Monday, August 17, 2026

CHAAI - PAKAUDEY ( JIVAN )


                                   चाय - पकौड़े 


साँझ हुई सूरज गया  , अपने घर दोस्तों  ,

बदरा छाए , गगना भी , छिप गया दोस्तों ,

मौसम थोड़ा - थोड़ा शीतल , हो चला दोस्तों ,

ऐसे में एक - एक कप चाय ,हो जाए  दोस्तों  || 


पवन संग बदरा धीरे - धीरे , झूल रहे दोस्तों ,

बदरा झूलते - झूलते थोड़ी सी बूँदें , आ रहीं दोस्तों  ,

ऐसे में एक - एक कप चाय , हो जाए दोस्तों   || 


सूरज का अपना समय ,बदरा का अपना समय ,

बरखा भी अपने समय से , रिमझिम  आती दोस्तों  ,

कभी - कभी दामिनी भी  , आती है  दोस्तों ,

चाय के साथ - साथ , पकौड़े ,भी हो जाएँ  दोस्तों  || 




 




 

No comments:

Post a Comment