Sunday, March 15, 2026

DILLII SE SAAGAR ( KSHANIKAA )

 

                        दिल्ली  से सागर 

 

दिल्ली है ये दिल्ली , दिल्ली है दिल वालों की ,

हम जैसे मतवालों की , बस गए हम दिल्ली में  ,

सपने पलते गए दिल्ली में  , पूरे हुए हमारे सपने  || 

 

तभी एक आवाज है आई , सागर ने आवाज लगाई  ,

आ जाओ , आ भी जाओ , और हम दौड़ चले  ,

सागर के प्यार में खो गए , डूब गए  ,

सपने बदले , पलते गए , और पूरे हुए   || 

 

तभी दिल्ली ने पुकारा , एक बार तो आजा ,

आए हम और प्यार में  , फंस गए  दिल्ली में ,

सागर ने कहा ,जोर से पुकारा ,ऐ - दोस्त  ,

वापस लौट कर आ  , वहाँ मत रुकना , 

और  हम लौट आए  , हम लौट आए   || 

 

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