Thursday, July 9, 2026

MAHAKIN HAVAAEN ( KSHANIKAA )

 

                              महकीं  हवाएँ 

 

हवा जो चली , चमन से गुजर कर  ,

खुश्बुएँ ले उड़ी , चमन के फूलों से  ,

आस - पास के रहने वालों को , परिंदों को महकाती  || 

 

हम भी उसी हवा से  , महक गए दोस्तों  ,

अगर हवा ना चलती  , तो खुश्बुएँ कैसे उड़तीं  ?

तो दोस्तों बहने दो  , हवाओं को मत रोको उनका रास्ता  || 

 

नए - नए पेड़ लगाओ , जंगलों को मत काटो  ,

तभी तो हवाएँ , चलेंगी सभी ओर  ,

और खुश्बुएँ भी  , उड़ेंगी सभी ओर  ,

महकाएँगी सारा जहां  , ये धरा , ये फलक  ,

सबसे ज्यादा महकाएँगी , हमारा दिल  , हमारा जीवन   ||  

 

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