मुक्तक - 2
पंछी तू दे दे पंख मुझे ,
मैं कीमत तुझे चुका पाऊँ , इतनी मेरी औकात कहाँ ?
ऋणी मैं सदा रहूँगी पंछी , तेरे ही मैं गुण गाऊँगी ,
नमन तुझे है , नमन तुझे ||
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