Tuesday, August 25, 2026

NINDIYAA ( KSHNIKAA )


                            निंदिया 


रोज तू सुलाती थी ,आज तू आई क्यों नहीं  ?

रोज तू सपने दिखाती थी , आज तू लाई क्यों नहीं  ?

निंदिया तू इतनी , कठोर क्यों हो गई   ?? 


पूरे दिन में काम करते , हम थक जाते हैं  ,

पूरे दिन में  हम  , व्यस्तता में रहते हैं  ,

मगर अब रात में तूने हमें  , सुलाया क्यों नहीं   ?? 


आज तो तू आजा री निंदिया  , रात आ गई  ,

हमारी थकावट भी कह रही है , रात आ गई  ,

तो आजा तू हमारी आँखों में  , अब रात आ गई   || 



  






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