Sunday, July 19, 2026

PARCHHAAIN ( JIVAN )

                                     परछाईं  

  

हमारी परछाईं , हरदम  हमारे साथ चलती है  ,

कोई और नहीं हमारे साथ , ना दोस्त , ना घरवाले  ,

मगर परछाईं हमारा , पीछा नहीं छोड़ती है   || 

 

एक दिन हमने परछाईं से , पूछ ही लिया दोस्तों  ,

तुम क्यों हमारे साथ चलती जाती हो  , क्या तुम दोस्त हो  ?

नहीं  !  परछाईं ने कहा   ,

क्या तुम मेरी रिश्तेदार हो  ? मैंने कहा  ,

नहीं  !  परछाईं ने कहा  ,

तो क्यों मेरा पीछा करती हो  ?  मैंने कहा  || 

 

मैं तो तुमसे  ही जुड़ी हूँ , 

बताओ और कौन है   ?

जो तुमसे जुड़ा है  ? तुम्हारे साथ रहता है  ? 

दोस्तों  उसने  सच कहा  ,  कोई नहीं है अपना  ,

परछाईं ही तो अपनी है   || 

 

 

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