Saturday, July 18, 2026

NAATAK ( KSHANIKAA )

 

                                  नाटक   

 

मन जब शांत होता है  , तो सब कुछ सुंदर लगता है  ,

मन की खुशी  में एक बूँद भी , रिमझिम बरखा लगती है  ,

मन के अशांत होने पर , रिमझिम बरखा भी नहीं सुहाती   || 

 

तुलना किसी से ना करो , हर कोई अलग ही होता है  ,

एक ही पेड़ के फूलों और ,

फलों की महक और स्वाद अलग होता है ,

हाथ की अँगुलियाँ भी अलग होती हैं   || 

 

किसी की नफरत से बंद द्वार को , तुम खोल नहीं सकते ,

उसने अंदर से कुंडी बंद की है , तो तुम भी ,

दूसरी तरफ से कुंडी , बंद कर दो  दोस्तों   || 

 

अकेले रहना पड़े , तो रह लो दोस्तों  ,

मगर ऐसे लोगों का , साथ मत लो  ,

जो अपना होने का  , नाटक करते हों दोस्तों   ||  

 

 

 

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