भाव
राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने ,
बहुत सुंदर भावों को , व्यक्त किया अपनी लेखनी से ,
" जो भरा नहीं है भावों से , बहती जिसमें रसधार नहीं ,
वह ह्रदय नहीं है पत्थर है , जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं "||
दोस्तों ह्रदय को ह्रदय , बनाए रखना है तो ,
ह्रदय में भावों का , समावेश होना जरूरी है ||
ईश्वर के लिए ------ ,
एक भक्तिभाव जरूरी है ,
ईश्वर के लिखे विधान के लिए ,
ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास ,
जो कुछ ईश्वर ने हमें दिया , उसके लिए ,
समर्पण और धन्यवाद जरूरी है ||
अपने देश के लिए ------- ,
प्यार के सम्मान के भाव जरूरी हैं ,
देश की धरा , प्रकृति ,पहाड़ ,नदियाँ ,समंदर ,
हर स्थान , हर मानव से प्यार जरूरी है ||
अपनों के लिए -------- ,
अपनों के प्यार के लिए ,
अपनों के दिए सम्मान और भरोसे के लिए ,
उनके प्रति आदर ,प्यार और विश्वास जरूरी है ||
ये भाव जब दिल को भर देंगे ,
तो दिल में सभी के लिए ,
प्यार ही उत्पन्न होता है ,
विश्व में सभी के लिए ,
प्यार और सम्मान का भाव जरूरी है ,
समझो दोस्तों --- विश्व बंधुत्व जरूरी है ||
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