Sunday, July 26, 2026

THAHAAKE ( KSHANIKAA )

 

                            ठहाके  

 

वो दिन कुछ कितने सुंदर थे  ? जब हम बच्चे थे दोस्तों  ,

ना मोबाईल , ना टी .वी .  , ना कम्प्यूटर थे दोस्तों  ,

 दोस्तों के साथ मिलकर  , खेलते थे हम दोस्तों  ,

फोन करके नहीं बुलाते थे  , आवाज दे कर बुलाते दोस्तों   || 

 

रात को छत पर साथ - साथ सोते थे  , गगना की छाँव में  ,

चाँद - तारों को देखते हुए , बातें करते हुए सोते थे दोस्तों  ,

मुस्कानों के बीच में , खिलखिलाहटें भी सजती थीं दोस्तों ,

बिना फोटो लिए ही ये यादें , जीवन भर मुस्कानें देंगी दोस्तों  || 

 

क्या गुल्ली - डंडे या कंचों की , फोटो ली गई दोस्तों  ,

मगर नाम लेते ही , चलचित्र के समान फ्लैश बैक आ जाता है  , 

लुका - छिपी और आईस - पाईस  खेलते हुए , डैन आने पर ,

सबके छिपने पर , हम तो घर जाकर बैठते  थे दोस्तों  ,

इंतजार के बाद सभी दोस्त , हमें ढूँढते हुए आते  ,

और ठहाके गूँज उठते दोस्तों   || 

 

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