सरहदें
लकीरें रचेता ने सिर्फ , हाथों में बनाईं ,
एक हाथ में किस्मत की , दूसरे में अपने कर्म की ,
मानव ने लकीरें घरों में खींचीं , ये तेरा घर , ये मेरा घर ,
घरों के बाद ये लकीरें , देशों की सरहदें बना दी गईं ||
देशों में रहने वाले पहले , दोस्त हुआ करते थे ,
मगर अब सरहदों के पार , रहने वाले दुश्मन हो गए ,
दोस्तों इन लकीरों को , अपने दिलों पर ना बनाना ,
नहीं तो दिल भी दुश्मनी में ,डूबकर दूर हो जाएँगे ||
सरहदों के पार रहकर भी , मुस्कान तुम देना ,
दोस्त ना बना पाओ ,कोई बात नहीं ,
उन्हें दुश्मन ना बनाना ,
फूलों की खुश्बु , जैसा हवाओं के साथ ही ,
दूर से तुम मुस्कुरा कर , मुस्कानें बिखराओ ,
बदले में तुम भी मुस्कानें पाओगे ||
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