महकीं हवाएँ
हवा जो चली , चमन से गुजर कर ,
खुश्बुएँ ले उड़ी , चमन के फूलों से ,
आस - पास के रहने वालों को , परिंदों को महकाती ||
हम भी उसी हवा से , महक गए दोस्तों ,
अगर हवा ना चलती , तो खुश्बुएँ कैसे उड़तीं ?
तो दोस्तों बहने दो , हवाओं को मत रोको उनका रास्ता ||
नए - नए पेड़ लगाओ , जंगलों को मत काटो ,
तभी तो हवाएँ , चलेंगी सभी ओर ,
और खुश्बुएँ भी , उड़ेंगी सभी ओर ,
महकाएँगी सारा जहां , ये धरा , ये फलक ,
सबसे ज्यादा महकाएँगी , हमारा दिल , हमारा जीवन ||
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