Wednesday, August 5, 2026

RAAT KAA SAMAA ( CHANDRMAA )


                          रात  का समां 


रात का अँधियारा  छाया , धरा और गगना में ,

धरा ने दी आवाज , जो पहुँची गगना तक  ,

चाँद ने सुनी , वह गगना में चमका ,

तारे भी दौड़े - दौड़े आए , चाँद के साथ दोस्तों   || 


धरा मुस्काई उन्हें देखकर  ,

चाँदनी की ओढ़नी , धरा ने ओढ़ी ,

  सारा  जग चमचमा उठा , चाँदनी की चमक से  ,

अँधियारा दूर हुआ , चाँदनी की चमक से दोस्तों  || 


जगवासी रात के अँधियारे में , ये चमक देख मुस्काए ,

उन  सभी की आँखों में , उतर आई एक चमक ,

दिल सभी के गुनगुना उठे , साथ मिलकर  ,

ये ही रात का प्यारा समां है दोस्तों   || 

No comments:

Post a Comment