस्तों ||
सूरज का अपना समय ,बदरा का अपना समय ,
बरखा भी अपने समय से , रिमझिम आती दोस्तों ,
कभी - कभी दामिनी भी , आती है दोस्तों ,
चाय के साथ - साथ , पकौड़े ,भी हो जाएँ दोस्तों ||