Sunday, August 2, 2026

MADHUR PYAAR ( RATNAAKAR )

 

                              मधुर  प्यार 

 

जब भी दोस्तों ने पुकारा  , हम चले आए  ,

आज तो रत्नाकर ने दी आवाज  , लो हम चले आए   || 

 

लहरें उछल - उछल कर  , मचल - मचल कर ,

हमारे पास में आईं , हाथ थाम कर  ,

वो ले चलीं , रत्नाकर के द्वार  || 

 

हम भी हँस  दिए , उनकी चपलता पर  ,

और चल दिए , रत्नाकर के द्वार  ,

आज खुल गया था  , रत्नाकर का द्वार  ,

हमने कदम रखा अंदर  , देखा उसका घर - द्वार  || 

 

बसी थी पूरी , नई दुनिया अंदर  ,

जो थी अनदेखी , अनजान मगर सुंदर  ,

नन्हीं मछलियाँ , हमारे इर्द - गिर्द घूम कर  ,

दिखा रहीं थीं  , अपना सुंदर व्यवहार   || 

 

लहरों और मछलियों की चपलता देखकर  ,

हम तो भूल गए अपना संसार  ,

डूब  गए  हम उस  अनोखी दुनिया में  ,

पाकर उन सबका प्यार  , मधुर प्यार   || 

 

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