बचपन से
चल , चल री लेखनी , शब्दों को तू सजा दे ,
सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे ,
मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे ||
तू ही मेरी प्यारी लेखनी , शब्दों को सजाने वाली ,
तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली ,
रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली ||
चल , चल री लेखनी , दिल में खुशियाँ भर दे ,
तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे ,
उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली ||