चलो चलें
चलो चलें हम गाँव में दोस्तों ,
पीपल की ठंडी छाँव में दोस्तों ,
नदिया की छोटी नाव में दोस्तों ,
मँझधारों के सामने दोस्तों ||
शहरों का जीवन भी क्या जीवन ?
कंक्रीट के जंगल में ,बसा हुआ जीवन ,
ना हरियाली , ना शीतल , मंद पवन ,
तो कैसे लगेगा , हमारा मन दोस्तों ??
तो गाँवों का सुंदर , सादा अपनाओ जीवन ,
साँसों में बसा लो वहाँ की , शीतल , मंद पवन ,
नदिया की लहरों में , अठखेली करता मन ,
उसी खेल में डूब जाएगा , मेरा मन दोस्तों ||
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