अधाता -- परिचय
मैं तो हूँ सीता सखि , सीता ही हो तुम ,
यहाँ अधाता में हैं , मिले हम और तुम ,
सीता का पर्यायवाची ही हैं हम ||
हमारी मार्गदर्शक हैं , एक बहती बयार सी ,
मीठे बोल सी , जो ध्यान रखतीं सभी का ||
भोर की लालिमा सी , सुंदर , निर्मल , कोमल ,
मधुर , मंजुल सी , सखियाँ मिलीं ||
चंपई फूल खिले हैं यहाँ ,
कृष्ण की गीता , विष्णु की लक्ष्मी यहाँ ||
शुद्ध प्यार बरसाने वालियाँ ,
उस ईश्वर की , मित्रों की चित्र कथाएँ हैं यहाँ ||
अधाता की मंदाकिनी में , हंस भी आते हैं ||
यहाँ के प्रकाश में ,अपनी आँखों से ,
तुम देख लो सखियों , देख लो सखियों ||
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