Sunday, March 15, 2026

MUKTAK - 2

 

                           मुक्तक - 2 

 

पंछी तू दे दे पंख मुझे ,

मैं कीमत तुझे चुका पाऊँ , इतनी मेरी औकात कहाँ  ?

ऋणी मैं सदा रहूँगी पंछी  , तेरे ही मैं गुण गाऊँगी ,

नमन तुझे है , नमन तुझे   ||  

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