Wednesday, February 4, 2026

NASHEELII BARAKHAA ( JALAD AA )

 

                             नशीली बरखा 

 

जिंदगी आज भीग गई बरखा में ,

ये बरखा कैसे छिपी थी , बरखा के आँचल में  ?

बरस गई रिमझिम बन के , आज मेरे आँगन  में  ,

उसी ने भिगो दिया मेरा आँचल   || 

 

इसी रिमझिम सी बरखा ने , हमें नशे में डूबा दिया ,

चलो इसी रिमझिम को , भर लें  बोतल में  ,

जब ये बरखा बंद हो जाएगी  ,

तो उसी पानी से फिर , नशे में डूब जाएँगे   || 

 

दोस्तों क्या ऐसा नशा भी होता है  ,

जिसमें बरखा की रिमझिम डुबाती है  ,

ख्वाबों की सुंदर नगरी में वो , 

रिमझिम ही लेकर जाती है  ||  

 

ये नशा तो ना किसी शराब  है  ,

और ना ही किसी अन्य चीज में है  ,

ये तो सिर्फ बरखा की रिमझिम में है  ,

जो बरस रही है , बदरा के आँचल से  || 

 

Tuesday, February 3, 2026

KARM ( KSHANIKAA )

 

                                       कर्म 

 

घर के पते कितने भी , बदल लो यारों   ?

 छिपने की कोशिश , कितनी भी कर लो यारों  ?

कर्मों को तुम्हारा , हर ठिकाना मिल ही जाएगा  || 

 

आपके कर्मों की गंध , तेजी से फैल जाती है  ,

उसी गंध का छोर पकड़ कर  , कर्म पहुँच जाते हैं  ,

तो कर्मों को सुंदर राह पर ही ,ले जाओ यारों  || 

 

परिणाम भी कर्मों के तरीके  , पर ही मिलेंगे  ,

उसी के अनुसार ही , फूल भी खिलेंगे  ,

और उन्हीं फूलों की महक से  ,राहें महकेंगी   || 

 

Monday, February 2, 2026

ULAAHANAA ( RATNAAKAR )

 

                            उलाहना 

 

नदिया  की धार दौड़ चल  , पहुँच जा सागर - तट पर ,

तेरा मीठा पानी लेकर भी , सागर है खारा  ,

ना जाने वो कहाँ से पाता  ? 

नमक की बड़ी सी गठरी नदिया  ,

तेरे मीठे पानी को भी  , बना देता है खारा   || 

 

चल - चल - चल , मैं साथ में दौडूँ  ,

तेरे साथ - साथ मैं भी  , सागर - तट पर पहुँचू  ,

उसकी लहरों के साथ - साथ ही  ,

मैं भी उछलूँ  - कूदूँ   || 

 

सागर सदा बुलाता रहता ,मैं ही ना जा पाती  ,

उसकी चंचल - चंचल लहरें , सदा ही मुझे बुलातीं  ,

आज तो मौका आया नदिया , तेरे संग हूँ जाती  ,

सागर ने भी प्यार से , दिया एक उलाहना  ,

आज ही दूर भगाती  , उससे मैं मिल आती   || 

 

Sunday, February 1, 2026

TAAL PAR ( JIVAN )

 

                                   ताल पर 

जीवन की साँसों की डोर को , पकड़ लो  , 

दिल की धड़कन की ताल को , बढ़ा लो  ,

होठों पर सुंदर सी मुस्कान को  , सजा लो   || 

 

जिंदगी के आसमान को इंद्रधनुष से , सजा लो  ,

चमन में खिले फूलों  की खुश्बु से  , महका लो  ,

तितलियों से चमन को रंगों से  , भर लो   || 

 

होठों पर सुंदर से , मीठे से गीतों को , सजा लो  ,

उन गीतों को ,लय की चाशनी में डुबाकर , झनका लो  ,

 उन्हीं गीतों की ताल पर पैरों को  , थिरका लो  || 

 

Saturday, January 31, 2026

BINAA PANKH ( PAVAN )

 

                       बिना पंख   

 

हुई है दीवानी , ये पवना सखि  ,

संग ले उड़ी , मेरा अंचरा सखि  || 

 

कोई ना रंग है , इसका सखि ,

देती ये पूरा , अहसास है सखि  ,

पकड़ में कभी ये , ना आती सखि  || 

 

बिना पंखों के ही , ये उड़ती सखि ,

सब को ये देती , शीतलता सखि  ,

प्यार हम इसको ,करते हैं सखि   || 

 

कीमत ना जाने कोई  , इसकी सखि  ,

साँसों से देती , ये जीवन सखि  ,

साँसें तो सब की  , अनमोल हैं सखि   ||  

 

Friday, January 30, 2026

KARM - FAL ( JIVAN )

 

                           कर्म - फल 

 

धरती और गगन के बीच में  ,प्यार सभी का पले  ,

हर जीव - जंतु इन्हीं दोनों के , बीच में ही पले  ,

सारी सुविधा सभी को इन्हीं के  , बीच में मिले   || 

 

कुछ जीव तो सुंदर कर्म करें , और जीवन चले  ,

उनके सुकर्मों से उनका  जीवन , सुंदर राह चले  ,

जो यह बात ना समझे , उनका जीवन उखड़ चले   || 

 

तो जानो और समझो दोस्तों  , क्या चाहते हो तुम   ?

कैसा जीवन - यापन ,करना चाहो तुम  ?

कर्मों के अनुसार ही तो , सब को फल मिले  ,

तो सुंदर कर्म कर लो तुम  , कर लो सुंदर कर्म तुम   || 

 

Thursday, January 29, 2026

KAHAANII RISHTON KII ( KSHANIKAA )

 

                        कहानी  रिश्तों की 

 

सब जगह की रीत अलग , हर समय की रीत अलग ,

समय पुराना था , बड़े - बड़े परिवार थे ,

 मिल- जुल कर रहते थे , आज समय बदला हुआ है ,

परिवार बहुत छोटे हो गए  ,

मिलना - जुलना खत्म हो गया , सिर्फ एकल परिवार  || 

 

ना रिश्ते ना नाते हैं , ना ही पास - पड़ोसी हैं  ,

कौन मिलेगा  ? कौन चलेगा  ? साथ में सब राहों में  ,

कौन समझेगा  ? एक - दूजे की व्यथा  ,

कौन खुशी में जुड़ जाएगा  ?? 

 

तो समझ - बूझ से ले लो काम  , " एकला चलो रे  ",

इस गीत को मत अपनाओ , 

मिल - जुल कर , उस पुराने समय को अपना लो ,

दिल से दिल मिला लो ,रिश्तों को अपना लो   ||