अँखियाँ
अँखियों री अँखियों , मेरी प्यारी सखियों ,
सारी दुनिया तुम ही दिखातीं ,
सभी रंगों का अहसास दिलातीं ||
नींद आने पर , रात्रि के पहर में ,
तुम तो बंद हो जातीं ,
मगर रात भर तुम मुझको ,
सुंदर स्वप्न दिखाती जातीं ||
स्वप्न दिखाते - दिखाते तुम ,
सारी दुनिया की सैर करातीं ,
जो जगहें हमने ना देखी हों ,
उनकी भी तुम तो सैर करातीं ||
प्यारी सखियों , मेरी अँखियों ,
जीवन के आकाश में तुम ,
इंद्रधनुष भी सजा जातीं ,
वह इंद्रधनुष , जिससे तुम ,
हमें क्या ,आकाश को भी रंग जातीं ??
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