मुक्तक - 5
सतरंगा इंद्रधनुष ,चमका जब गगन में ,
मेरा दिल झूम उठा , खड़े - खड़े अंगना में ,
सारा जग नाच उठा , प्यार भरे , मनुहार भरे राग में ||
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