Sunday, March 15, 2026

MUKTAK - 5

 

                                 मुक्तक - 5 

 

सतरंगा इंद्रधनुष ,चमका जब गगन में ,

मेरा दिल झूम उठा  , खड़े - खड़े अंगना में  ,

सारा जग नाच उठा  , प्यार भरे , मनुहार भरे राग में   ||  

No comments:

Post a Comment