चाँदनी
चाँदनी ने कहा चाँद से ,
" तू है चाँद मेरा , मैं हूँ तेरी चाँदनी ,
मैं तो चमकती हूँ सजना , पा के तेरी रोशनी ||
तेरी मुस्कान से ही तो , मैं चमक जाती हूँ ,
साथ ही दूजों को भी तो , मैं चमका जाती हूँ ||
रात के आँचल में , छिप गया है सारा जग ,
मैं ही अपना आँचल देकर , जग को चमका जाती हूँ ||
रात के अँधियारे की चादर तो , जग की मुस्कान रोक देती है ,
तो चाँदनी जगवालों के होठों पे , मुस्कान देती जाती है || "
मैं तो चाँद और चाँदनी , दोनों की ही दोस्त हूँ ,
और उनकी दोस्ती में , मैं तो मस्त हूँ दोस्तों ||
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