Tuesday, March 3, 2026

FAAG ( PREM )

 

                           फाग 

 

राधा करे है , इंतजार कान्हा का ,

होरी का दिन है , कान्हा कहाँ गया री सखि  ?

कोई ना जाने , कान्हा कहाँ है   ?

कोई तो साथ दे , उसे ढूँढने में   || 

 

पल - पल बीता जा रहा  ,

सारे ग्वाले रंग उड़ा रहे  ,

गोपियाँ भी ढूँढ रहीं कान्हा को  ,

राधा पुकार -  पुकार ,बुला रही कान्हा को   || 

 

कहाँ छिपे हो कन्हाई  ?

आ जाओ , आ भी जाओ बरसाने में  ,

होरी का ये दिन कन्हाई  ,

सूखा , बेरंग ना बीत जाए   ||  

 

तभी कान्हा और ,ग्वालों की टोली  ,

दौड़ती हुई आई , अब तो  ,

राधा और गोपियों की टोली भी  ,

उनके सामने थी  , खूब  रंग बरसा  ,

और फाग खेला गया , फाग खेला गया  || 

 

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