Wednesday, September 2, 2020

HAMARA GHAR ( GEET )

   हमारा घर   


" ये मेरा घर ,ये तेरा घर ,

किसी को देखना हो गर ,

तो पहले आके माँग ले ,

मेरी नज़र ,तेरी नज़र |"

ये गीत मेरे घर का है ,

ये गीत हमारे घर का है ,

हमारी आरज़ूओं के घर का है |


हमने जिसे बसाया था ,

दिल से जिसे सजाया था ,

उम्मीदों ,आशाओं का घर ,

विश्वासों के तोरण का घर ,

खुशियों की मिठाइयों से भरा ,

मुस्कानों के नमकीनों से हरा ,

वो घर जो देखना है तो ,

देखो उसे मेरी नज़रों से |


कल्पनाओं से सजाया ,

दीपकों से रोशन किया ,

अरविंदों की खुशबुओं से महकाया ,

हम सभी के अंश ने ,

अल्पनाओं से रंगा ,

नियोति है यही घर की ,

बरस दर बरस फूले -फले ,

ऐसा इंद्रधनुषी घर ,

दूजा नहीं होगा कहीं |

 

Tuesday, September 1, 2020

KAISII AAZADI ? ( DESH )

                         कैसी आज़ादी ?

 

दासता से मिली आज़ादी ,अपने वीरों के कारण ,

दासता की टूटी बेड़ियाँ ,अपने वीरों के कारण ,

बाहर वालों ने लूटा ,अंदर की फूट के कारण ,

देश गरीबी के गर्त में ,डूबा ना समझी के कारण | 


देश में ना थी कहीं एकता ,सब के अलग थे रस्ते ,

मैं हिन्दू हूँ ,मैं मुस्लिम हूँ ,सब थे यही समझते ,

नहीं प्यार था आपस में ,सबके अपने बस्ते ,

भाषाएं सबकी अलग थीं ,अलग थे सब ही चलते | 


ऐसे में ही कुछ वीरों ने ,एक सूत्र बनाया ,

सबको बाँधा उसी सूत्र में ,देश प्रेम उपजाया ,

उपजा देश प्रेम जब उनमें ,एक हुए कुछ लोग ,

उन्हीं ने देश भर में ,"स्वराज्य " का नारा लगाया | 


समझ गए तब भारतीय ,उनका साथ निभाया ,

बढ़ते -बढ़ते वीर बने सब ,अपना अधिकार जमाया ,

कुछ तो लटके फाँसी पर ,कुछ ने गोली खाई ,

कुछ लोगों ने तो अहिंसा ,का रास्ता अपनाया | 


सब मिलकर जब एक हो गए ,दुश्मन डरकर भागा ,

तभी तो मित्रों  देश का ,सोता भाग्य भी जागा ,

आज हैं हम आज़ाद देश के ,जिम्मेदार नागरिक ,

अधिकार हमें बहुत प्राप्त हैं ,संविधान जो ऐसा लागा | 


नहीं बोलने पर पाबंदी ,नहीं धर्म ,जाति पर ,

पढ़ना ,लिखना मिल जाता है ,जो हम चाहें ,अपनाएं ,

जीवन तो बगिया है मित्रों ,इसमें हम जो चाहें ,

उसी रंग ,उसी खुशबु ,उसी प्यार के ,फूल खिलाएं ,

क्योंकि हम हैं ,आज़ाद देश के ,जिम्मेदार नागरिक ,

सभी वीरों को नमन ,जय हिंद |

E - WATAN TERE LIE ( DESH )

 

      ए -वतन तेरे लिए 

 

दुनिया के आकाश में उभरा ,चमकीला एक सितारा ,

और कोई नहीं है मित्रों ,वो तो अपना भारत प्यारा ,

दासता की बेड़ियों से ,हुए थे जब मजबूर ,

आज़ादी की दौलत हमको ,वीरों ने दिलवाई | 

 

बोस ,भगतसिंह ,लक्ष्मीबाई ,आज़ाद और पटेल ,

कोई फाँसी पर लटका ,किसी ने सीने पर गोली खाई ,

कुछ ने अहिंसा को अपनाया ,कुछ ने बढ़कर ललकारा ,

किस -किस का हम नाम लिखेंगे ,सभी को नमन हमारा | 

 

आज के दिन तिरंगा अपना ,लाल -किले पर फहराया ,

उसी दिन का जश्न मनाने ,शेर अकेला ही आया ,

उसने आगे बढ़कर ही ,नयी राह दी देश को ,

उसी राह पर चलकर ही ,सच करेंगे सपनों को | 

 

साथ शेर का देकर हम ,कर्त्तव्य करें अपना पूरा ,

तभी तो आने वाले कल में ,होगा अपना पूरा ,

वंदे मातरम कहते -कहते ,आगे बढ़ते जाएँगे ,

देश भक्ति की राह में मित्रों ,जीवन सफल बनाएँगे | 

 

आज इस महामारी के संकट में ,फँसी है दुनिया सारी ,

भारत माता के बच्चे भी ,झेल रहे हैं ये बीमारी ,

फिर भी डट कर खड़े हुए ,हैं वीर हर सीमा पर ,

अपनी जान की नहीं है परवाह ,दूजे की जान पे वारी | 

 

है नमन सभी को मित्रों ,देश के वीर सपूतों ,

ईश्वर भी आशीष दे रहा ,भारत के वीर सपूतों | 

                                    जय हिंद | 

 

CYCLE ( MANORANJAN )

    साइकिल 


बचपन में मिली साइकिल बंधु ,

नहीं आज तक चल पाई ,

बिना गियर वाली साइकिल भी ,

दो पहियों पर ना संभल पाई |


पाँच गियर वाली मारुति को ,

हम तो खूब चला पाए ,

सीखा ना बचपन में फिर भी ,

हम उसको दौड़ा पाए |


कार के चक्के दौड़ गए ,

काली सी इन सड़कों पर ,

पर दो पहियों वाली साइकिल ,

अब भी रुकी पड़ी है ,

नहीं चली है अब तक बंधु ,

आज भी अड़ी खड़ी है |

PADHA TO BADHA ( DESH )

 

पढ़ा तो  बढ़ा

 

पहला शब्द तो माँ ही सीखा ,माँ से ही सीखा ,

चलना ,बोलना ,खाना ,सभी कुछ तो माँ से सीखा ,

फिर भाषा का चक्कर क्या है ?

मातृभाषा ही सीखेंगे हम ,बोलना ,पढ़ना ,लिखना | 

 

हिंदी हो, मराठी हो ,या फिर हो गुजराती ,

कुछ भी सीखें हम सब ,हैं तो भारतवासी ,

सभी बच्चे सीखें ,पढ़ना और लिखना ,

तभी तो अगली पीढ़ी ,सीखेगी आगे बढ़ना | 


बच्चा हो या बच्ची ,है जरूरी पढ़ना ,

विकास की ओर कदम बढ़ेगा ,जब आएगा लिखना ,

क्रमबद्ध रूप से शिक्षा सब पाएं ,पढ़े ,लिखे जन उन्हें पढ़ाएं ,

मेहनत से ही तो हम ,अपना देश आगे ले जाएं | 


बच्चे सभी पढ़ना सीखें ,ज्ञान को वो गुनना सीखें ,

तभी तो अगली पीढ़ी ,चढ़ेगी अगली सीढ़ी ,

नहीं कदम फिर रुक पाएगा ,हर बच्चा चढ़ जाएगा ,

नहीं कोई अनपढ़ जन हो ,भारत में हर कोई पढ़ा हो ,

तभी तो भारत विकसित ,देशों की श्रेणी में आएगा ,

तभी तो दूजे देश कहेंगे ,"पढ़ा है भारत ,तभी तो बढ़ा है भारत " | 


BATAAO MITRON ( PREM )

 

             बताओ मित्रों

 

दो पल को मिलीं नजरें ,उसमे ही झुक गईं ,

क्या बताऊँ सखियों ,क्या दिल का हाल था ? 

कोई जादू था जो मेरे ,दिल में उतर गया ,

क्या जादू था जो मेरे ? दिल को चुरा गया | 

 

शब्दों का जाल मेरा ,दिल बुन रहा था ,

जुबां पे एक भी तो ,ना शब्द आ रहा था ,

लब खुल नहीं रहे थे ,कुछ कह नहीं रहे थे ,

हमेशा से बोलते लब ,सकुचा रहे थे | 

 

कैसे कहूँ मैं जानम ,तुमने दिल चुरा लिया है ,

दिलवाली थी मैं पहले ,बेदिल कर दिया है ,

दिल एक ही तो होता ,वो भी हुआ है चोरी ,

क्या रपट मैं लिखाऊँ ,पर किसके ख़िलाफ़ होगी ? 

 

सखियाँ भी चुप हैं मेरी ,ना दे रहीं सलाहें ,

कैसी हैं ये सखियाँ भी ,मुस्कातीं धीरे -धीरे ,

आज तो मैं मित्रों ,सखियों का ,विश्वास क्या करूँ ? 

तुम ही बताओ मित्रों उसे ,कह दूँ या चुप रहूँ ?

NAAM LIKHA THA USKA ( PREM )

    नाम लिखा था उसका 


प्यार की पहली चिट्ठी ,जब आई थी उनकी ,

हमने चूम लिया उस जगह को ,

जहाँ पे नाम लिखा था उनका ,

वह था प्यार का पहला किस ,

जिसपे नाम लिखा था उनका |


शादी में जब पहनी चूड़ियाँ ,

प्यार से उनको चूम लिया था ,

क्योंकि उन लाल -हरी चूड़ियों की ,

झंकार पे नाम लिखा था उनका |


ईश्वर ने जब दी हमें एक ख़ुशी ,

नन्हीं ,प्यारी सी ,कोमल बिटिया ,

प्यार में भर उसको चूमा ,

इस प्यार पे नाम लिखा था उसका |


ईश्वर ने दी एक और ख़ुशी ,

नन्हा,प्यारा ,मुस्काता बेटा ,

हमने प्यार से चूम लिया ,

इस चुम्बन पे नाम लिखा था उसका |


ये चुम्बन थे प्यार भरे ,

सबके थे अधिकार भरे ,

इसमें कौन सी पहली किस ?