Monday, September 7, 2026

BACHPAN SEY ( PREM )


                         बचपन से 


चल , चल री लेखनी  , शब्दों को तू सजा दे  ,

सुंदर से मीठे शब्द , तू ही यहाँ सजा दे  ,

मुस्कानों को तू , सबके होठों पर सजा दे   || 


तू ही मेरी प्यारी लेखनी  , शब्दों को सजाने वाली  ,

तू ही तो है मेरी , बचपन से ही सहेली  ,

रंग भरे इंद्रधनुषी शब्दों से , मुस्कान लाने वाली   || 


चल , चल री लेखनी  , दिल में खुशियाँ भर दे  ,

तू अपने शब्दों से ही तो , दिल में कलियाँ खिला दे  ,

उन शब्दों से ही तो , खिलखिलाहटें जगने वाली   || 


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