संदेसा
संदेसा क्या होता है दोस्तों ?
अपने दिल की बात , मोबाईल पर लिखकर ,
भेजना ही , आज की भाषा में संदेसा होता है ,
अब से बहुत साल पहले , पत्र में दिल की बात ,
लिखकर भेजना ही , संदेसा कहलाती थी ||
तब तो संदेसा पहुँचने में , कई दिन लगते थे ,
संदेसे का जवाब तो , एक सप्ताह से पहले ,
नहीं मिल पाता था ,
मगर आज का संदेसा तो , फौरन ही पहुँच जाता है ||
मगर क्या आज का , संदेसा दिल की आवाज ,
पहुँचाती है , नहीं दोस्तों ?
पत्र में लिखे संदेसे में तो ,
दिल के भाव भी पहुँचते थे ,
तो असली संदेसे तो , वही पुराने थे दोस्तों ||
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