Tuesday, September 8, 2026

ROSHAN - PUNJ ( JIVAN )

         

                      रोशन पुंज 


गगना में चमका , रोशन - पुंज सूर्य  ,

धरा का सारा संसार , रोशन हो उठा ,

जाग गए सभी जीव - जंतु , चेहरा खिल उठा  ,

चहल - पहल मच गयी  , वातावरण खुल उठा   || 


परिंदे चहक उठे  , उनकी चहक से ,

वातावरण गुंजायमान हो उठा  ,

कलियाँ खिल कर , फूल बन गईं  ,

जिनकी महक से , चमन महक उठा   || 


तितलियाँ जब  , उड़ीं फर - फर  ,

बच्चों की किलकारियाों से  , 

चमन मुखरित हो उठा  ,

सभी देखने वालों के दिल  ,

और होठों पर , मुस्कानें जग उठीं   || 


Monday, September 7, 2026

BACHPAN SEY ( PREM )


                         बचपन से 


चल , चल री लेखनी  , शब्दों को तू सजा दे  ,

सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे  ,

मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे   || 


तू ही मेरी प्यारी लेखनी  , शब्दों को सजाने वाली  ,

तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली  ,

रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली   || 


चल , चल री लेखनी  , दिल में खुशियाँ भर दे  ,

तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे  ,

उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली   || 


Sunday, September 6, 2026

SAMAAN ( PREM )

  

                                समां 


होठों पे मुस्कान सजा लो ,

दिल से मलाल निकालो  ,

महफिल में तभी तो रंग खिलेगा  ,

पैरों को थोड़ा थिरका लो ,

कदमों को ना लड़खड़ाओ ,

महफ़िल में तभी तो रंग भरेगा   || 


दिल ही दिल में मत ,

गीत गुनगुनाओ  ,

थोड़ी तो तान सजाओ  ,

संगीत संग शब्दों को  ,

तुम गुनगुनाओ ,

महफिल में हर कोई  , गुनगुनाएगा  || 


ऐसा तभी तो होगा दोस्त  ,

जब सभी मुस्काएँगे  ,

मुस्कुराहटें फैलाएँगे ,

जिंदगी पूरी ही खिल जाएगी दोस्त मेरे  ,

महफिल में तभी  तो  समां बँधेगा  || 

Saturday, September 5, 2026

INDRADHANUSH ( KSHANIKAA )

 

                                इंद्रधनुष 

 

मेरी खिड़की से झाँका  जो आज ,  इंद्रधनुष  ,

उसने तो कर दिया सखि री मेरे  , दिल को खुश   || 

 

चमक उठे मेरे नयना देख कर , इंद्रधनुष  ,

मचल उठा मेरा दिल , लेने को उसका , अक्स   || 

 

छाए हुए थे घने बदरा , गगना में जब आया , ये मेघधनुष  ,

जब हमने लिया सखि री उसका  ,  अक्स   || 

 

इतना सुंदर , सतरंगा जब गगन पे उभरा , वह इंद्रायुध ,

हम भूल गए इस दुनिया को देखकर , वह इंद्रायुध  || 

 

कुछ ही पलों में सखि री , बरखा बरसी , मूसलाधार  ,

और गुम हो गया , हमारा वो प्यारा सा , इंद्रधनुष   ||  

 

Friday, September 4, 2026

CHAANDNII ( CHANDRAMAA )


                             चाँदनी 


चाँदनी ने कहा चाँद से  ,

" तू है चाँद मेरा , मैं हूँ तेरी चाँदनी  ,

मैं तो चमकती हूँ सजना , पा के तेरी रोशनी  || 


तेरी मुस्कान से ही तो , मैं चमक जाती हूँ  ,

साथ ही दूजों को भी तो  , मैं चमका जाती हूँ  || 


रात के आँचल में , छिप गया है सारा जग  ,

मैं ही अपना आँचल देकर , जग को चमका जाती हूँ  || 


रात के अँधियारे की चादर तो , जग की मुस्कान रोक देती है ,

तो चाँदनी जगवालों के होठों पे , मुस्कान देती जाती है  || "


 मैं तो चाँद और चाँदनी , दोनों की ही दोस्त हूँ  ,

और उनकी दोस्ती में , मैं तो मस्त हूँ दोस्तों   || 

Thursday, September 3, 2026

KAANHA ( PREM )

 

                                 कान्हा 

 

कान्हा , ओ कान्हा आओ ना  , 

बंसी मधुर बजाओ ना  ,

सब बंसी की तान को तरसें  ,

उनको तान सुनाओ ना   || 

 

नंद गाँव में तो कान्हा ,

माँ यशोदा बाट जोहतीं ,

सारी की सारी वहाँ गोपियाँ ,

जुड़कर तुम्हारी राहें तकतीं ,

उन समझो दर्शन दे जाओ ना  || 

 

मधुबन में राधा रानी पुकारे ,

कब आओगे कान्हा हमारे  ?

राधा की पुकार तो सुनलो कान्हा  ,

दौड़ के मधुबन में आओ ना  ,

मीठी तान सुनाओ ना  ,

बरसों बीते आ जाओ ना   || 

 

Wednesday, September 2, 2026

CHITRAKAARII ( JALAD AA )


                      चित्रकारी  


बदरा लाए इतना पानी , क्या सागर खाली किया  ?

झम - झम पानी बरसाया , तुमने हर पार्क , हर गली ,

क्या तुम थकते नहीं बदरा , इतना पानी लाते  ?

पानी भरते , उठाते , लाते और बरसाते , थके या नहीं  ?? 


गगना में हवा ने झुलाया , दामिनी ने चमकाया ,

तुमने रिमझिम जल बरसाया  ,

तो धरा पे हरियाली छाई  , मानो धरा मुस्कुराई  ,

जगवासियों ने मुस्कानें फैलाईं   || 


रवि किरणों ने बदरा पे , अपना जाल बिछाया ,

अलग - अलग रंगों से , चित्रकारी को सजाया  ,

रिमझिम के कुछ समय बाद ,

गगना में इंद्रधनुष मुस्कुराया   ||