फाग
राधा करे है , इंतजार कान्हा का ,
होरी का दिन है , कान्हा कहाँ गया री सखि ?
कोई ना जाने , कान्हा कहाँ है ?
कोई तो साथ दे , उसे ढूँढने में ||
पल - पल बीता जा रहा ,
सारे ग्वाले रंग उड़ा रहे ,
गोपियाँ भी ढूँढ रहीं कान्हा को ,
राधा पुकार - पुकार ,बुला रही कान्हा को ||
कहाँ छिपे हो कन्हाई ?
आ जाओ , आ भी जाओ बरसाने में ,
होरी का ये दिन कन्हाई ,
सूखा , बेरंग ना बीत जाए ||
तभी कान्हा और ,ग्वालों की टोली ,
दौड़ती हुई आई , अब तो ,
राधा और गोपियों की टोली भी ,
उनके सामने थी , खूब रंग बरसा ,
और फाग खेला गया , फाग खेला गया ||
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