खारे - खारे
पिया नदिया का पानी , मीठा और शीतल ,
गर्मी से आया पसीना , नमकीन सा ,
दर्द में निकले आँसू , नमकीन से ,
जा मिले सागर से , खारे - खारे सागर से ||
कहाँ से आया नमक , आँसू में ?
कहाँ से घुला नमक , पसीने में ?
बड़ा सवाल तो यह है दोस्तों ,
कहाँ से आया ढेर सारा , नमक सागर में ??
नदिया का जल मीठा - मीठा ,
बरखा का जल मीठा - मीठा ,
सागर ने कहाँ से मँगा लिया ?
इतना सारा नमक , जो कर गया उसे नमकीन ||
इतना फर्क कहाँ से आया ?
किसने फर्क किया ?
क्या सागर या नदिया ?
छोड़ो , क्या हम करेंगे जानकर ? ?
आज प्यार की मुस्कानें जोड़ो ,
यही बहुत कीमती हैं दोस्तों ,
मेरी मुस्कान और तेरी मुस्कान , सभी की मुस्कान ||
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