Friday, October 23, 2026

SACHCHAA ROLL ( KSHANIKAA )


                        सच्चा रोल 


जब ना समझे तुम  , दूजों की भावना  ,

तो कैसे चाहते हो  , मुस्कानों की कामना  ?

मुस्कान तो आती है  , जब हो सत्य की भावना  ,

समझ लो दोस्तों तुम  , दूजों की भावना  || 


कीमत तो दूजों की भावना की , होती अनमोल  ,

समझो उस कीमत को , चुका दो तुम मोल  ,

निभा लो उस भावना को  , निभा लो अपना रोल  ,

जो दिया ईश्वर ने , तुम्हें है रोल   || 


अपनी भावना समझा लो  , समझो दूजों की भावना  ,

ना करो कभी किसी की  , तुम अवमानना  ,

थाम कर हाथ दोस्तों का  , आगे बढ़ चलो  ,

तभी तो निभा पाओगे  , तुम सच्चा रोल ,

ईश्वर का दिया रोल  , सच्चा रोल  , सच्चा रोल   || 


Thursday, October 22, 2026

TADAPP ( GEET )


                           तड़प 


तड़प - तड़प के इस दिल से  , आह जो निकली  ,
क्यों तूने सजा दी प्यार की  , हमने क्या गुनाह किया  ?
हम लुट गए तेरी मोहब्बत में  , हम लुट गए   || 

तड़पने वाले जहां वालों से तू , कोई फरियाद ना कर  ,
कोई भी ना तड़प को तेरी , दूर करेगा आकर  ,
जिंदगी में पैदा हुई तड़प तो  , तेरा सुकून ले जाएगी  ,
तो संभल जा तू तड़पने वाले  , और सब्र कर , सब्र कर   || 

सुकून के साथ  , तड़पन भी जरूरी है  , 
उसी तड़पन को प्यार से  , अपना लो दोस्तों  ,
तड़पन के बाद ही तो , सुकून का मजा आएगा  ,
तो तड़पन को भी अपने  , दिल में बसा लो दोस्तों   || 

Wednesday, October 21, 2026

LAABH ( KSHANIKAA )


                       लाभ 


उम्र जो बढ़ती जाए  , तो बढ़ने दो  ,

उम्र तो बढ़ेगी ही  ,

उम्र तो एक नंबर ही है  , जो बढ़ेगा  ही ,

ये तो  सीढ़ी चढ़ता ही है , उतरता नहीं    || 


परेशान ना हो  दोस्तों , उम्र के बढ़ने से  ,

रिटायर होने पर ही तो  ,

अधूरे शौक पूरे करने का ,समय मिलता है दोस्तों  || 


समय की कमी के कारण , जो सपने पूरे नहीं हुए  ,

अब वही सपने पूरे होंगे  ,

तो दोस्तों पूरे करो अपने सपने   || 


अनुभव का खजाना , आप के पास भरपूर है  ,

उस खजाने से निकालकर , अनुभव बाँटो दोस्तों  ,

उन अनुभवों से , आने वाली पीढ़ी  ,

लाभ उठाएगी दोस्तों  , लाभ उठाएगी   || 



Tuesday, October 20, 2026

SOCH ( JIVAN )


                         सोच 


सोच - सोच के जो चले  , हर सोच है अलग  ,

एक सोच मुस्कान की , दूजी सोच है उदास  ,

कौन सी सोच अपनाओगे  दोस्तों   ?? 


दिल जो सोचे  , उससे उमड़े मुस्कान  ,

दिमाग की सोच तो  , है तर्क की खान  ,

 किस से तुम सोचोगे दोस्तों    ?? 


राह पकड़ लो सोच कर , जो चमन को जाए  ,

मिलेंगे फूल वहाँ पर  ,जो महक फैलाएँ   ,

किस तरह चुनोगे  ,राह तुम दोस्तों    ?? 


पहुँचोगे गर चमन में  , तुम फूलों के बीच  ,

महकेंगी साँसें वहाँ , जब रुकोगे फूलों के बीच  ,

सोचो जग को कैसे  , महकाओगे दोस्तों   ?? 



JINDAA - DILII ( JIVAN )


                          जिंदा - दिली  


हमने सुना था ---  जिंदगी जिंदा दिली का नाम है  ,

                   मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं    ,

       सच है दोस्तों , लंबा समय जिंदगी का बीत गया  ,

        बाकि समय , जिंदा दिली से बिताना है  ,

                  हर कदम संभल कर और  ,

              मुस्कुरा कर , मजबूती से उठाना है   || 


              जिस ओर दिल कहे चलो  ,

              दोस्तों उसी ओर बढ़े चलो  ,

             जो करने को दिल कहे  ,

            दोस्तों उसी को करते चलो   || 


         ये जिंदगी हमारी है  , जो ईश्वर ने दी  ,

          ये आशीर्वाद है , हमारे लिए दोस्तों  ,

          तो प्यार से , इसे बिताओ दोस्तों ,

        और  दोस्तों की संख्या , बढ़ा लो दोस्तों   ||  

 

Sunday, October 18, 2026

KHO GAE ( PREM )

 

                        खो गए 


प्यार - प्यार , करते - करते , तुम पे मरते - मरते ,

हम कहाँ पे आ गए दोस्तों   ?

जीवन में हँसते - हँसते  , गाते - गाते और मुस्काते ,

हम कहाँ पे खो गए दोस्तों  ?? 


जीवन का हर रास्ता अनजाना है  ,

जिसमें छिपा प्यार का खजाना है  ,

उसी खजाने को तो  ,

बताओ कैसे ढूँढना है दोस्तों    ?? 


मिला जो प्यार का खजाना , डूब जाएँगे उसमें  ,

दिल और दिमाग , दोनों ही खिलखिलाएँगे  ,

बताओ कैसे समेटें  , वो खजाना दोस्तों   ??  


Saturday, October 17, 2026

ULJHANON KAA JALAA ( KSHNIKAA )


                  उलझनों का जाला  


मकड़ी ने बुना जब जाला ,

मच्छर , मक्खी , कीड़ों के लिए  ,

मच्छर आदि मकड़ी के शिकार बन गए ,

और मकड़ी जाले बुनती गई   || 


मकड़ी खुद जाले में नहीं फँसती ,

दूसरों को ही , अपने जाले में फाँसती  ,

समझदार मकड़ी  , दूर ही जाले से रहती  ,

दूर रहकर ही , शिकार करती रहती   || 


मानव समझ , सबसे ज्यादा रखता  ,

दूजों के लिए ही , ताना - बाना बनाता रहता  ,

मगर मानव खुद ही , उसमें उलझता जाता  ,

क्यों नहीं मानव , उन उलझनों से बचता  ? 

कौन देगा  ---  इस प्रश्न का उत्तर   ?

क्या कहा आपने   --- मानव देगा   ?

वो तो खुद ही उलझा है  ---  उत्तर क्या देगा   ??