Kaavyataru
Friday, September 11, 2026
DHEERE - DHEERE ( PREM )
HAMARAA BAGEECHAA ( JIVAN )
हमारा बगीचा
एक दिन था दोस्तों , बहुत समय पहले ,
दुनिया वालों के बगीचे में , देख खिलते फूल ,
मगर ना हमारे पास थी , भूमि कि खिलते फूल ||
सोच - सोच कर हमने , एक सोच ली चुन ,
उसे कार्यान्वित करने को , नई सोच ली बुन ,
उसकी विधि को हमारे , दिल ने ली सुन ||
लाए हम गमले , मिट्टी और खाद ,
गमलों को हमने , अपनी छत पर जमाया ,
मिट्टी और खाद मिला , गमलों को सजाया ,
अब पौधों और बीजों को मिट्टी में जमाया ||
एक सप्ताह बीतते , अंकुरण शुरु हो गया ,
कुछ पौधे जो लगाए थे , उनका बढ़ना शुरु हुआ ,
करीब 15 - 20 दिनों में , उम्मीद के फूल खिले ,
और कुछ समय बाद , हमारा बगीचा शुरु हुआ ,
हमारा सपना पूरा हुआ , बगीचा खिल गया ||
Thursday, September 10, 2026
DIL MEIN MAHAK ( JIVAN )
दिल में महक
प्यार बाँटते चलो , प्यार बाँटते चलो ,
मुस्कानें भर लो झोली में , सभी में बाँटते चलो ,
रिमझिम सी बरखा आई , तो दिल बोला ,
ये रिमझिम भर लो दिल में , अँगना लो भिगोते चलो ||
कलियाँ जब चटखीं , फूल खिले , तो उनकी महक से ,
सारे जहां को , महकाते चलो दोस्तों ||
मुस्कानों के बाँटने से , सभी तो मुस्काए ,
रिमझिम बरखा से तो दोस्तों , समंदर लहराए ,
लहरें उनकी नाचीं , समंदर मुस्काए ,
फूलों की महक से तो , चमन सारे महके ,
जहां महका और , दिल में महक समाए ||
Tuesday, September 8, 2026
ROSHAN - PUNJ ( JIVAN )
रोशन पुंज
गगना में चमका , रोशन - पुंज सूर्य ,
धरा का सारा संसार , रोशन हो उठा ,
जाग गए सभी जीव - जंतु , चेहरा खिल उठा ,
चहल - पहल मच गयी , वातावरण खुल उठा ||
परिंदे चहक उठे , उनकी चहक से ,
वातावरण गुंजायमान हो उठा ,
कलियाँ खिल कर , फूल बन गईं ,
जिनकी महक से , चमन महक उठा ||
तितलियाँ जब , उड़ीं फर - फर ,
बच्चों की किलकारियाों से ,
चमन मुखरित हो उठा ,
सभी देखने वालों के दिल ,
और होठों पर , मुस्कानें जग उठीं ||
Monday, September 7, 2026
BACHPAN SEY ( PREM )
बचपन से
चल , चल री लेखनी , शब्दों को तू सजा दे ,
सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे ,
मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे ||
तू ही मेरी प्यारी लेखनी , शब्दों को सजाने वाली ,
तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली ,
रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली ||
चल , चल री लेखनी , दिल में खुशियाँ भर दे ,
तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे ,
उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली ||
Sunday, September 6, 2026
SAMAAN ( PREM )
समां
होठों पे मुस्कान सजा लो ,
दिल से मलाल निकालो ,
महफिल में तभी तो रंग खिलेगा ,
पैरों को थोड़ा थिरका लो ,
कदमों को ना लड़खड़ाओ ,
महफ़िल में तभी तो रंग भरेगा ||
दिल ही दिल में मत ,
गीत गुनगुनाओ ,
थोड़ी तो तान सजाओ ,
संगीत संग शब्दों को ,
तुम गुनगुनाओ ,
महफिल में हर कोई , गुनगुनाएगा ||
ऐसा तभी तो होगा दोस्त ,
जब सभी मुस्काएँगे ,
मुस्कुराहटें फैलाएँगे ,
जिंदगी पूरी ही खिल जाएगी दोस्त मेरे ,
महफिल में तभी तो समां बँधेगा ||
Saturday, September 5, 2026
INDRADHANUSH ( KSHANIKAA )
इंद्रधनुष
मेरी खिड़की से झाँका जो आज , इंद्रधनुष ,
उसने तो कर दिया सखि री मेरे , दिल को खुश ||
चमक उठे मेरे नयना देख कर , इंद्रधनुष ,
मचल उठा मेरा दिल , लेने को उसका , अक्स ||
छाए हुए थे घने बदरा , गगना में जब आया , ये मेघधनुष ,
जब हमने लिया सखि री उसका , अक्स ||
इतना सुंदर , सतरंगा जब गगन पे उभरा , वह इंद्रायुध ,
हम भूल गए इस दुनिया को देखकर , वह इंद्रायुध ||
कुछ ही पलों में सखि री , बरखा बरसी , मूसलाधार ,
और गुम हो गया , हमारा वो प्यारा सा , इंद्रधनुष ||