Saturday, May 15, 2021

MAA ( MOOD OF THE MONTH )

  

                  माँ 

 

माँ तो माँ है ,जननी है ,

बच्चों की सुख करनी है | 

 

हरेक राह में दीप जलाए ,

अपने बच्चों को राह दिखाए ,

सब कुछ उनको सिखलाए ,

प्रेम ,प्यार उनपे बरसाए ,

ऐसी वो सुख करनी है | 

 

अपना सब आराम त्याग दे ,

अपना सब सुख ,चैन त्याग दे ,

तन ,मन ,धन सब कुछ वार दे ,

बच्चों को सपनों का संसार वार दे ,

अपनी सब मुस्कान वार दे ,

ऐसी वो सुख करनी है | 

 

बच्चों का दुःख हर लेती है ,

दुनिया में हर माँ ऐसी है ,

खुशियों से जीवन भर देती है ,

जीवन मार्ग प्रशस्त कर देती है ,

रंगों से जीवन भर देती है ,

ऐसी वो सुख करनी है | 

 

नमन है माँ को ,नमन जननी को ,

हे ईश्वर उनकी आत्मा को शांति देना ,

नमन ,नमन माँ ,नमन ,नमन | 

 

Tuesday, May 11, 2021

LAGAA EISA ( GEET )

 

               लगा ऐसा 

 

रात के आलम में ,ख़ामोशी के माहौल में , 

एक स्वर ,उभरा अचानक ,

पाया की अपनी ही ,चूड़ियाँ खनक गईं | 


लगा ऐसा कि जैसे तुमने ,चूड़ियों को छेड़ा था ,

चमकते सूरज की ,फैली धूप में एकाएक ,

कहीं से अंधकार छा गया,

लगा आकाश पर बदली छा गई | 

 

मगर ये तो मेरी जुल्फें हैं ,लगा ऐसा कि जैसे ,

तुमने ,हाँ ! तुमने ही ,जुल्फों को बिखराया | 

 

तभी आत्मा में कोई स्वर उभरा ,

लगा ऐसा कि जैसे ,तुमने मुझे पुकारा ,

सुनकर पुकार साजन की ,

समझी कि तुम हो आए | 


पलकें जो मैंने खोलीं ,खुद को अकेला पाया ,

जाना ये ख्वाब था सब ,तुम नहीं हो अब आए | 


 



MUKTAK --- 4

 

मुक्तक ---4 

 

1 )

   याद तेरी सताती है ,

     सामने आ जाओ तो ,

         नजर झुक जाती है ,

              तू ही बता मैं क्या करूँ ? 

                    बरखा ही तो जलाती है | 

2 )

    ऐ रुकिए जरा सुनिए ,

        हमारे दिल की दास्तां ,

             ना रुके आप तो फिर देखिए ,

                   फिर हम भी चल देंगे |  

Sunday, May 9, 2021

KAATIL CHANDA ( CHANDRAMA )

 

 

   चंद्रमा   (कातिल चंदा  ) भाग - 9 

 

आग के सीने में ,दहकते हुए अंगारे हैं ,

सिंदूरी रात के आँचल में ,

                     चमकते हुए सितारे हैं | 

 

आग के सीने में ,तपन नहीं है ,

रात के आँचल में ,

                     आज चाँद जो नहीं है | 


चाँद छिप गया है ,कातिल बन कर ,

आग सीने में भड़की है ,

                        ज्वाला बन कर | 


Saturday, May 8, 2021

JANANI HAMARI ( DESH )

 

      जननी हमारी 


मातृ भूमि , तो माँ है हमारी ,

    जिस पर हमने जन्म लिया ,

      जिस की गोद में पले बढ़े ,

         पालन - पोषण है जिसने किया ,

             उसकी हम संतान हैं ,

                 करते उसका गुणगान हैं | 

 

मातृ भूमि को करें सलाम ,

  उसको शीश झुकाते हम ,

     नमन करें नित उसको हम ,

        वो तो अपनी माता है ,

          आशीर्वाद मिला उसका ,

             उसी के कारण हम फूले -फले ,

                तभी तो करते हम गुणगान हैं | 

 

प्रकृति तो मातृ भूमि का हिस्सा ,

  जिसने जीवन संसाधन हमें दिए ,

   हँस के हमको गले लगाया ,

     सब साधन भरपूर दिए ,

        इसीलिए तो हम सब बंधु ,

           करते उसका गुणगान हैं | 

 

माँ है ,जननी  है ,जीवन दायिनी हमारी ,

  जन्म की पीड़ा सही है जिसने ,

    चलना ,दौड़ना सिखाया हाथ पकड़ ,

       बोलना ,खाना - पीना सिखाया ,

          पढ़ा -लिखा कर खड़ा किया ,

             करते हम उसका गुणगान हैं | 

 

जननी जन्म भूमिश्च ,स्वर्गादपि गरीयसि | 

 

Friday, May 7, 2021

RAS BARASA ( GEET )

 

        रस बरसा 

 

सारी रात जागी मैं साजन ,

पायल छनकी जो बैरन --- | 

 

लाज के मारे बोल ना पाई ,

तेरे बोल ने सुध बिसराई ,

लाज छोड़ कर होंठ जो खोले ,

बोली चिरैया बैरन --| 

 

रस बरसा यूँ रतिया सारी ,

भूल गई मैं दुनिया सारी ,

लेकिन उसमें डूब ना पाई ,

भोर उतर आई आँगन -- | 

 

तड़प लिए ये दिल ना माना ,

दर्द को मैंने अपना जाना ,

पर इतना भी पाती कैसे ? 

मन में रही ना तड़पन -- | 

 

Thursday, May 6, 2021

PYAAR TERAA ( GEET )

 

                  प्यार  तेरा

 

पाया जो तेरा प्यार ,तमन्ना नहीं है कोई , 

मिल जाए जैसे मंजिल न,रातों को मैं यूँ सोई | 


दर्दो आलम का रास्ता ,ना हमने तय किया ,

ग़म की किसी मंजिल ने ,ना हम पे करम किया ,

तनहाईयों की महफ़िल ,आई थी पास मेरे ,

दूरी पर यूँ रुकी वो ,झटका लगा हो कोई | 


तू प्यार से देखे जा ,और हम मुस्कुराएँ ,

हमको ना तू भुलाए और ,तुझे ना हम भुलाएँ ,

मंजिल पे ना पहुँचें ,राहों में चलते जाएँ ,

ये दुनिया सारी समझे ,भटका है राह कोई |