धरा - गगन
किया बिछौना धरती को , हमने ओढ़ा आसमान ,
दोनों ने ही दिया हमको , पूरा आराम समान ,
हमारे दिल में आराम का , हुआ घमासान ||
सभी पेड़ - पौधों का , हमने किया सम्मान ,
फूलों के रंगों और खुश्बु का , हमने किया सम्मान ,
तितलियों की उड़ान और सुंदरता , लगी हमें समान ||
परिंदों की मीठी आवाज में , सुना हमने गान ,
उनका ये गान तो उनको , बना गया महान ,
अपनी धरती माँ तो , खुद ही है महान ,
गगन से दूरी धरा की , नहीं होता मिलान ||
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