धन - जीवन
आज मानव - जीवन में , धन का ही मोल है ,
धन के पीछे मानव , भाग रहा है दोस्तों ,
धन ही उसके जीवन का , लक्ष्य बन गया है दोस्तों ||
धन के लिए ही वह , दूजों को दुःख देता है ,
धन प्राप्त करके , स्वयं को उच्च समझता है ,
और वह दूजों को , नीचा समझता है ||
धन - धन करता मानव , मार्ग भटक गया है ,
अपने कर्म और सोच को , मजबूत बनाकर ,
जीवन को सुंदर और ,स्वस्थ बनालो दोस्तों ||
धन जरूरी है , जीवन यापन के लिए ,
मगर धन ही सब ,कुछ नहीं है दोस्तों ,
एक रास्ता है धन , जरूरतें पूरी करने के लिए है दोस्तों ||