चमचमाया
नफरतों के काँटे , क्यों उगाए तुमने ?
हमने तो प्रीत का , कमल खिलाया है ,
गगना में रवि , भोर में उदित हुआ ,
रात में चंद्रमा , चमचमाया है ||
दुश्मनी कभी , किसी से ना करना ,
दोस्ती ने मुस्कान , को जगाया है ,
जिंदगी की राहों में , हर कदम पर ,
दोस्तों ने ही , फूलों को बिछाया है ||
नदियों का पानी , शीतल और मीठा है ,
सागर ने ही , उसे खारा बनाया है ,
तुम नदी के पानी , की तरह रहो दोस्तों ,
सागर ने तुम्हें , मिलने बुलाया है ||
गगना में बदरा छाए , तो बरखा बरसी ,
बरखा ने रिमझिम , का गीत गाया है ,
गगना ने उस , रिमझिम में भी ,
इंद्रधनुष अपने , अँगना में सजाया है ||
No comments:
Post a Comment