टेलीपैथी
दिल ले करीब जो होते हैं , वही सच्चे दोस्त होते हैं ,
जो हम को समझते हैं , हम जिनको समझते हैं ,
आपस में हम मुस्कानें बाँटते हैं ||
रहें पास या दूर , मगर यादों में बसते हैं ,
कभी भूले नहीं जाते , दिल में समाए रहते हैं ,
उदासियों में वही दोस्त , तो साथ देते हैं ||
नहीं जरूरत होती फोन , या मैसेज की दोस्तों ,
दिल से निकलने वाली , तरंगों से ही काम लेते हैं ,
उसी को तो दोस्त , टेलीपैथी कहते हैं ||
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