Tuesday, March 31, 2026

LAHAREN SAAGAR KII ( RATNAAKAR )

 

                       लहरें सागर की 

 

जीवन की राहों पर  , जब दौड़ चले हम  ,

तभी तो जाना कितना सुंदर  , है ये सारा जग   ?

 

रंग भरी इस दुनिया में  , फूलों से चमन महके  ,

  उसी महक में डूब गया , ये प्यारा सा  जग  || 

 

सागर की लहरें , उछलीं - कूदीं  तट पर  ,

सागर ने दी आवाज  , मगर ना लौटीं वो वापस  || 

 

लहरों का ये देख के खेला  , सब रुके तट पर  ,

सब के होठों की  मुस्कान  , सज गई उनके मुख पर   || 

 

लहरें मुस्काईं सबकी  , देख - देख मुस्कानें  ,

लहरों ने फिर छलांग लगाई  , खूब उछल  - उछल कर   || 

 

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