लहरें सागर की
जीवन की राहों पर , जब दौड़ चले हम ,
तभी तो जाना कितना सुंदर , है ये सारा जग ?
रंग भरी इस दुनिया में , फूलों से चमन महके ,
उसी महक में डूब गया , ये प्यारा सा जग ||
सागर की लहरें , उछलीं - कूदीं तट पर ,
सागर ने दी आवाज , मगर ना लौटीं वो वापस ||
लहरों का ये देख के खेला , सब रुके तट पर ,
सब के होठों की मुस्कान , सज गई उनके मुख पर ||
लहरें मुस्काईं सबकी , देख - देख मुस्कानें ,
लहरों ने फिर छलांग लगाई , खूब उछल - उछल कर ||
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