Thursday, July 23, 2026

PRAJAATIYAAN ( KSHANIKAA )

 

                                 प्रजातियाँ 

 

दुनिया में मानव हैं  , जीव - जंतु हैं  , 

प्रकृति है  ---- 

पेड़ - पौधे , पहाड़ , नदियाँ , झरने , समंदर हैं ,

ये  सब तो सभी जानते हैं  दोस्तों   || 

 

जरा तांत्रिकों  से पूछो दोस्तों और कौन हैं  ?

परी हैं ,भूत हैं  , पिशाच हैं  , राक्षस हैं  , चुड़ैल हैं  ,

ये सब आपने देखे हैं क्या  ?

अगर देखे हों , तो हमें भी दिखाना या बताना ,

हमने कहानियाँ पढ़ी हैं दोस्तों   || 

 

ये अलग तरह की प्रजातियाँ ,

हम तो देख नहीं सकते , 

अगर देख लें , तो पहचान नहीं सकते  ,

इन्हें तो तांत्रिक ही , देख और पहचान सकते हैं   || 

 

हमें इन प्रजातियों के बारे में  ,

कुछ भी ज्ञान नहीं है दोस्तों  ,

तो अब लिखना बंद करती हूँ  ,

ठीक है ना दोस्तों  , विदा दोस्तों   || 

 

 

Wednesday, July 22, 2026

BHAAGYA - KARM ( KSHANIKAA )

 

                              भाग्य  - कर्म  

 

जो हमने भाग्य से पाया दोस्तों  , वह जीवन नहीं  ,

एक उपहार है , उस रचेता का  ,

जीवन तो वह है दोस्तों  , जो हमने अपने कर्मों से पाया है  ,

अपने कर्मों से बनाया है  , कर्म ही जीवन को बनाते हैं   || 

 

कर्म वही करो दोस्तों जो  , तुम्हारे और  ,

तुम्हारे अपनों के लिए , लाभकारी हों  ,

जो सबके दिल और दिमाग को शांति  दें  ,

जो सबके होठों पर , मुस्कानें सजा दें   || 

 

आओ   दोस्तों    थामो हाथ , अपने दोस्तों का  ,

और कर्म करने की  , लिस्ट बनाकर ,

आगे बढ़ो , कर्म करो  ,

और जीवन को सुंदर बना लो दोस्तों  ||  

 

 

Tuesday, July 21, 2026

MANJIL ( KSHANIKAA )

 

                                 मंजिल 

 

जीवन की राह पर कदम बढ़ाने  ,

पर मोड़ जो आते हैं  ,

पहला मोड़ हम पूरा कर लेते हैं  ,

होठों पर मुस्कान लिए  ,

आगे का मोड़ हम , खुद लेते हैं या नहीं  ?

कई बार वह मोड़  , वक्त ही ले आता है  || 

 

ये मोड़ हमें बहुत , कुछ सिखा जाते हैं  ,

कभी - कभी हालात ही  , मोड़ पार करना सिखाते हैं  ,

कई बार मंजिल भी , मोड़ में बदलाव लाती है  ,

अगर मंजिल बदल जाए  , तो मोड़ भी बदलेंगे  ,

इसलिए पहले मंजिल को निर्धारित करो  ,

तभी मोड़ भी उसी  अनुसार होंगे   ,

और सरलता से , तुम्हें मोड़ पार कराएँगे  || 

 

Monday, July 20, 2026

BAANTO ( KSHANIKAA )

 

                               बाँटो 

 

दोष तो सभी में होते दोस्तों  , ध्यान ना देना कभी  ,

ध्यान दोगे तो उसका नहीं  , अपना ही चैन गँवाओगे  ,

वो तो चैन से सोएगा तुम , नींद  अपनी  गँवाओगे  ,

भूल जाओगे दूजों को दोस्तों  , तो नींद में खो जाओगे   || 

 

शांत  करो अपने  मन को  , दिल की नैया को संभालो  ,

शांति को तुम दोस्तों  , अपने दिल में बसा लो  ,

दिल की शांति को , मुस्कान के रूप में  ,

होठों पर  सजा लो दोस्तों   || 

 

अगर तुम चाहो तो दोस्तों  ,

बाँटो मुस्कानें दोस्तों में  ,

ये मुस्कानें ही तो , उनके होठों पे सजेंगी  ,

उसी से तो तुम दोस्तों  , जीवन अपना महकाओगे   ||  

 

Sunday, July 19, 2026

PARCHHAAIN ( JIVAN )

                                     परछाईं  

  

हमारी परछाईं , हरदम  हमारे साथ चलती है  ,

कोई और नहीं हमारे साथ , ना दोस्त , ना घरवाले  ,

मगर परछाईं हमारा , पीछा नहीं छोड़ती है   || 

 

एक दिन हमने परछाईं से , पूछ ही लिया दोस्तों  ,

तुम क्यों हमारे साथ चलती जाती हो  , क्या तुम दोस्त हो  ?

नहीं  !  परछाईं ने कहा   ,

क्या तुम मेरी रिश्तेदार हो  ? मैंने कहा  ,

नहीं  !  परछाईं ने कहा  ,

तो क्यों मेरा पीछा करती हो  ?  मैंने कहा  || 

 

मैं तो तुमसे  ही जुड़ी हूँ , 

बताओ और कौन है   ?

जो तुमसे जुड़ा है  ? तुम्हारे साथ रहता है  ? 

दोस्तों  उसने  सच कहा  ,  कोई नहीं है अपना  ,

परछाईं ही तो अपनी है   || 

 

 

Saturday, July 18, 2026

NAATAK ( KSHANIKAA )

 

                                  नाटक   

 

मन जब शांत होता है  , तो सब कुछ सुंदर लगता है  ,

मन की खुशी  में एक बूँद भी , रिमझिम बरखा लगती है  ,

मन के अशांत होने पर , रिमझिम बरखा भी नहीं सुहाती   || 

 

तुलना किसी से ना करो , हर कोई अलग ही होता है  ,

एक ही पेड़ के फूलों और ,

फलों की महक और स्वाद अलग होता है ,

हाथ की अँगुलियाँ भी अलग होती हैं   || 

 

किसी की नफरत से बंद द्वार को , तुम खोल नहीं सकते ,

उसने अंदर से कुंडी बंद की है , तो तुम भी ,

दूसरी तरफ से कुंडी , बंद कर दो  दोस्तों   || 

 

अकेले रहना पड़े , तो रह लो दोस्तों  ,

मगर ऐसे लोगों का , साथ मत लो  ,

जो अपना होने का  , नाटक करते हों दोस्तों   ||  

 

 

 

Friday, July 17, 2026

BHAAVNAAEN ( KSHANIKAA )

 

                              भावनाएँ 

 

समय बहुत ही कीमती है दोस्तों  , व्यर्थ ना गँवाना , 

 मगर  क्या आप  जानते हैं  ? उससे भी कीमती है कुछ ,

क्या है वह दोस्तों  ? सोचो तो जरा तुम  || 

 

वह हैं दोस्तों हमारी भावनाएँ  ,

समय गुजरता जाता है  , उसे रोक नहीं सकते  ,

मगर क्या हम अपनी , भावनाओं को रोक सकते हैं  ?

नहीं दोस्तों  हम  , कुछ नहीं कर सकते हैं   || 

 

जिस से हमारे  भावों ने जोड़ दिया  , उसे हम भूल नहीं सकते ,

जिससे हमारे भावों ने दूर किया  , उसे हम जोड़ नहीं सकते  ,

 दोस्तों भाव सबसे कीमती हैं  , समय से भी कीमती   ||