नाटक
मन जब शांत होता है , तो सब कुछ सुंदर लगता है ,
मन की खुशी में एक बूँद भी , रिमझिम बरखा लगती है ,
मन के अशांत होने पर , रिमझिम बरखा भी नहीं सुहाती ||
तुलना किसी से ना करो , हर कोई अलग ही होता है ,
एक ही पेड़ के फूलों और ,
फलों की महक और स्वाद अलग होता है ,
हाथ की अँगुलियाँ भी अलग होती हैं ||
किसी की नफरत से बंद द्वार को , तुम खोल नहीं सकते ,
उसने अंदर से कुंडी बंद की है , तो तुम भी ,
दूसरी तरफ से कुंडी , बंद कर दो दोस्तों ||
अकेले रहना पड़े , तो रह लो दोस्तों ,
मगर ऐसे लोगों का , साथ मत लो ,
जो अपना होने का , नाटक करते हों दोस्तों ||