Tuesday, August 25, 2020

BATCHEET ( SHO STO )

  बातचीत 


चुप हैं वो  ,मैं भी चुप ,

बात ही न है ,तो कैसे चलेगी चीत ?

बातचीत ,बातचीत बातचीत |

हीं है ,ना उनकी ,ना मेरी ,जब बात नहीं

वो जब बोलेंगे ,तो मैं जवाब दूँगी ,

मैं जब बोलूँगी ,तो वो जवाब देंगे ,

तभी तो चलेगी दोनों की ,

बातचीत ,बातचीत ,बातचीत |

 


प्रतिलिपि में दोस्तों ,

कुछ तुम सुनाओ ,कुछ मैं सुनाऊँ ,

आगे तभी बढ़ेगी ,हम सब की ,

बातचीत ,बातचीत ,बातचीत |


चुप्पी तो बेहतर है ,बड़बोलेपन से ,

मगर बातचीत बेहतर है ,

अपनों से अपनेपन से ,

आप सब अपने हो ,तो बेहतर है ,

बातचीत ,बातचीत ,बातचीत |

 

vaimpair ( sho sto )

        वैम्पायर 


वैम्पायर है कौन ?शायद भटकती आत्मा ?

मृत्यु के बाद ,आत्मा पुनर्जन्म ना ले ,

यूँ ही भटकती रहे ,अंतरिक्ष में ,

दिखाई यदि दे जाए मानव को ,

एक साया सा ,उसे ही मानव ,

वैम्पायर कह देता है |


मानव की जिंदगी में ,उस समय ,

अगर कुछ बुरा होता है ,

उसे वह उस साये के साथ ,

जोड़ देता है ,उसे बुरा वैम्पायर कहता है ,

अगर कुछ अच्छा होता है ,

तो अपनी किस्मत कहता है |


आत्मा ,परमात्मा ,दोनों ही दिखाई नहीं देते ,

परमात्मा ही जाने ,क्या सच है ?

निद्रामग्न होकर ,हम सपने देखते हैं ,

सपनों में घूमते हैं ,नई दुनिया देखते हैं ,

ऐसे ही शायद हम ,आत्मा को देखते हैं |


कोई नहीं जानता ,क्या सच है ,क्या है सपना ?

हर सपना तो मुझको ,लगता है सिर्फ अपना ,

सपनों की दुनिया तो ,खुशनुमा है मित्रों ,

तुम भी हो जिसमें शामिल ,

खुशियाँ भी जिसमें शामिल |


मानो अगर वैम्पायर ,उसे भी मित्र बनालो ,

चंदा ,सूरज जैसे ,गपशप भी तुम लड़ालो ,

गर वो भटक रहा है ,इस सारी कायनात में ,

उसे भी तो मित्रों ,कोई तो मित्र चाहिए |

 

Monday, August 24, 2020

APNON KE AANGAN ME ( PREM )

        अपनों के आँगन में

 

 जीवन संगम है प्यार का ,प्रेम ,प्रीत के बाणों का ,

क्यों ना हम दरीचा खोलें ,दिल के अरमानों का ,

आने दें हवा के झोंके ,खोलें द्वार मकानों का ,

सूरज की किरणें दे दस्तक ,खोलें रखें खिड़कियों को |


प्रेम करें हम अपनों से ,अपनों के सपनों से ,

उनके सपनों के साथ -साथ चलके ,पूरा करें कोशिशों से ,

जब सपने उनके होंगे पूरे ,चेहरे पे नजर आएगी ख़ुशी ,

तब हम भी खिल जाएँगे ,देख के उनकी मुस्कानों को |


प्यार बढ़े कदम दर कदम ,प्रीत बनी रहे साँझी ,

हम सब बन जाएँ दुनिया में ,एक -दूसरे के माँझी ,

जीवन नैया डोले ना ,भवसागर को पार करें ,

और किसी का हो ना हो ,अपनों का उद्धार करें |


सारे जग की खुशियों से ,अपनों का दामन भरा रहे ,

चाहे कोई भी मौसम हो ,अपनों का आँगन हरा रहे ,

फूल खिलें हर रंग के ,इंद्रधनुष सा बना रहे ,

उनके दिल की धड़कन में ,संगीत का हर स्वर मिला रहे |


रुक जाए खुशियों का कारवां ,अपनों के आँगन में ,

झूले सावन के पड़े रहें ,अपनों के आँगन में ,

रंग -बिरंगी उड़ें तितलियाँ ,अपनों के आँगन में ,

प्यार के फूल रहें महकते ,अपनों के आँगन में |



 

Sunday, August 23, 2020

EK ANJANA AADMI ( SHO STO )

             आदमी अन्जाना 


एक है आहट अन्जानी सी ,नहीं है वो पहचानी सी ,

रुक -रुक कर आती है पास ,कभी -कभी जाती है दूर ,

कौन है जो आता भी है ,कभी दूर जाता भी है ?

क्या घबराता है आने से ,फिर क्यों वह जाता है दूर ?


कदम चाप है धीमे से , तेज नहीं वह होती है ,

कौन है वह अन्जाना ,हिम्मत जिसे ना होती है ?

सूर्य अस्त हो चुका पश्चिम में ,धूमिल सी रौशनी है ,

ऐसे में धुँधला सा साया ,पहचान ना जिसकी होती है |


रुकता कभी ,कभी चलता ,देख रहा वो इधर -उधर ,

जाने क्या ढूँढ रही है ,उसकी वो अन्जान नजर ?

चेहरे पर क्या भाव उजागर ,कुछ कैसे समझ में आएगा ?

इस धुँधलके में तो मित्रों ,आता नहीं है कुछ नजर |


तभी आया पास वो मेरे ,अब तो उसकी सूरत दिखी ,

पर यह तो अन्जाना था मित्रों ,पहले नहीं ये सूरत देखी ,

कैसे जानूँ ,कौन है वो ,क्या हम पहले मिले कभी ?

उसने दिया अपना परिचय ----मैं हूँ तुम्हारी प्रतिलिपि |







Monday, August 3, 2020

HAM SATH-SATH HAIN ( SHO STO )

हम साथ - साथ हैं

सबसे पहले
 पति -पत्नी --
साथ हो तुम तो ,दुनिया सुंदर है ,
फूल राहों में बिछे हैं साथी ,
हरेक आवाज जो आती है ,
बहुत मधुर है,
गीत ,संगीत कानों में गूँजते ,
दिल की धड़कन भी मानो ,
बीना का स्वर है |

भाई - बहिन--
दूर बस गए हैं ,भाई और बहना ,
रेशमी धागों का त्यौहार ,
दूर से ही मनाना,
संदेशों से ही मिठाई का ,
काम चलाना,
प्रत्येक वर्ष तो नहीं ,
हो सकता मिलना ,मिलाना |

माता -पिता --
जन्म दाता प्यार तुम्हारा पाया ,
पालन - पोषण किया तुमने ,
तुम्हारे दिए संस्कार ,
आज हमारे बच्चों में हैं ,
कुछ नहीं भूले हैं हम ,
पर सदा तुम्हारे साथ हैं हम |

ज्यों - ज्यों बड़े होते जाते ,
सबका बनता संसार अलग ,
पर सब एक दूजे के हैं ,
दिल ,दिमाग और यादों में |



KI MAIN EK AAWARA PANCHHEE ( GEET )

कि मैं एक आवारा पंछी

पंछी बनूँ उड़ जाऊँ ,नील गगन हो आऊँ ,
पवन के संग -संग गगना में ,बदरा को छू आऊँ ,
परीलोक की परियों ने ,दिए हैं पंख उधार ,
उन पंखों को पहन के मैं भी ,परीलोक घूम आऊँ |

पंछी उड़ते दाना चुगते ,मैं तो बर्गर ,पिज़्ज़ा खाऊँ ,
सदा पानी पीना छोड़कर ,कॉफी ,पेप्सी पी जाऊँ ,
मैं हूँ मस्तमौला पंछी ,मधुर गीत मैं गाऊँ ,
उन गीतों की धुन पर ही मैं ,
ठुमक कर नाच दिखाऊँ |

नील गगन के टिम -टिम तारे ,उन तक मैं उड़ जाऊँ ,
चंदा के झूले में झूलूँ ,तारों की तरह टिमटिमाऊं ,
गगन के अलग -अलग रंग देखूँ ,
इंद्रधनुष बन गगना का सौंदर्य बढ़ाऊँ |

पंछी तो पवना संग उड़ते ,दूर नहीं वो जाते ,
मैं तो अंतरिक्ष में जाकर ,सपना पूरा कर आऊँ ,
याद करूँ ये गण मैं ,और मस्ती में गाऊँ ---
" पंछी बनूँ उड़ती फिरूँ ,मस्त गगन में ,
आज मैं आज़ाद हूँ ,दुनिया के चमन में "|


EK LADKI JO SABKI MAUT KA KARAN JAAN SAKTEE HAI ( SHO STO )

एक लड़की जो सबकी ,
मौत का कारण जान सकती है


लड़की है या जादूगरनी ,कैसे जाने मौत का कारण ?
जादू से सब जाना जाता ,तो पुलिस की क्या थी जरूरत ?
क्या आज के जादूगर ,ये सब कुछ कर सकते हैं ?
एक बक्से से वो तो ,लड़की को गायब कर सकते हैं |

पानी कहीं से निकालते , कहीं कबूतर हैं उड़ाते ,
नोटों को एक की जेब से गायब करते हैं ,
तो दूसरों की जेबों में से पाकर ,
अपने खेल को आगे बढ़ाते हैं |

यही है जादू दुनिया में ,भूत ,भविष्य क्या जाने कोई ,
जो यह कुछ जान पाएगा , सिद्ध आत्मा होगी कोई |

पर है ऐसी लड़की कौन ? पुलिस नहीं उसको जाने ,
करो फ़ोन सौ नंबर पर ,ढूँढे ऐसी लड़की को ,
फिर रहस्य नहीं रहेगा कुछ ,पुलिस भी चैन से सोएगी ,
                      पुलिस भी चैन से सोएगी |