Wednesday, July 1, 2026

PREM - PATRA ( PREM )

 

                            प्रेम - पत्र 

 

सारी धरा बन जाए कागज  , सागर बने स्याही  ,

कलम बनाऊँ पेड़ से , तभी लिख पाऊँ प्रेम - पत्र  || 

 

गगन के तारे , दिल के भाव उतारें , उस पत्र में  ,

परिंदों के स्वर , गीत का रूप लें , उस पत्र में  ,

जुगनुओं की चमक सज जाए , उस पत्र में  ,

तभी तो पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र   || 

 

जीवन प्रकृति से जुड़ा है दोस्तों  ,

उसी ने तो ये जीवन दिया है दोस्तों  ,

प्रकृति के बचने से ही , जीवन बचेगा दोस्तों  ,

दोनों बचेंगे तभी पूरा होगा , मेरा प्रेम - पत्र   || 

 

मीठे से शब्द हों  , भावों से भरे हों  ,

होठों पे मुस्कान हो , आँखों में चमक हो  ,

तभी तो प्रकृति भी मुस्कुराएगी  ,

उसी से तो पूरा होगा  , मेरा प्रेम  -  पत्र   || 

 

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