Tuesday, September 22, 2026

DHARAA - GAGAN ( JIVAN )


                       धरा - गगन 


किया बिछौना धरती को , हमने ओढ़ा आसमान  ,

दोनों ने ही दिया हमको  , पूरा आराम समान  ,

हमारे दिल में आराम का , हुआ घमासान  || 


सभी पेड़ - पौधों का , हमने किया सम्मान ,

फूलों के रंगों और  खुश्बु का , हमने किया सम्मान ,

तितलियों की उड़ान और सुंदरता , लगी हमें समान  || 


परिंदों की मीठी आवाज में , सुना हमने गान  ,

उनका ये गान तो उनको , बना गया महान  ,

अपनी धरती माँ तो , खुद ही है महान  ,

गगन से दूरी धरा की , नहीं होता मिलान  || 



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