मंजिल पा जाओ
समय की धारा में , सभी को बह जाना है ,
अपनी - अपनी मंजिल को , सभी ने तो पाना है ,
इस दुनिया की हर राह को , सभी ने पार करना है ,
हँस कर सभी ने तो , ये जीवन बिताना है ||
अपनी राहों को देख लो , समझ लो दोस्तों ,
तभी तो तुमने अपना , पहला कदम बढ़ाना है ,
जिंदगी में आए रिश्तों को ,बना तो लोगे तुम ,
मगर ये सोचकर आगे बढ़ना , किसको तुम्हें निभाना है ??
जो तुम्हें प्यार दे , तुम्हारे प्यार के बदले ,
जो तुम्हारे दो कदम के सामने ,बढ़ाए दो कदम ,
थाम लो तुम हाथ प्यार से , उसी का दोस्तों ,
क्योंकि उसी के साथ मिल कर , ये रिश्ता निभाना है ||
तभी तो समय की धारा के , पार तुम जा पाओगे ,
जीवन अपना और दूसरे का भी , सफल बना पाओगे ,
चलो तो हाथ पकड़ो , मुस्कुराओ और दोस्तों ,
मंजिल अपनी पा जाओ , मंजिल अपनी पा जाओ ||
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