लस्सी
सत्य को सत्य ही रहने दो दोस्तों ,
झूठ की सीढ़ी ना चढ़ाओ उसको ,
माना आज मिलावट का जमाना है ,
मगर तुम सच - झूठ की ,लस्सी ना बनाओ दोस्तों ||
आशा और भरोसे की , लस्सी जो बनाओगे दोस्तों ,
ऐसी स्वाद लस्सी को , सबको जो पिलाओगे ,
तो प्यार और मुस्कानें , जग में फैलाओगे ||
अच्छे बोल ना बोल सको दोस्तों ,
तो बुरे शब्द भी ना बोलो दोस्तों ,
मौन रहकर मुस्कान की , लस्सी पिला दो दोस्तों ||
जिंदगी की राहें तो , बार - बार मुड़ती हैं ,
हर मोड़ एक नया , अनुभव दे जाता है ,
उन अनुभवों को , महसूस तो करो ,
मगर उनकी लस्सी , ना बनाओ दोस्तों ||
No comments:
Post a Comment