Sunday, December 7, 2025

GEET BUNEY ( KSHANIKAA )

 

                             गीत बुने 

 

कलम तू सुंदर - सुंदर लिख ले  ,

ऐसे शब्द तू चुन ले , बुन  ले  ,

जो जग में मुस्काते फूल खिलाए  ,

और जग के सारे चमन महकाए   || 

 

सब की आँखें चमक से भर जाएँ  ,

सब के दिल खुशी से खिल जाएँ   ,

दोस्तों की महफिल रंगों से सज जाए  ,

सभी गीतों की लय में समा  जाएँ    || 

 

मैंने तुझे प्यार के जो शब्द दिए  , 

उन्हीं शब्दों को तू  लिख दे हर ओर  ,

उन्हीं शब्दों से मैं गीत बुन लुँगी  ,

और सभी उन्हीं गीतों को प्यार से गाएँगे   || 

 

Saturday, December 6, 2025

UDDHAAR ( JALAD AA )

 

                        उद्धार  

 

बदरा जो छाए गगन में , चाँद का पर्दा बन गया  ,

बदरा के आँचल को , चाँद ने अपना घूँघट बना लिया  ,

धरा ने बदरा के पार  , चाँद का चेहरा नहीं देखा ,

धरा ने तो दामिनी की  , रोशनी को देख लिया  || 

 

बदरा ने जो भेजी बरखा  , तो उस जल से तृप्त हो गयी  ,

प्यास धरा की जो बुझी , नदिया , सागर भर गए  ,

नदिया जब उछली , दौड़ी , सागर की लहरें भी मचलीं  ,

दामिनी ने हर वादे को  , पूरी तरह निभा दिया  || 

 

हरियाली छाई धरा पर , धरा का शृंगार हो गया  ,

खिल उठे फूलों के चमन ,

बाग - बगीचों का उद्धार हो गया  ,

जग सारा महक उठा  , जग सारा महक उठा   || 

 

Friday, December 5, 2025

BHAAV SHABDON KE ( KSHANIKAA )

 

                   भाव शब्दों के 

 

लिख दे लेखनी शब्द मधुर  ,

उपजे   हैं जो मेरे दिल से   ,

तू भी प्यार करे मुझ से   ,

मैं भी प्यार करूँ तुझ से   || 

 

शब्दों का खजाना है तुझ में  ,

भावों का खजाना मुझ में पलता  ,

तेरे शब्द उतरें कागज पर  ,

भावों का खजाना मुझ में  चलता   || 

 

तू तो मीठे शब्द संवार  ,

मैं भावों को लेती हूँ निखार  ,

जीवन तेरा - मेरा मिल कर  ,

सब कुछ ही लेगा , गीतों को संवार   || 

 

गीतों  में जब शब्द जुड़ेंगे  ,

भाव भी तो शामिल होंगे  ,

जब सब सुनेंगे   गीतों को  ,

तभी तो सब ही खुश होंगे   ||  

Thursday, December 4, 2025

BANAA DE RATNAAKAR ( RATNAAKAR )

 

                     बना दे रत्नाकर 

 

डुबकी मारी सागर में  , मिला ना मोती एक  ,

जबकि सागर में तो  , रत्न भरे अनेक  || 

 

सागर खारा ही सही  , रत्नाकर है वो  ,

उसको ही रत्न मिलेंगे  , डुबकी लगाए जो   || 

 

सागर तेरे द्वार पर  , खड़े हैं तेरे मित्र  ,

जो करते रहते हैं  , सदा ही तेरा जिक्र   || 

 

सागर द्वार खोल तू  , अंदर आने दे हमको   ,

हम वही मित्र हैं तेरे  , प्यार तू करता जिनको   || 

 

ना मैं मछली , ना मैं लहर हूँ , तेरी सागर  ,

जो तैर - तैर कर ,  आ जाऊँ तेरे पास मैं सागर  ,

अपने अंदर के कुछ रत्नों को देकर   ,

बना दे मुझको भी रत्नाकर  , अपने जैसा  , अपने जैसा  ही  ||  

 

Wednesday, December 3, 2025

MUSKAATE SHABD ( KSHANIKAA )

 

                          मुस्काते शब्द 

 

दोस्तों कितनी दूरियाँ हुईं  , उम्र बढ़ने के बाद  ,

 कभी तो  मिलने की  , कोशिश कर लो दोस्तों  || 

 

मेरे दरवाजे की घंटी बजा दोगे  , 

तो बहुत अच्छा लगेगा  ,

ना हो तो एक फोन ही तुम  , मिलाओ तो सही  || 

 

फोन पर ही , कुछ तो बातें होंगी  ,

मुलाकातें  ना सही  ,

जज्बात ही आपस में मिल जाएँ  || 

 

कुछ तो मुस्काते शब्द ही  , पहुँचे एक - दूजे तक  ,

कुछ तो यादों की तस्वीरें  , उकेरी जाएँ  शब्दों में  || 

 

Tuesday, December 2, 2025

PAVAN ( JIVAN - DAYINI ) BHAG - 2

 

                           जीवन - दायिनी 

 

जग वालों को , साँसें देने वाली पवन ,

तू तो सब की  प्यारी  है  , मेरी सहेली है  ,

दिखाई तू नहीं  देती , किसी को  ,

मगर पवन तू  , अहसास तो देती है  ,

अपने होने का  , अपने  बहने का    || 

 

शीतलता ही , तेरा गुण है  ,

सबको शीतलता देती है  ,

साँसों से सबको जीवन  मिलता ,

 तू ही तो  , जीवन - दायिनी है पवन  || 

 

काश तुम हमें , दिखाई देतीं  पवन  ,

काश तुम पानी की तरह  , तो दिखाई देतीं  ,

मगर जो अहसास , तुम देती हो   ,

वह तो कोई , दूसरा नहीं दे पाया  || 

 

तुम से सुंदर , तुम से अच्छा कोई नहीं  ,

पवन , पवन , तुम ही तो सच्ची सहेली हो  ,

जीवन हो हमारा   , प्राण हो हमारा   ||  

 

Monday, December 1, 2025

BAATEN KAR LO ( KSHANIKAA )

 

                          बातें कर लो 

 

ये हमारा जीवन है दोस्तों  ,

सपनों में डूबा , मुस्काता हुआ  ,

अपने सपनों को  , साकार कर लो दोस्तों  ,

सभी दोस्तों को , याद कर लो ,

सभी दोस्तों से  ,  बातें कर लो दोस्तों   || 

 

ऐसा करने से , सभी का जीवन मुस्काएगा  ,

सभी कुछ सुंदर बन   जाएगा ,

तो बढ़ चलो राह पर  ,

खिलखिलाहटों में , डूब जाओ दोस्तों   || 

 

कोई अपने आने वाले कल को  ,

नहीं जानता  है दोस्तों  ,

तुम अपने दोस्तों से मिलकर ही  ,

जीवन को  महका लो , मुस्कुरा लो दोस्तों   || 

 

ये मुस्कान और महक ही तो  ,

दिल को सुकून दिलाएगी  ,

खुशियों की डोली आएगी अपने घर  ,

गमों को ले जाएगी बाहर  , हाँ  जी  ! बाहर   ||