नाम अनेक
पहली बार पाठशाला गए हम ,जो घर के पास थी ,
एक ही गुरु जी , अलग - अलग कक्षा के बच्चे थे ||
बहुत खुशी के साथ , हम गए पाठशाला ,
मगर मन में एक विचार था , सबसे अलग ,
अगर अपना नाम बदलें हम ||
माँ ने लिखाया , मिथलेश हमारा नाम ,
दो दिन में हमारे बाबूजी , मिलने गए गुरु जी से ,
हमने बाबूजी से कहा , हमारा नाम बदलो ,
क्या लिखवाऊँ बोलो , हम बोले - ममता ||
बाबूजी ने ममता नाम लिखवाया ,
हँसे गुरु जी और नाम बदल गया ,
तीन दिन बाद हमने , पकड़ा बाबूजी का हाथ ,
गए पाठशाला और ममता से , उषा नाम कराया ,
गुरुजी और बाबूजी दोनों हँस दिए ||
उसके बाद तो हमने चुने , नए - नए नाम अपने लिए ,
सरोज ,सुषमा ,मधु ,दीपा ,गीता ,बीना , मीता ,
सभी नाम बदलवाए , मगर दोस्तों ये तो ,
बाद में पता चला , वो सभी नाम तो ,
जुबानी बदले गए थे , गुरुजी और बाबूजी ,
दो दिन एक नाम से बुलाते और , नाम बदल जाता ||
दोस्तों यह सब सोच कर तो ,
आज भी हम हँस देते हैं ,
अपनी इस सोच पर , नाम बदलवाने की ||