इंद्रधनुष
मेरी खिड़की से झाँका जो आज , इंद्रधनुष ,
उसने तो कर दिया सखि री मेरे , दिल को खुश ||
चमक उठे मेरे नयना देख कर , इंद्रधनुष ,
मचल उठा मेरा दिल , लेने को उसका , अक्स ||
छाए हुए थे घने बदरा , गगना में जब आया , ये मेघधनुष ,
जब हमने लिया सखि री उसका , अक्स ||
इतना सुंदर , सतरंगा जब गगन पे उभरा , वह इंद्रायुध ,
हम भूल गए इस दुनिया को देखकर , वह इंद्रायुध ||
कुछ ही पलों में सखि री , बरखा बरसी , मूसलाधार ,
और गुम हो गया , हमारा वो प्यारा सा , इंद्रधनुष ||
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