धीरे - धीरे
जहां की मुसीबतों से , पीछा छुड़ा लोगे ,
कोई कुछ भी बोले बंद तुम , कान कर लोगे ,
अपने दिल की बातें दिल में ,ही छुपा लोगे ||
दुनिया वालों का तो काम है , कुछ भी कहना ,
तब अपने कानों में तुम , थोड़ी सी रुई रखना ,
फिर मजे से तुम दोस्तों , मुस्कुराते रहना ,
तभी तो तुम मजे से , जीवन बिता लोगे ||
दोस्तों ये जिंदगी तुम्हारी है , मत भूलो यह बात ,
दिन के बाद आती है , हमेशा रात ,
चैन की नींद सो जाओगे , बीतेगी रात ,
सुबह को उठो तो खूब , खिलखिला लोगे ||
बगीचे की घास पर चलो , नंगे पैर धीरे - धीरे ,
मानो चल रहे हो तुम ,नदिया के तीरे ,
समेटो फूलों की महक अपनी , साँसों में धीरे - धीरे ,
फूलों पे जमी ओस की बूँदें , होठों पे तुम समेट लोगे ||
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