मंजिल
जीवन की राह पर कदम बढ़ाने ,
पर मोड़ जो आते हैं ,
पहला मोड़ हम पूरा कर लेते हैं ,
होठों पर मुस्कान लिए ,
आगे का मोड़ हम , खुद लेते हैं या नहीं ?
कई बार वह मोड़ , वक्त ही ले आता है ||
ये मोड़ हमें बहुत , कुछ सिखा जाते हैं ,
कभी - कभी हालात ही , मोड़ पार करना सिखाते हैं ,
कई बार मंजिल भी , मोड़ में बदलाव लाती है ,
अगर मंजिल बदल जाए , तो मोड़ भी बदलेंगे ,
इसलिए पहले मंजिल को निर्धारित करो ,
तभी मोड़ भी उसी अनुसार होंगे ,
और सरलता से , तुम्हें मोड़ पार कराएँगे ||
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