Thursday, September 16, 2010
Nadiya
पवर्तों के शिखर से उतर कर,
धरा के प्रांगण में , टेढ़े-मेढ़े रास्तों से गुजर कर,
किनारों पर हरियाली बिछाती,
ये नदी,
बहती जा रही है , बहती जा रही है ।
अपने कलरव से वातावरण को,
गुंजायमान करती , हर बाधा पार करती,
ये नदी,
बहती जा रही है, बहती जा रही है ।
सूरज की किरणों को परावर्तित कर,
चहुँ ओर आलोक बिखराती,
ये नदी,
बहती जा रही है , बहती जा रही है ।
अपने सीने पर बहने वाली नावों में,
बैठे मुसाफिरों को पार लगाने वाली,
ये नदी,
बहती जा रही है , बहती जा रही है ।
दुनिया की गमों रूपी गंदगी को,
अपने में समेटे,
ये नदी,
बहती जा रही है , बहती जा रही है ।
हे मानव ! देख इस नदी को ,
सीख इस नदी से,
हर बाधा से गुजर कर,
हरियाली बिखरा दे , खुशहाली फैला दे ।
प्रकाशित कर इस जहाँ को ,
अपने गुणों के प्रकाश से,
रास्ता दिखा भूले को,
समेट दूसरों के दुख अपने दामन में,
तू शक्तिशाली है,
प्रकृति को जान ,
समय को पहचान ,
अपने अहं को छोङकर ,
मैं को भूलकर,
अपनी खिलखिलाहट से प्रकृति को,
गुंजायमान कर दे , गुंजायमान कर दे ।
Dagmagaate kadam
हरियाली धूप उतरी जब आँगन में ,
चिङियों की चहचहाहट को सुन ,
दो डगमगाते कदम बढ़ चले हाथ बढ़ाते ,
साथ ही नन्हीं - नन्हीं चिङियों को उङाते ,
उङती चिङियों को देख खिलखिलाते ,
उम्मीद के छोर से बँधी एक आस ,
शायद आ जाए एक चिङिया हाथ ,
हर दिन यही मंजर हर दिन यही हँसी ,
देख कर सभी होते रहे निसार ,
जीवन का है यही तो सार ,
अपने ही बचपन को देखता है मानव ,
अपने घर के आँगन में ,बेटे के रूप में ,
कल्पना कर लेता है ,
ये दो डगमगाते कदम कभी उसके थे ।
Kalpdeep
कल्पदीप
जगमगाता दीप मेरे आँगन का,
झिलमिलाता ख्वाब मेरी आँखों का,
प्यार की बीना से निकला सुर है तू,
टिमटिमाता तारा मेरी रातों का ।
पाया तुझे घर फूलों से महका मेरा,
घर आँगन में पक्षी सा स्वर चहका तेरा ,
जिन्दगी खुशहाल बनी तेरे आने से,
झनझनाता हुआ तार मेरे साजों का ।
सागर खुशियों का मिले तुझको,
जिन्दगी रंगों से भर खिल जाए,
हर सफलता को राह में पाते हुए ,
कमल खिलता रहे तेरे ख्वाबों का ।
खुशबुओं से महके चमन तेरा ,
रोशनियों से झिलमिलाए जहाँ,
प्यार मिलता रहे सभी से तुझे,
जगमगाता रहे हर दीप तेरी राहों का ।
टिमटिमाता तारा मेरी रातों का ।
पाया तुझे घर फूलों से महका मेरा,
घर आँगन में पक्षी सा स्वर चहका तेरा ,
जिन्दगी खुशहाल बनी तेरे आने से,
झनझनाता हुआ तार मेरे साजों का ।
सागर खुशियों का मिले तुझको,
जिन्दगी रंगों से भर खिल जाए,
हर सफलता को राह में पाते हुए ,
कमल खिलता रहे तेरे ख्वाबों का ।
खुशबुओं से महके चमन तेरा ,
रोशनियों से झिलमिलाए जहाँ,
प्यार मिलता रहे सभी से तुझे,
जगमगाता रहे हर दीप तेरी राहों का ।
Bheege swapn
'भीगे स्वप्न'
पूनम कीचाँदनी ने किया घर उजियाला ,
रजनीगंधा ने महक कर किया दिल मतवाला ।
प्यार भरी यादों ने किसी की ,
किया हर जनम सपनीला ।
पवन के झोंके उड़ा ले गए आँचल को ,
रिमझिम बरखा भिगो गई तन मन को ,
प्यार भरी फुहारों ने किसी की ,
भिगोया हर स्वप्न मेरा ।
रात गाती चली गीत किसी की यादों के ,
महकी है शहनाई जो फूल खिले वादों के ,
प्यार भरी पुरवाई ने मेरे ,
आँगन में रिमझिम का गीत गाया ।
आया कोई भीतर प्यार की दहलीज़ पार करके ,
सूरज की पहली किरन जो बंद आँखों से झाँके ,
किरनों के जाल बुनती हुई ,
सुनहली धूप हर्षाया |
Aaj ka such
सुनहरी चाँदनी छिटकी यहाँ पे तुम आए ,
हर तरफ रात की रानी महकी यहाँ पे तुम आए ।
जिन्दगी सज गयी एक नई दुल्हन की तरह ,
हाथों में हिना महकी यहाँ पे तुम आए ।
कल बीत गया जानम़ अलसायी शाम की तरह ,
भोर में सूरज की किरन छिटकी यहाँ पे तुम आए ।
ख्वाब जो ख्वाब जो देखे आँखों में मेरी तिरते रहे ,
पूरे करने के लिए माही यहाँ पे तुम आए ।
जीवन का जलतरगं एक मौन में था डूबा ,
उसमें उठी तरंगें जब यहाँ पे तुम आए ।
भोर अंगड़ाई ले के उठ बैठी ,
शाम को सिंदूरी आभा ले के यहाँ पे तुम आए ।
कल जो बीता एक सपना बनकर ,
आज का सच ले के यहाँ पे तुम आए ।
Wednesday, September 15, 2010
Shubhkamnaen to our daughter and son in law
ईश्वर की अनुकम्पा से सजा।
माता - पिता के आशीर्वादों से रचा ।
भाई के असीम स्नेह से भरा ।
खुशियों से भरा जीवन हो अरिवंद - कल्पना का ।
प्यार की मधुरिमा से ओत - प्रोत ।
नेह के बंधनों से बंधित हो ।
खिले कल्पना का अरिवंद ।
साकार हो अरिवंद की कल्पना ।
खुशियों के रंग बिखरे जीवन में ।
हर पल महकता रहे जीवन का ।
हर खुशी जो दुनिया को मयस्सर हो ।
सभी की सभी सजाएं तुम्हारे जीवन को |
मम्मी , पापा , भैया
4 अक्टूबर २०१०
Do roop jal ke
पार करता सरहदों को ,तोड़ता सीमाओं को,
शक्ति अपने में समेटे ,बहता रहता कल कल ,
जीवन दाता मीठा जल ।
झर झर झरा मेघों से जब , जीवंत हो उट़ठी धरा ,
रोम रोम खिल गया यूं इन्द्रधनुष बन गया ,
बन गयी फिर एक धारा ,झरती हुई बूंदें मिल ,
जीवन दाता मीठा जल ।
फूलों पे सिमटा ओस सा , सौंदर्य का वह बोध था ,
अपने में अनुपम लोच सा , सच्चाइयों का शोध था ,
सूयर् की पहली किरन से , बन गया फिर कोमल जल ,
जीवन दाता मीठा जल ।
सागर बना फिर शांत सा , रत्नों का भंडार सा ,
शक्ति का अम्बार सा , जीवन का एक संसार सा ,
हो गया नमकीन उसमें , बन गया फिर खारा जल ,
जीवन दाता मीठा जल ।
लहरों की सरगम लिए, आगे बढ़ा है जल यही ,
गाम्भीर्य की उपमा लिए , ठहराव लाया जल यही
बज उठी सरगम उसी में , बन गया इकतारा जल ,
जीवन दाता मीठा जल ।
दे कर शक्ति बिजुरी की , अलसायी दुनिया को जगाया ,
उन्नति के शिखर पर , उसने मानव को बिठाया ,
पर यही नीर जब , सुनामी का रूप ले आया ,
हँसते हुए मानव को , ज़ार - ज़ार है रूलाया ,
कहाँ गए नीर के वो , जीवन भरे मीठे पल ,
जीवन हर्ता बना मीठा जल ।
नीर की रंगीन धारा , बन गई संगीन धार ,
ले गई वह साथ अपने , मानव के घर - द्वार ,
पाया नहीं मानव ने , एक बूँद मीठा जल ,
जीवन हर्ता बना मीठा जल ।
लहरें जो सरगम सी थीं , आज वो बम बन गईं ,
जीवन देने वाली धारा ,जीवन ले कर चली गई ,
मानव के नीचे की धरा , हो गई है जलमय ,
ऐसी ही शायद मनु ने , देखी होगी जलप्रलय ,
आज भी आँखों में उनकी , है वही पीङा - जल ,
जीवन हर्ता बना मीठा जल ।
अश्रु भरी आँखों से , ढूंढता है जीवन को ,
प्यार में सराबोर , जिन्दगी के नगीने को ,
एक बूँद ओस की ,कोमल कोमल मीठा जल ,
जीवन हर्ता बना मीठा जल ।
है ज़रूरत पीङितों की , मदद करने वालों की ,
प्यार की सीमा में बँध के , साथ चलने वालों की ,
है ज़रूरत आज भागीरथ की , जो लाए फिर से ,
निर्मल - निर्मल मीठा जल ,
जीवन दाता मीठा जल ।
बढ़ा दो तुम हाथ अपना , जिंदगी की राह में ,
अंजुरी भर प्यार हो तो , बाँट दो संसार में ,
तुम बनो भागीरथ , लाओ फिर से ,
गंगा की धारा निर्मल, प्यार का शीतल जल ,
जीवन दाता मीठा जल |