निंदिया
रोज तू सुलाती थी ,आज तू आई क्यों नहीं ?
रोज तू सपने दिखाती थी , आज तू लाई क्यों नहीं ?
निंदिया तू इतनी , कठोर क्यों हो गई ??
पूरे दिन में काम करते , हम थक जाते हैं ,
पूरे दिन में हम , व्यस्तता में रहते हैं ,
मगर अब रात में तूने हमें , सुलाया क्यों नहीं ??
आज तो तू आजा री निंदिया , रात आ गई ,
हमारी थकावट भी कह रही है , रात आ गई ,
तो आजा तू हमारी आँखों में , अब रात आ गई ||
No comments:
Post a Comment