Saturday, September 5, 2026

INDRADHANUSH ( KSHANIKAA )

 

                                इंद्रधनुष 

 

मेरी खिड़की से झाँका  जो आज ,  इंद्रधनुष  ,

उसने तो कर दिया सखि री मेरे  , दिल को खुश   || 

 

चमक उठे मेरे नयना देख कर , इंद्रधनुष  ,

मचल उठा मेरा दिल , लेने को उसका , अक्स   || 

 

छाए हुए थे घने बदरा , गगना में जब आया , ये मेघधनुष  ,

जब हमने लिया सखि री उसका  ,  अक्स   || 

 

इतना सुंदर , सतरंगा जब गगन पे उभरा , वह इंद्रायुध ,

हम भूल गए इस दुनिया को देखकर , वह इंद्रायुध  || 

 

कुछ ही पलों में सखि री , बरखा बरसी , मूसलाधार  ,

और गुम हो गया , हमारा वो प्यारा सा , इंद्रधनुष   ||  

 

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