आशीष
आओ बप्पा आओ ना ,
मंगल तिलक लगवाओ ना ,
मैंने मोदक बहुत बनाए ,
रुचि - रुचि भोग लगाओ ना ||
पूजा , अर्चना की विधि मैं ना जानूँ ,
तुम ही मुझको समझाओ ना ,
ऐसी अनगढ़ भक्तिन को ,
तुम ही बप्पा अपनाओ ना ||
तुम ही सारे जग के रखवाले ,
सबको सद्बुद्धि और ज्ञान देने वाले ,
कुछ तो ज्ञान , मेरे प्यारे बप्पा ,
मुझको भी दे जाओ ना ||
आओ बप्पा आओ ना ,
अपना आशीष हम पे बरसाओ ना ,
बप्पा प्यार और आशीष बरसाओ ना ||