Thursday, October 10, 2024

KYAA ? ( SAMAJIK )

 

                          क्या  ?


जिंदगी हमारी डूब जाती है ,जब झूठके समंदर में ,

हम परेशान हो उठते हैं दोस्तों ,

जिंदगी जब सच की नाव पर ,सवार होती है ,

सब परेशान हो उठते हैं क्यों ? 

अब बताओ तुम्हीं ,हम क्या करें दोस्तों ? 


अहंकार तो दोस्तों ,अहंकारी पर ही भारी होता है ,

इसलिए अहंकार को छोड़ ,नम्रता को अपनाओ ,

मगर किसी को अहंकार हो ,तो वह क्या करे दोस्तों ? 


नम्रता अपनाने के बाद भी ,ग़लतफ़हमी अगर सताए ,

तो वह तो सच को पास में ,फटकने भी नहीं देती ,

गलतफहमी होने पर ,हम क्या अपनाएँ दोस्तों ? 


दूसरों के बारे में ,कभी कोई अनुमान ना लगाओ तुम ,

क्या उसकी उलझनों की ,जानकारी है तुम्हारे पास ? 

तो क्यों अपने दिमाग को ,उलझनोंमें लपेटो दोस्तों ? 


Monday, October 7, 2024

REET GAYAA ( JIVAN )

 

                         रीत गया 


जो बीत गया ,वो रीत गया ,जो है शेष ,वही विशेष ,

भूत काल में किए कर्मों को ,हम बदल नहीं सकते ,

दोस्तों ,मगर आने वाले कल ,यानि भविष्य  में ,

हम वही कर सकते हैं ,जो हम करना चाहते थे ,

दोस्तों ,इसलिए जो है शेष ,वही विशेष || 


मुस्कानें बाँटना ,खुद को भी मुस्काता है ,

खुशियाँ बाँटना ,खुद को भी खुश करता है ,

इसलिए लाओ ,अपने होठों पर मुस्कान ,

और भर दो ,दूसरों की भी खान || 


रंगों से भर दो ,अपने बनाए चित्रों को ,

चित्र बोल उठेंगे ,और आप भी मुस्कुरा उठोगे ,

तो दोस्तों यही  है ,मुस्कानें बाँटने का तरीका ,

दूसरों को खुश करने का तरीका ,

खुद भी खुश होने का तरीका || 


Sunday, October 6, 2024

SUNDARTAA ( CHANDRAMAA )

 

                                 सुंदरता 


तुम पुकार लो ,जीवन संवार लो ,

अपना प्यार हमें दो ,हमारा प्यार लो ,

जीवन की बगिया को ,फूलों से महका लो ,

सुंदरता दुनिया की ,दिल में बसा लो || 


इंद्रधनुष के रंगों को ,आँखों में बसा लो ,

दामिनी की चमक से ,आँखों को चमका  लो ,

दामिनी की गर्जन से ,धड़कनें बढ़ा लो ,

सुंदरता दुनिया की ,दिल  बसा लो  || 


चंदा की चाँदनी से ,जीवन चमका लो ,

चाँदी जैसे रंग में ,आँचल रंग डालो ,

चंदा की मुस्कान को ,होठों में उतार लो ,

सुंदरतादुनिया की ,दिल में बसा लो ||  


Friday, October 4, 2024

SAATH BADARAA KAA ( JALAD AA )

 

                          साथ बदरा का 


मेरे प्यारे बदरा दोस्त ,पवन संग उड़ता चल ,

हर जगह ,हर राह पर ,पानी प्यार का बरसाता चल || 


तेरे शीतल जल से ,तपन दूर हो धरती की ,

धरती प्यार भरी वाणी में ,स्वागत उसका करती सी || 


हरी - भरी धरती चहकी ,बदरा ने खूब बरसाया जल ,

धरती ने ही इस मौसम में ,खूब - खूब पाया जल || 


जन -जीवन फूलेगा - फलेगा ,पाएगा शीतल जल ,

बदरा को देगा धन्यवाद ,देने पर शीतल जल || 


बदरा भी पवन संग झूमेगा ,पाकर उसका साथ ,

पवन भी बह चलेगी ,पाकर बदरा का साथ || 


Thursday, October 3, 2024

KARO BHALAAI ( KSHANIKAA )

 

                           करो  भलाई


मीठा - मीठा बोल के ,मन सबका ललचाय ,

मगर नियत खराब हो ,तो बुरा वो कर -कर जाय ,

बुरा वो कर जाय ,तो उससे दूर रहो ,

उसी के कारण तुम किसी ,मुश्किल में ही फँस जायँ  ||


कड़वा बोले जो कोई ,बुरा वो लगता जाय ,

मगर नियत का साफ हो ,अच्छा वो कर जाय ,

अच्छा वो कर जाय ,उसे संग ही राखो ,

उसी के कारण तुम सभी ,मुश्किल से वापस आय || 


करते रहो भलाई तुम ,जो तुमसे हो पाय ,

उस भलाई से ही , मदद काहू की हो जाय ,

मदद काहू की हो जाय ,तुम्हारा भी अच्छा हो ,

उस जरूरत मंद की ,दुआ तो तुम ही पायँ  || 


दो मुस्कान किसी को ,मन उसका खिल जाय ,

दोगे जो मुस्कान जो ,तेरा मन भी खिल जाय ,

तेरा मन खिल जाय ,तो खुशियाँ मिलेंगी सबको ,

ऐसे में तो जग में ,सबकी खुशियाँ खिल जायँ ||

Wednesday, October 2, 2024

LIKHVAAOON ( RATNAAKAR )

 

                        लिखवाऊँ 


आ सागर मेरी बाँहों में आ ,

तुझको गले लगाऊँ मैं ,

साथ तेरे मुस्काऊँ मैं || 


रहेंगे हम साथ - साथ हमेशा ,

एक ही छत के नीचे ,

तू है मेरा ,मैं हूँ तेरी ,

दुनिया को समझाऊँ मैं || 


कोरा कागज मेरा मन था ,

कोरा कागज तेरा मन था ,

उन दोनों पे एक दूजे का ,

नाम जरूर लिखवाऊँ मैं || 


चंचल लहरें हँसते - हँसते ,

हम को हैं बुलातीं ,

उनके पास भी फिर से ,

अपना पता लिखवाऊँ मैं || 


Tuesday, October 1, 2024

MAHAKTII MAATII ( DESH )

 

                         महकती माटी 


फूलों की महक से ,दुनिया महक जाती है ,

उन्हीं फूलों के इत्र से , दुनिया महक जाती है ,

मगर दोस्तों क्या आपने ? 

वर्षा की पहली बूँदों से आती ,

मिट्टी की सौंधी महक ,महसूस की है कभी ??

 

इससे सुंदर और प्यारी महक ,महसूस की क्या आपने ?

इतनी महकीली महक ,इतनी रंगीली महक ,

किसी और की नहीं है दोस्तों || 

 

हमारी माटी की महक ,हमारी वर्षा की महक ,

यही महक तो हमारा जीवन है ,कोई भी इत्र ,

कोई भी फूल ,उसकी बराबरी नहीं कर सकता ,

तभी तो माटी की महक के लिए ,किसी ने ,

बहुत सुंदर लिखा है ,-- " चंदन है माटी मेरे देश की "||