Saturday, September 17, 2022

LEKHAA - JOKHAA ( JIVAN )

 

                 लेखा - जोखा 


बीता पहला दशक बंधु  जीवन का ,

अनजाने में ,ना समझी में ,

शुरु में अक्षर - ज्ञान हुआ था ,कविता -कहानी ,

प्रश्न -उत्तर ,हिंदी ,इंग्लिश और गणित समस्या हल करने में | 


दूसरे दशक में बड़ा हुआ क्षेत्र ,पढ़ना -लिखना हुआ अधिक ,

थोड़े खेल -कूद भी बढ़े ,सोच भी अब बढ़ने लगी थी बंधु |

 

दशक तीसरे में तो बंधु ,जीवन बिल्कुल बदल गया ,

पढ़ाई -लिखाई हुई पूरी ,मायका छोड़ ससुराल हुआ | 

 

चौथे दशक में हमारे ,प्रथम दशक के दर्शन हुए , 

अपने बच्चों में ,वही कहानी फिर से शुरु हुई | 

 

दशक पाँचवें में बढ़ी जिम्मेदारियाँ ,बच्चों की बड़ी पढ़ाइयाँ ,

उनकी बदलती जीवन शैलियाँ ,उनका बढ़ता कार्य क्षेत्र | 

 

छठा दशक तो हमें दिखा गया आईना ,

हम आए थे माता -पिता से दूर ,अपने कार्य क्षेत्र में ,

अब बच्चे गए अपने कार्य क्षेत्र में  | 


बीता जब दशक छठा ,तो हुए हम अकेले ,

क्षमताएँ हुईं ढीली ,कार्य क्षेत्र से सेवा -निवृत्ति ,

समय बढ़ा और फिर आए बच्चों केबच्चे ,

फिर से चली वही दिनचर्या | 


तो बंधु यह था ,अपने जीवन का लेखा -जोखा ,

अच्छा लगे तो बताना ,

अपने जीवन से अलग या भिन्न लगे तो बताना  | 



Wednesday, August 31, 2022

JHADII ( RATNAKAR )

                      झड़ी 

 

बदरा से जल की झड़ी लगी ,इतना जल बरसा कि ,

सागर की लहरें उफ़न चलीं ,तट की ओर ,

सागर ने बाँह पकड़ रोका ,वापस अपनी राह लौटाया | 

 

सागर की गहराई बहुत ही ,लहरों की ऊँचाई बहुत ही ,

कूद -कूद कर लहरें खेलें ,सागर का भी दिल खुश होता ,

लहरें उसकी दोस्त हैं घनी ,

उनकी ख़ुशी तो है सागर की ख़ुशी | 


सागर के दिल में है छिपा ,

लहरें सोचें लिए खजाना हम चलें बाहर ,

मगर वज़न ले चलना मुश्किल ,

वापस चलीं सागर की ओर ,

वापस चलीं सागर की ओर | 


Monday, August 29, 2022

SAJAA KAAFILA ( JIVAN )

 

             सजा काफिला 

 

घबराना नहीं कभी कठिनाइयों से ,

ऐ दोस्त ,अगर अंदर कुछ टूटन हो ,

तो आना पास हमारे ,

अपने दिल का हाल बताना | 


दोस्तों के पास तो हौसलों की ,

सिलाई होती है ,

आत्मविश्वास के धागों से कढ़ाई होती है | 


बढ़ता है आत्मविश्वास तो ,

कठिनाइयाँ कम हो जाती हैं ,

मुस्कुराहटें अपने आप बढ़ जाती हैं | 


दोस्ती का तो माहौल ही ऐसा है ,

कहकहों और खिलखिलाहटों ,

का काफिला सजा ही रहता है | 


Tuesday, August 23, 2022

AAJ KE BHOOT ( KSHANIKA )

 

                आज के भूत 

 

आया - आया जादूगर आया ,

बच्चों आओ ,साथ बड़ों के ,

लेकर जादू का चश्मा ,

लगाएगा  तो देख पाएगा ,

जो कुछ दिखता सब को ,

और जो नहीं दिखे किसी को ,

दबा ,ढका ,छिपा ,उघड़ा ,सभी कुछ | 


देखो अब आया है तांत्रिक ,

अपना तंत्र - मंत्र का चश्मा ,

लगा के देखेगा ,दुनिया की दबी ,

छिपी वो सभी आत्माएँ , जिन्हें सब कहते ,

भूत ,प्रेत ,जो नहीं दिखते हैं औरों को | 


आज के वैज्ञानिक युग में ,नया है चश्मा ,

जिसका नाम माइक्रोस्कोप ,

जिसका प्रयोग डॉक्टर करते ,

जो आज के तांत्रिक हैं ,

आज के भूत वायरस हैं ,

अलग -अलग नाम होता ,बीमारी के अनुसार ,

दवा रुपी भभूति से उन भूतों को मारते हैं ,

मरीज को ठीक करते हैं ,

आज समय बदला है बंधु | 


Tuesday, August 16, 2022

SAAWAN ( JALAD AA )

 

                          सावन 

 

सावन की झड़ी लगी है बंधु ,

बदरा की गर्जन भी शामिल है ,

ऐसे मौसम में तो बंधु ,

दामिनी की चमकन भी शामिल है | 

 

बिना दामिनी बदरा का वज़ूद क्या है ? 

बिना बदरा सावन कुछ नहीं ,

बदरा और दामिनी दोनों मिलें तो ,

सावन है ,सावन है बंधु ,सावन है | 

 

चारों ओर जल ही जल है ,

हर तरफ छायी हरियाली है ,

सब ओर पेड़ - पौधे खुश हैं ,

पूरी धरा ही मानो तृप्त है | 


पेड़ों पर झूले लगने से ,

बच्चे - बड़े झूलते बारी - बारी ,

यही तो सावन का महीना है बंधु ,

अभी तो धरा तृप्त हो गई है सारी | 


Sunday, August 14, 2022

AMRIT MAHOTSAV ( DESH )

 

 

 

                     अमृत महोत्सव 

 

कितने थे वीर देश के ? जान की निछावर देश पर ,

कितने थे लाल माँओं के ?हुए कुर्बान देश पर | 


फाँसी पे लटके कुछ तो ,सीने पे गोली खाई थी ,

पर सब किसी के दिल में बसी ,भारत की माई थी | 


आज़ादी मिली जब देश को ,सब ही खुशियों में डूब गए ,

कुछ - कुछ की तो पलकों में ,ख़ुशी के आँसू तैर गए | 


देश के लाडलों के बलिदान ने ,दिलाई आज़ादी देश को ,

लहराया तिरंगा अपना ,लहराया तिरंगा अपना | 


आज हुए पिचहत्तर बरस ,अमृत महोत्सव आ गया ,

आज़ाद भारत अपना आज ,पिचहत्तर बरस का हो गया | 


Friday, August 12, 2022

BACHCHE - TAARE ( CHANDRAMA )

 

                           बच्चे - तारे 

 

उतर आ चाँद धरती पर ,साथ में ले के तारों को ,

धरती मेरी अनोखी है ,मज़ा आएगा तारों को | 


खेलेंगे तारे बच्चों संग ,सभी खुश होते जाएँगे ,

तुम भी खुश हो जाओगे चंदा ,मज़ा आएगा बच्चों को | 


खेलों का रूप तो चंदा ,यहाँ दिन ,दिन बदलता है ,

कोई धरती पे चलता है ,कोई पानी पे चलता है | 


हवा में भी तो उड़कर के ,पकड़ते एक - दूजे को ,

इन्हीं सब खेलों में तो ,मज़ा आएगा बच्चों को | 


चंदा तुम खुश होगे ,मैं भी तो खुश हूँगी ,

जो भी देखेगा ये खेल ,वही तो बहुत खुश होगा ,

मज़ा आएगा तारों को ,मज़ा आएगा बच्चों को |